जमशेदपुर में ब्रेन मलेरिया का बढ़ता खतरा: 4 आदिवासी बच्चों की मौत के बाद हाई अलर्ट, 108 डॉक्टरों की टीम करेगी घर-घर सर्वे

जमशेदपुर में ब्रेन मलेरिया का बढ़ता खतरा: 4 आदिवासी बच्चों की मौत के बाद हाई अलर्ट, 108 डॉक्टरों की टीम करेगी घर-घर सर्वे

झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड में ब्रेन मलेरिया (सेरेब्रल मलेरिया) के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। लगातार सामने आ रहे संक्रमण के मामलों और चार आदिवासी बच्चों की मौत के बाद राज्य स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति को गंभीर मानते हुए पोटका, मुसाबनी, घाटशिला और डुमरिया प्रखंड में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। प्रभावित गांवों में बड़े पैमाने पर चिकित्सा जांच, सर्वे, उपचार और जागरूकता अभियान शुरू किया गया है, ताकि संक्रमण को और फैलने से रोका जा सके।

राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के निर्देश पर महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के 108 चिकित्सकों की विशेष टीम प्रभावित क्षेत्रों में भेजी जा रही है। बुधवार से शुरू होने वाला यह विशेष अभियान अगले दो दिनों तक चलेगा, जिसमें चिकित्सकों की टीमें घर-घर जाकर लोगों की स्वास्थ्य जांच करेंगी, बुखार से पीड़ित लोगों की मलेरिया जांच करेंगी, दवाइयां उपलब्ध कराएंगी और ग्रामीणों को मच्छरों से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करेंगी।

चार प्रखंडों में विशेष मेडिकल अभियान

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पोटका के अलावा मुसाबनी, घाटशिला और डुमरिया प्रखंडों को भी संवेदनशील क्षेत्र मानते हुए विशेष निगरानी शुरू कर दी गई है। चिकित्सकों को अलग-अलग टीमों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक टीम में बड़ी संख्या में डॉक्टरों के साथ वरिष्ठ चिकित्सकों को भी शामिल किया गया है, ताकि गंभीर मरीजों की पहचान कर उन्हें तत्काल उच्च चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाया जा सके।

एमजीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय कुमार ने बताया कि सभी टीमों को निर्देश दिया गया है कि यदि किसी भी गांव में गंभीर लक्षणों वाला मरीज मिलता है तो उसे बिना देरी किए सदर अस्पताल या एमजीएम अस्पताल रेफर किया जाए। साथ ही प्रत्येक संदिग्ध मरीज का परीक्षण कर तत्काल उपचार शुरू किया जाए।

507 लोगों की जांच में मिले 51 नए संक्रमित

मंगलवार को पोटका प्रखंड के विभिन्न गांवों में लगाए गए विशेष स्वास्थ्य शिविरों में 507 ग्रामीणों की जांच की गई। जांच के दौरान 51 नए मलेरिया संक्रमित मरीजों की पुष्टि हुई। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, संक्रमित मरीजों को मौके पर ही एंटी-मलेरियल दवाइयां उपलब्ध कराई गईं और गंभीर मरीजों को अस्पताल भेजा गया।

विशेष जांच अभियान सबरनगर, कांदर, जोजोगोड़ा, गाम्हीरकोचा, छोटा रामगढ़, कुंदरुकोचा, झरिया और टांगराईन सहित कई गांवों में चलाया गया। इन गांवों को फिलहाल संक्रमण की दृष्टि से संवेदनशील माना जा रहा है।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, पोटका में जोबा हांसदा और विकास मार्डी नामक दो नए मरीजों को भर्ती कर उपचार शुरू किया गया है। इसके अलावा पहले से भर्ती पांच मरीजों का इलाज भी जारी है। स्वास्थ्य विभाग लगातार मरीजों की निगरानी कर रहा है।

