हमीरपुर में दर्दनाक हादसा तालाब में नहाने गए तीन मासूम बच्चों की डूबने से मौत, गांव में मचा कोहराम
यह दर्दनाक हादसा उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के मौदहा क्षेत्र के खंडेह गांव में हुआ। गांव के पास स्थित तालाब और राम जानकी मंदिर के पीछे का इलाका बच्चों के खेलने और नहाने के लिए आम जगह माना जाता है, लेकिन सुरक्षा इंतजामों की कमी के कारण यह जगह जानलेवा साबित हुई।
घटना का पूरा विवरण
गर्मी से राहत पाने के लिए सोमवार सुबह गांव के तीन मासूम बच्चे तालाब में नहाने गए थे। इनमें 10 वर्षीय प्रबल कुमार यादव, 9 वर्षीय अवधेश और 10 वर्षीय भोला शामिल थे। तीनों बच्चे सुबह करीब साढ़े दस बजे घर से निकले और बिना किसी निगरानी के तालाब में उतर गए।
नहाने के दौरान वे धीरे-धीरे तालाब के गहरे हिस्से में चले गए। पानी की गहराई का अंदाजा न होने और तैरना ठीक से न आने के कारण तीनों बच्चे एक साथ डूबने लगे। आसपास मौजूद लोगों को पहले इस बात का अंदाजा नहीं हुआ, लेकिन जब बच्चों के डूबने की खबर फैली तो ग्रामीण मौके पर दौड़े।
बचाव कार्य और स्थिति
ग्रामीणों ने तुरंत तालाब में उतरकर बच्चों की तलाश शुरू की। कुछ ही समय में एक-एक कर तीनों बच्चों को पानी से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। बच्चों की सांसें थम चुकी थीं और उन्हें बचाया नहीं जा सका।
घटना की जानकारी मिलते ही पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई। परिजन मौके पर पहुंचे तो बच्चों को मृत देखकर उनका रो-रोकर बुरा हाल हो गया। गांव का माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया और हर कोई इस दर्दनाक हादसे से स्तब्ध रह गया।
प्रशासन की कार्रवाई
सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन सक्रिय हो गया। एसडीएम मौदहा और सीओ मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रशासन की ओर से मामले की औपचारिक जांच की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
सरकारी प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया और तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
ग्रामीणों की चिंता और सवाल
इस घटना के बाद गांव में तालाबों और खुले जलस्रोतों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर तालाब के आसपास सुरक्षा व्यवस्था, चेतावनी बोर्ड या बैरिकेडिंग होती तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था। बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता की कमी भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है।
news desk MPcg