तमिलनाडु में ₹35 करोड़ की कथित रिश्वत, 15 विधायकों के इस्तीफे की साजिश और तीन गिरफ्तारियां: विजय सरकार को अस्थिर करने के आरोपों से मचा सियासी भूचाल
तमिलनाडु की राजनीति में बुधवार को बड़ा राजनीतिक विवाद सामने आया, जब अभिनेता से नेता बने तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) प्रमुख विजय के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के एक विधायक ने दावा किया कि उन्हें विधानसभा में प्रस्तावित मतदान को प्रभावित करने के बदले ₹35 करोड़ की रिश्वत की पेशकश की गई। विधायक की शिकायत के आधार पर चेन्नई पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है और पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
इस बीच, कुछ राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि कथित साजिश केवल एक विधायक तक सीमित नहीं थी, बल्कि TVK के करीब 15 विधायकों से इस्तीफा दिलाकर सरकार का बहुमत गिराने की योजना भी इसमें शामिल थी। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि पुलिस ने अब तक नहीं की है और जांच जारी है।
क्या है पूरा मामला?
TVK विधायक एन. इलैयाराजा ने 29 जून 2026 को चेन्नई पुलिस आयुक्त के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, उनसे थिरुनावुक्करासु नामक व्यक्ति ने संपर्क किया, जिसने स्वयं को Indian Political Democratic Strategies (IPDS) नामक राजनीतिक परामर्श संस्था का प्रमुख बताया।
विधायक के अनुसार, आरोपी ने दावा किया कि वह एक प्रभावशाली राजनीतिक दल की ओर से बातचीत कर रहा है। उसने कहा कि जल्द ही तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष जे.सी.डी. प्रभाकर के खिलाफ एक प्रस्ताव लाया जाएगा और उस समय इलैयाराजा को अपनी पार्टी के निर्देशों के विपरीत मतदान करना होगा।
इसके बदले आरोपी ने कथित तौर पर ₹35 करोड़ देने की पेशकश की।
रिश्वत ठुकराने पर धमकी का आरोप
शिकायत में विधायक ने कहा कि उन्होंने प्रस्ताव को तुरंत अस्वीकार कर दिया और दोबारा संपर्क न करने की चेतावनी दी। इसके बावजूद आरोपी ने कथित रूप से उन्हें और उनके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।
विधायक का आरोप है कि बातचीत के दौरान उन्हें यह विश्वास दिलाने की कोशिश की गई कि यदि वे सहयोग करेंगे तो उन्हें पूरी सुरक्षा और आर्थिक लाभ मिलेगा, जबकि इंकार करने पर राजनीतिक और व्यक्तिगत नुकसान उठाना पड़ सकता है।
पुलिस जांच और तीन गिरफ्तारियां
शिकायत मिलने के बाद चेन्नई पुलिस ने विशेष जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस ने एक राजनीतिक परामर्श संस्था से जुड़े कर्मचारी सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया।
जांच एजेंसियां आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल संचार, बैंक खातों और कथित वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही हैं। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या यह प्रयास किसी बड़े राजनीतिक नेटवर्क का हिस्सा था या कुछ व्यक्तियों की स्वतंत्र कार्रवाई।
अधिकारियों ने फिलहाल विस्तृत जांच पूरी होने तक मामले पर अधिक टिप्पणी करने से परहेज किया है।
जांच में किन नेताओं का नाम सामने आया?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पूछताछ और प्रारंभिक जांच के दौरान गिरफ्तार आरोपियों के संपर्क डीएमके नेता एवं पूर्व मंत्री वी. सेंथिल बालाजी तथा उनके भाई वी. अशोक कुमार से जुड़े होने की बात सामने आई है।
हालांकि, अब तक पुलिस ने किसी भी राजनीतिक नेता को इस मामले में आरोपी घोषित नहीं किया है और न ही किसी अदालत ने उनके खिलाफ कोई आरोप सिद्ध किया है। जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं।
15 विधायकों के इस्तीफे की कथित योजना
