पहली ही बारिश में टपकने लगी रांची की साझा लाइब्रेरी: मोरहाबादी स्टेडियम परिसर में छात्रों की पढ़ाई प्रभावित, निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव पर उठे सवाल

पहली ही बारिश में टपकने लगी रांची की साझा लाइब्रेरी: मोरहाबादी स्टेडियम परिसर में छात्रों की पढ़ाई प्रभावित, निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव पर उठे सवाल

झारखंड की राजधानी रांची में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बनाई गई मोरहाबादी फुटबॉल स्टेडियम परिसर स्थित साझा लाइब्रेरी पहली ही बारिश में सवालों के घेरे में आ गई है। मंगलवार को हुई हल्की बारिश के दौरान लाइब्रेरी की छत से कई स्थानों पर पानी टपकने लगा, जिससे वहां पढ़ाई कर रहे छात्रों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई जगहों पर पानी सीधे अध्ययन कक्ष तक पहुंच गया, जिसके कारण विद्यार्थियों को अपनी सीटें छोड़नी पड़ीं और पढ़ाई बीच में रोकनी पड़ी।

घटना के बाद भवन निर्माण की गुणवत्ता, रखरखाव व्यवस्था और संबंधित विभाग की निगरानी पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। छात्रों का कहना है कि यदि मानसून की शुरुआती हल्की बारिश में ही यह स्थिति है, तो लगातार होने वाली तेज बारिश के दौरान लाइब्रेरी में अध्ययन करना मुश्किल हो जाएगा।

दो वर्ष पहले शुरू हुई थी आधुनिक साझा लाइब्रेरी

मोरहाबादी स्थित बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम परिसर में इस साझा लाइब्रेरी की शुरुआत लगभग दो वर्ष पहले राज्य के पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को शांत, सुरक्षित और आधुनिक अध्ययन वातावरण उपलब्ध कराना था।

लाइब्रेरी में एक समय में लगभग 300 विद्यार्थियों के बैठकर अध्ययन करने की व्यवस्था है। सुबह से देर रात तक बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं यहां यूपीएससी, जेपीएससी, एसएससी, बैंकिंग, रेलवे, शिक्षक भर्ती और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पहुंचते हैं।

बारिश के दौरान टपकने लगी छत

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मंगलवार को हुई हल्की बारिश के दौरान लाइब्रेरी की छत से कई स्थानों पर लगातार पानी टपकने लगा। कुछ जगहों पर पानी की धार इतनी तेज थी कि वह सीधे अध्ययन टेबल और कुर्सियों तक पहुंच गई। इससे कई विद्यार्थियों को अपनी सीट बदलनी पड़ी, जबकि कुछ स्थानों पर फर्श पर पानी जमा होने के कारण लोगों की आवाजाही भी प्रभावित हुई।

छात्रों ने तत्काल अपनी किताबें, नोट्स, लैपटॉप और अन्य अध्ययन सामग्री को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया, ताकि वे भीगने से बच सकें। हालांकि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उनकी पढ़ाई काफी देर तक बाधित रही।

छात्रों ने जताई चिंता

लाइब्रेरी में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों का कहना है कि यह समस्या अचानक नहीं आई है। उनका आरोप है कि छत से पानी रिसने और अन्य तकनीकी खामियों की जानकारी पहले भी संबंधित अधिकारियों को दी जा चुकी है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं किया गया।

छात्रों का कहना है कि जिस लाइब्रेरी को राजधानी के हजारों प्रतियोगी छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण सुविधा के रूप में प्रस्तुत किया गया था, वही अब बरसात के मौसम में असुविधा का कारण बनती दिखाई दे रही है।

कई छात्रों ने आशंका जताई कि यदि लगातार बारिश के दौरान छत से इसी तरह पानी टपकता रहा तो इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, फर्नीचर और पुस्तकों को भी नुकसान पहुंच सकता है। साथ ही फर्श पर पानी जमा होने से फिसलने जैसी दुर्घटनाओं का भी खतरा बना रहेगा।

निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल

घटना के बाद लाइब्रेरी भवन के निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल उठने लगे हैं। छात्रों और स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस भवन का निर्माण लगभग दो वर्ष पहले हुआ हो, उसमें पहली ही बारिश में इस तरह की समस्या सामने आना निर्माण कार्य की गुणवत्ता और तकनीकी निरीक्षण पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

लोगों का कहना है कि यदि समय रहते भवन की मरम्मत और जलरोधक (वॉटरप्रूफिंग) कार्य नहीं कराया गया, तो आने वाले समय में समस्या और गंभीर हो सकती है।

रखरखाव व्यवस्था पर भी चर्चा

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सार्वजनिक भवन में नियमित निरीक्षण, समय-समय पर रखरखाव और मानसून से पहले आवश्यक मरम्मत कार्य अत्यंत आवश्यक होते हैं। ऐसी व्यवस्थाओं का उद्देश्य केवल भवन की सुरक्षा सुनिश्चित करना ही नहीं, बल्कि वहां आने वाले लोगों को सुरक्षित और सुगम वातावरण उपलब्ध कराना भी होता है।

छात्रों का कहना है कि लाइब्रेरी में प्रतिदिन बड़ी संख्या में अभ्यर्थी अध्ययन करने आते हैं। ऐसे में भवन की तकनीकी कमियों को जल्द दूर किया जाना चाहिए ताकि उनकी तैयारी प्रभावित न हो।

विद्यार्थियों ने की त्वरित कार्रवाई की मांग

प्रतियोगी छात्रों ने संबंधित विभाग से मांग की है कि लाइब्रेरी की छत की तत्काल तकनीकी जांच कराई जाए, रिसाव वाले हिस्सों की मरम्मत की जाए और मानसून के दौरान भवन को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यक जलरोधक कार्य कराया जाए।

विद्यार्थियों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में नियमित अध्ययन बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में अध्ययन स्थल पर बुनियादी सुविधाओं का सुचारु रूप से उपलब्ध होना आवश्यक है, ताकि छात्रों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।