दिल्ली पुलिस का कमिश्नरेट डे: 1978 में लागू हुई थी कमिश्नरेट प्रणाली, जानिए क्यों 1 जुलाई है ऐतिहासिक और क्या रहा इस वर्ष के समारोह का केंद्र
राष्ट्रीय राजधानी में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाली दिल्ली पुलिस ने बुधवार, 1 जुलाई को अपना कमिश्नरेट डे (Commissionerate Day) पूरे सम्मान और गरिमा के साथ मनाया। इस अवसर पर किंग्सवे कैंप स्थित न्यू पुलिस लाइंस ग्राउंड में भव्य परेड का आयोजन किया गया, जिसमें दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, दिल्ली पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा तथा दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
कमिश्नरेट डे केवल एक औपचारिक समारोह नहीं, बल्कि दिल्ली पुलिस के प्रशासनिक इतिहास में हुए एक महत्वपूर्ण बदलाव की याद दिलाने वाला दिन है। 1 जुलाई 1978 को राजधानी में पुरानी इंस्पेक्टर जनरल (IG) प्रणाली समाप्त कर पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू की गई थी। इसके साथ ही जे. एन. चतुर्वेदी दिल्ली के पहले पुलिस आयुक्त (Commissioner of Police) बने थे।
क्यों महत्वपूर्ण है 1 जुलाई?
स्वतंत्रता के बाद कई वर्षों तक दिल्ली में पुलिस व्यवस्था पारंपरिक आईजी प्रणाली के तहत संचालित होती थी। इस व्यवस्था में कानून-व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए पुलिस को कार्यपालिका और जिला प्रशासन पर निर्भर रहना पड़ता था।
हालांकि, राजधानी के तेजी से बढ़ते विस्तार, बढ़ती आबादी, सुरक्षा संबंधी चुनौतियों और अपराध नियंत्रण को अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता को देखते हुए 1 जुलाई 1978 से दिल्ली में कमिश्नरेट प्रणाली लागू की गई।
इस प्रणाली के लागू होने के बाद पुलिस आयुक्त और अन्य अधिकृत पुलिस अधिकारियों को विभिन्न कार्यकारी मजिस्ट्रेट शक्तियां प्रदान की गईं, जिससे कानून-व्यवस्था बनाए रखने, निषेधाज्ञा लागू करने, सार्वजनिक सुरक्षा संबंधी निर्णय लेने और आपात परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई करना अधिक प्रभावी हो गया।
इसी ऐतिहासिक परिवर्तन की स्मृति में दिल्ली पुलिस प्रत्येक वर्ष 1 जुलाई को "कमिश्नरेट डे" के रूप में मनाती है।
उपराज्यपाल ने ली परेड की सलामी
समारोह के मुख्य अतिथि दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने भव्य परेड की सलामी ली और विभिन्न पुलिस टुकड़ियों द्वारा प्रस्तुत मार्च पास्ट का निरीक्षण किया।
परेड में दिल्ली पुलिस की विभिन्न इकाइयों ने अनुशासन, समन्वय और पेशेवर दक्षता का प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस बैंड की धुनों के बीच जवानों ने शानदार मार्च पास्ट प्रस्तुत किया।
समारोह में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, सेवानिवृत्त अधिकारियों तथा पुलिस परिवार के सदस्यों की भी उपस्थिति रही।
विशेष इकाइयों ने दिखाया दमखम
कमिश्नरेट डे पर आयोजित परेड में दिल्ली पुलिस की कई विशेष इकाइयों ने अपनी परिचालन क्षमता और आधुनिक संसाधनों का प्रदर्शन किया।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल रहे—
स्पेशल वेपन्स एंड टैक्टिक्स (SWAT) कमांडो
डॉग स्क्वाड
ट्रैफिक पुलिस
पीसीआर (Police Control Room) यूनिट
मोटरसाइकिल डिस्प्ले टीम
दिल्ली पुलिस की मोटरसाइकिल टीम ने संतुलन, समन्वय और साहस का प्रदर्शन करते हुए विभिन्न स्टंट प्रस्तुत किए, जिन्हें दर्शकों ने सराहा।
समारोह में हाल ही में गणतंत्र दिवस परेड में सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग टुकड़ी का सम्मान प्राप्त करने वाली दिल्ली पुलिस की विशेष टुकड़ी ने भी भाग लिया।
उत्कृष्ट पुलिसकर्मियों को किया गया सम्मानित
कमिश्नरेट डे समारोह के दौरान उत्कृष्ट सेवा देने वाले पुलिस अधिकारियों और जवानों को मेडल, प्रशस्ति पत्र और अन्य सम्मान प्रदान किए गए।
इसके साथ ही बेहतर पुलिसिंग, जनसेवा और अपराध नियंत्रण में उल्लेखनीय प्रदर्शन करने वाले दिल्ली के सर्वश्रेष्ठ पुलिस स्टेशन को भी ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया।
अधिकारियों ने कहा कि ऐसे सम्मान पुलिसकर्मियों को बेहतर कार्य के लिए प्रेरित करते हैं और सेवा भावना को मजबूत बनाते हैं।
पुलिस आयुक्त ने रखी भविष्य की प्राथमिकताएं
समारोह को संबोधित करते हुए दिल्ली पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक आधुनिक एवं प्रभावी बनाने के लिए पुलिस की प्राथमिकताओं का उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि आने वाले समय में दिल्ली पुलिस का विशेष फोकस निम्न क्षेत्रों पर रहेगा—
साइबर अपराधों की रोकथाम
संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई
नशा तस्करी पर नियंत्रण
महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा
अत्याधुनिक तकनीक आधारित पुलिसिंग
डिजिटल निगरानी और स्मार्ट पुलिसिंग
समुदाय आधारित पुलिसिंग को मजबूत करना
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली और जनता के सहयोग के माध्यम से राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाएगा।
कमिश्नरेट प्रणाली क्या है?
कमिश्नरेट प्रणाली ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था है, जिसमें महानगरों में पुलिस आयुक्त को कुछ कार्यकारी मजिस्ट्रेट शक्तियां भी प्रदान की जाती हैं। इससे कानून-व्यवस्था से जुड़े कई निर्णयों के लिए अलग से जिला प्रशासन की अनुमति की आवश्यकता कम हो जाती है और आपात परिस्थितियों में तेजी से कार्रवाई संभव हो पाती है।
देश के कई बड़े महानगरों जैसे दिल्ली, मुंबई, पुणे, बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद, लखनऊ, नोएडा, वाराणसी, कानपुर और भुवनेश्वर-कटक सहित अनेक शहरों में कमिश्नरेट प्रणाली लागू है।
जनता में सुरक्षा का भरोसा बढ़ाने का अवसर
दिल्ली पुलिस के अनुसार कमिश्नरेट डे केवल एक औपचारिक परेड नहीं, बल्कि जनता और पुलिस के बीच विश्वास को मजबूत करने का भी अवसर है। इस दिन पुलिस अपनी उपलब्धियों, आधुनिक संसाधनों, प्रशिक्षण क्षमता और भविष्य की रणनीति को सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत करती है।
अधिकारियों का कहना है कि तेजी से बदलती सुरक्षा चुनौतियों के बीच तकनीक आधारित पुलिसिंग, पेशेवर प्रशिक्षण और जनसहभागिता के माध्यम से राजधानी को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
news desk MPcg