जिला प्रशासन ने की समीक्षा बैठक

संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए जिला प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। मंगलवार शाम वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और संबंधित विभागों के साथ समीक्षा बैठक कर स्थिति का आकलन किया।

बैठक में प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा संसाधनों की उपलब्धता, जांच अभियान की प्रगति और संक्रमण की रोकथाम के उपायों पर चर्चा की गई। अधिकारियों ने बीमारी के तेजी से फैलने के कारणों की भी जांच कराने का निर्णय लिया, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

चार बच्चों की मौत से उठे गंभीर सवाल

ब्रेन मलेरिया से चार आदिवासी बच्चों की मौत ने ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं और मलेरिया नियंत्रण अभियान की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे दर्दनाक घटना हरिणा पंचायत के कंदर गांव में सामने आई, जहां महावीर सरदार की दो बेटियों की चार दिनों के भीतर मौत हो गई। परिवार की तीसरी बेटी भी बुखार से पीड़ित है और उसका इलाज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चल रहा है। चिकित्सकों के अनुसार उसकी हालत फिलहाल खतरे से बाहर बताई जा रही है।

महावीर सरदार का आरोप है कि यदि समय रहते गांव में डीडीटी का छिड़काव किया गया होता, मच्छरदानियों का वितरण हुआ होता और स्वास्थ्य विभाग ने पहले से सक्रियता दिखाई होती तो उनकी बेटियों की जान बचाई जा सकती थी।

तीन वर्षों से डीडीटी छिड़काव नहीं होने का आरोप

ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग पर मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम में लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पिछले तीन वर्षों से गांव में न तो डीडीटी का छिड़काव किया गया और न ही मच्छरदानियों का वितरण हुआ।

कंदर गांव के ग्राम प्रधान रामेश्वर सरदार ने बताया कि बरसात शुरू होने से पहले ग्रामसभा के माध्यम से लोगों को साफ-सफाई और मच्छरों से बचाव के लिए जागरूक किया गया था, लेकिन संबंधित विभाग ने जल स्रोतों में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव, एंटी-लार्वा उपाय और मच्छर नियंत्रण अभियान समय पर नहीं चलाया। उन्होंने प्रभावित गांवों में तत्काल मच्छरदानी वितरण, फॉगिंग और डीडीटी छिड़काव की मांग की है।

प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी

मंगलवार को सीओ निकीता बाला और बीडीओ अरुण कुमार मुंडा ने प्रभावित गांवों का दौरा कर स्वास्थ्य व्यवस्था का जायजा लिया। जिला स्वास्थ्य विभाग ने जांच अभियान को और तेज करने के लिए पहले से कार्यरत 12 विशेष स्वास्थ्य टीमों को भी सक्रिय कर दिया है। ये टीमें लगातार गांवों का भ्रमण कर बुखार से पीड़ित लोगों की पहचान, जांच और उपचार सुनिश्चित कर रही हैं।

ब्रेन मलेरिया क्या है?

ब्रेन मलेरिया, जिसे सेरेब्रल मलेरिया भी कहा जाता है, मलेरिया का गंभीर रूप है। यह सामान्यतः प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम (Plasmodium falciparum) परजीवी के संक्रमण से होता है। इसमें संक्रमित व्यक्ति को तेज बुखार, बार-बार कंपकंपी, सिरदर्द, उल्टी, बेहोशी, दौरे पड़ना और मानसिक भ्रम जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। समय पर उपचार न मिलने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है, विशेष रूप से बच्चों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में।

स्वास्थ्य विभाग की अपील

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार बुखार, कंपकंपी या अन्य मलेरिया जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत निकटतम स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं। लोगों को नियमित रूप से मच्छरदानी का उपयोग करने, घर और आसपास जलभराव न होने देने तथा स्वास्थ्य विभाग की टीमों का सहयोग करने की सलाह दी गई है। विभाग का कहना है कि समय पर जांच, उपचार और सामुदायिक जागरूकता के माध्यम से संक्रमण की श्रृंखला को रोका जा सकता है।