राष्ट्रीय मीडिया संस्थानों द्वारा सूत्रों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों में दावा किया गया है कि कथित योजना के तहत TVK के लगभग 15 विधायकों से एक साथ इस्तीफा दिलाकर सरकार को अल्पमत में लाने की रणनीति तैयार की गई थी।
बताया गया कि यदि पर्याप्त संख्या में विधायक इस्तीफा देते या दल-बदल करते, तो विधानसभा में सरकार का बहुमत प्रभावित हो सकता था।
हालांकि, पुलिस ने अभी तक इस कथित योजना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। यह दावा फिलहाल जांच का विषय है।
TVK सरकार का आरोप
तमिलनाडु सरकार में मंत्री सी.टी. निर्मल कुमार ने प्रेस से बातचीत में आरोप लगाया कि यह पूरा घटनाक्रम सरकार को अस्थिर करने और लोकतांत्रिक जनादेश को कमजोर करने की कोशिश है।
उन्होंने कहा कि—
कई TVK विधायकों से संपर्क किया गया।
अलग-अलग विधायकों को ₹10 करोड़ से ₹50 करोड़ तक की रकम की कथित पेशकश की गई।
इस पूरे मामले में कुछ प्रभावशाली राजनीतिक नेताओं की भूमिका की जांच होनी चाहिए।
मंत्री ने पुलिस से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।
डीएमके ने सभी आरोपों से किया इनकार
दूसरी ओर, डीएमके ने इन आरोपों को पूरी तरह राजनीतिक बताया है।
पार्टी प्रवक्ता ए. सरवनन ने कहा कि TVK सरकार बिना जांच पूरी हुए मीडिया में जानकारियां लीक कर रही है ताकि जनता के बीच राजनीतिक माहौल बनाया जा सके।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार के पास किसी भी डीएमके नेता के खिलाफ ठोस और कानूनी रूप से स्वीकार्य साक्ष्य हैं तो वह अदालत और जांच एजेंसियों के समक्ष प्रस्तुत करे।
डीएमके का कहना है कि केवल राजनीतिक बयान देना किसी व्यक्ति की दोषसिद्धि का आधार नहीं हो सकता।
कानूनी पहलू
यदि जांच में यह सिद्ध होता है कि किसी विधायक को धन देकर मतदान प्रभावित करने या सरकार गिराने का प्रयास किया गया, तो संबंधित व्यक्तियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निरोधक कानूनों तथा चुनाव एवं जनप्रतिनिधित्व से जुड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई हो सकती है।
हालांकि, किसी भी आरोपी की कानूनी जिम्मेदारी अदालत में आरोप सिद्ध होने के बाद ही तय होगी।
राजनीतिक महत्व
तमिलनाडु की राजनीति लंबे समय से डीएमके और एआईएडीएमके के इर्द-गिर्द घूमती रही है। विजय के नेतृत्व में TVK के सत्ता में आने के बाद राज्य की राजनीति में एक नया शक्ति संतुलन बना है।
ऐसे समय में यदि सरकार गिराने, विधायकों की खरीद-फरोख्त या सामूहिक इस्तीफे जैसी किसी साजिश के आरोप सामने आते हैं, तो यह राज्य की राजनीति पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल एक कथित रिश्वत प्रस्ताव तक सीमित नहीं है, बल्कि यदि जांच में बड़े राजनीतिक षड्यंत्र के प्रमाण मिलते हैं, तो यह तमिलनाडु की हालिया राजनीति के सबसे महत्वपूर्ण मामलों में शामिल हो सकता है।
अभी क्या स्थिति है?
विधायक की शिकायत पर एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस जांच जारी है।
तीन लोगों को गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है।
डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
कथित राजनीतिक संबंधों की भी पड़ताल हो रही है।
डीएमके ने सभी आरोपों से इनकार किया है।
किसी भी राजनीतिक नेता की भूमिका अभी जांच के दायरे में है; अदालत द्वारा किसी को दोषी नहीं ठहराया गया है।
निष्कर्ष: यह मामला अभी जांच के शुरुआती चरण में है। रिश्वत, सरकार गिराने की कथित साजिश और राजनीतिक खरीद-फरोख्त से जुड़े सभी आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी। फिलहाल उपलब्ध तथ्य शिकायत, पुलिस कार्रवाई और संबंधित पक्षों के सार्वजनिक बयानों पर आधारित हैं।
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