राजस्थान बस हादसा अपडेट: दौसा में मृतकों की संख्या बढ़कर 8, शव बुरी तरह झुलसे; DNA टेस्ट से होगी पहचान, बस में 40 यात्री सवार थे

राजस्थान बस हादसा अपडेट: दौसा में मृतकों की संख्या बढ़कर 8, शव बुरी तरह झुलसे; DNA टेस्ट से होगी पहचान, बस में 40 यात्री सवार थे

राजस्थान के दौसा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर बुधवार तड़के हुए भीषण बस हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 8 हो गई है। हरिद्वार (उत्तराखंड) से इंदौर (मध्य प्रदेश) जा रही निजी स्लीपर बस ट्रेलर से टकराने के बाद खाई में गिर गई और कुछ ही देर में उसमें भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि कई यात्री बस के अंदर ही फंस गए। प्रशासन के अनुसार, बस में करीब 40 यात्री सवार थे। हादसे में 15 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर बनी हुई है।

तड़के हुआ दर्दनाक हादसा

यह दुर्घटना बुधवार सुबह करीब 2:30 से 3:00 बजे के बीच दौसा जिले के कोलवा थाना क्षेत्र में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के एक विश्राम स्थल (रेस्ट एरिया) के पास हुई। प्रारंभिक जांच के अनुसार, तेज रफ्तार निजी स्लीपर बस आगे चल रहे ट्रेलर से टकरा गई। टक्कर के बाद चालक बस पर नियंत्रण खो बैठा और वाहन सड़क किनारे खाई में जा गिरा।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दुर्घटना के तुरंत बाद बस के पिछले हिस्से से आग की लपटें उठने लगीं। देखते ही देखते आग ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे के समय अधिकांश यात्री सो रहे थे, जिससे कई लोग समय रहते बाहर नहीं निकल सके।

आग में फंसे यात्री, आठ लोगों की मौत

पुलिस और प्रशासन के अनुसार, आग लगने के कारण कई यात्री बस के भीतर फंस गए। कुछ लोग खिड़कियां तोड़कर और आपातकालीन निकास से बाहर निकलने में सफल रहे, जबकि कई यात्री आग और धुएं के कारण बाहर नहीं निकल सके।

अब तक 8 यात्रियों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। मृतकों के शव बुरी तरह झुलस जाने के कारण उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया है।

DNA टेस्ट से होगी मृतकों की पहचान

प्रशासन ने बताया कि कई शव इतनी बुरी तरह जल चुके हैं कि उनकी सामान्य तरीके से पहचान संभव नहीं है। ऐसे मामलों में डीएनए परीक्षण के माध्यम से पहचान कराई जाएगी। इसके लिए मृतकों के परिजनों के नमूने लिए जाएंगे और वैज्ञानिक प्रक्रिया के बाद अंतिम पहचान सुनिश्चित की जाएगी।

अधिकारियों का कहना है कि पहचान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही शव परिजनों को सौंपे जाएंगे।

15 से अधिक घायल, कई की हालत गंभीर

हादसे में घायल यात्रियों को तत्काल दौसा जिला अस्पताल पहुंचाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रूप से झुलसे और घायल यात्रियों को जयपुर के उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर किया गया है।

घायलों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। अस्पताल प्रशासन ने अतिरिक्त चिकित्सकों की टीम तैनात कर उपचार शुरू कर दिया है।

राहत एवं बचाव अभियान

दुर्घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग, एम्बुलेंस और जिला प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं। स्थानीय ग्रामीणों ने भी राहत कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पाने के बाद बस में फंसे यात्रियों को बाहर निकाला।

कई घंटों तक चले राहत अभियान के बाद क्षतिग्रस्त बस को हटाया गया और एक्सप्रेसवे पर यातायात सामान्य किया गया।

बस में सिगरेट के कार्टन होने का दावा

हादसे के बाद कुछ प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय सूत्रों ने दावा किया कि बस की डिक्की में सिगरेट के बॉक्स रखे हुए थे, जिससे आग तेजी से फैल सकती थी। हालांकि पुलिस या जिला प्रशासन ने अभी तक इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

जांच एजेंसियां बस के सामान, आग लगने के वास्तविक कारण और दुर्घटना के सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही इस संबंध में कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने आएगा।

हादसे की जांच शुरू

पुलिस ने बस और ट्रेलर को कब्जे में लेकर विस्तृत जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में ट्रेलर से टक्कर के बाद बस के अनियंत्रित होकर खाई में गिरने की बात सामने आई है। वहीं, आग लगने के कारणों की भी अलग से तकनीकी जांच की जा रही है।

जांच में चालक की भूमिका, वाहन की गति, तकनीकी खराबी, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था तथा बस में रखे सामान की भी पड़ताल की जाएगी।

सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

इस भीषण हादसे ने एक बार फिर लंबी दूरी की निजी स्लीपर बसों की सुरक्षा व्यवस्था, अग्नि सुरक्षा मानकों, वाहन फिटनेस, आपातकालीन निकास और रात के समय संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे वाहनों में नियमित तकनीकी जांच, अग्निशमन उपकरण और सुरक्षित निकासी व्यवस्था सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।

फिलहाल प्रशासन मृतकों की पहचान, घायलों के इलाज और दुर्घटना के कारणों की जांच में जुटा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हादसे की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।