भोपाल में वक्फ बोर्ड विवाद ने पकड़ा तूल: ताजुल मसाजिद में काली पट्टी बांधकर अदा की जाएगी जुमे की नमाज, मुस्लिम संगठनों का शांतिपूर्ण विरोध; प्रशासन अलर्ट

भोपाल में वक्फ बोर्ड विवाद ने पकड़ा तूल: ताजुल मसाजिद में काली पट्टी बांधकर अदा की जाएगी जुमे की नमाज, मुस्लिम संगठनों का शांतिपूर्ण विरोध; प्रशासन अलर्ट

मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजधानी भोपाल में नए चरण में प्रवेश कर गया है। शुक्रवार को ऐतिहासिक ताजुल मसाजिद में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग हाथों पर काली पट्टी बांधकर जुमे की नमाज अदा करेंगे। आयोजकों के अनुसार यह विरोध पूरी तरह प्रतीकात्मक और शांतिपूर्ण होगा तथा इसका उद्देश्य सरकार तक अपनी आपत्ति लोकतांत्रिक तरीके से पहुंचाना है।

इस घटनाक्रम को लेकर प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क है। संवेदनशीलता को देखते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की विशेष निगरानी रहेगी। हालांकि किसी संगठन की ओर से बंद, रैली या उग्र प्रदर्शन का आधिकारिक आह्वान नहीं किया गया है।

वक्फ बोर्ड के गठन के बाद तेज हुआ विरोध

मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन के बाद बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को लेकर मुस्लिम संगठनों के एक वर्ग ने आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि वक्फ संस्थाएं मुस्लिम धार्मिक और सामाजिक संपत्तियों के प्रबंधन से जुड़ी होती हैं, इसलिए बोर्ड की संरचना में धार्मिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

वहीं सरकार समर्थक पक्ष का तर्क है कि बोर्ड का गठन लागू नियमों और अधिनियम के अनुरूप किया गया है तथा इसका उद्देश्य प्रशासनिक पारदर्शिता और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना है।

ताजुल मसाजिद में जुटेंगे शहरभर के नमाजी

शुक्रवार की जुमे की नमाज के दौरान भोपाल के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों नमाजियों के ताजुल मसाजिद पहुंचने की संभावना है। आयोजकों ने अपील की है कि सभी लोग शांति, अनुशासन और कानून का पालन करते हुए नमाज अदा करें तथा विरोध को केवल प्रतीकात्मक रूप तक सीमित रखें।

बताया गया है कि नमाज के दौरान लोग अपने हाथों पर काली पट्टी बांधकर वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति के विरोध का संदेश देंगे। किसी प्रकार का नारेबाजी, जुलूस या हिंसक प्रदर्शन आयोजित नहीं किया जाएगा।

ज्ञापन और पत्र के बाद अब प्रतीकात्मक प्रदर्शन

विवाद की शुरुआत के बाद विभिन्न मुस्लिम संगठनों ने अलग-अलग स्तर पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। सबसे पहले ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी सहित कई संगठनों ने भोपाल में प्रदर्शन कर सरकार के निर्णय का विरोध किया।

इसके बाद राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के गठन पर पुनर्विचार करने तथा नियुक्तियों की समीक्षा करने की मांग भी की गई। संगठनों का कहना है कि उनका विरोध संवैधानिक और लोकतांत्रिक दायरे में है।

इस्तीफे से बढ़ी राजनीतिक और सामाजिक चर्चा

विवाद उस समय और गहरा गया जब निकाह काजी मोहम्मद मआज़ खान नोमानी नदवी ने दीनी तालीमी बोर्ड के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने इस्तीफे में वक्फ बोर्ड से जुड़े कुछ निर्णयों और कुछ पदाधिकारियों के समर्थन पर वैचारिक असहमति जताई।

इस इस्तीफे के बाद यह मुद्दा धार्मिक संगठनों के साथ-साथ सामाजिक और राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया।

उलेमा ने भी उठाए सवाल

पिछले कुछ दिनों में मध्य प्रदेश के कई उलेमा और मुस्लिम संगठनों के पदाधिकारियों ने प्रेस वार्ता और सार्वजनिक बयानों के माध्यम से सरकार के निर्णय पर सवाल उठाए हैं।

जमीयत उलेमा मध्य प्रदेश के सदर मुफ्ती मोहम्मद अहमद ने कहा कि यदि सरकार पारदर्शिता के नाम पर अन्य धर्मों के प्रतिनिधियों को वक्फ बोर्ड में शामिल कर रही है तो इसी प्रकार अन्य धार्मिक संस्थाओं की समितियों में भी समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

वहीं नायब सदर मुफ्ती जिया कासमी ने भी समान व्यवस्था सभी धार्मिक संस्थाओं में लागू किए जाने की बात कही। उनका कहना है कि यदि यह सिद्धांत अपनाया गया है तो इसे सभी धर्मों पर समान रूप से लागू किया जाना चाहिए।

सनव्वर पटेल के स्वागत कार्यक्रम के बाद बढ़ा विवाद

मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के नव नियुक्त अध्यक्ष सनव्वर पटेल के स्वागत समारोह के बाद विवाद और तेज हो गया। इस कार्यक्रम के बाद कई धार्मिक पदाधिकारियों और संगठनों ने सार्वजनिक रूप से अपनी असहमति जताई।

कुछ लोगों ने वीडियो संदेश जारी किए, जबकि कई संगठनों ने प्रेस बयान जारी कर अपनी नाराजगी व्यक्त की। इसी घटनाक्रम के बाद विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा और व्यापक होती गई।

प्रशासन की विशेष निगरानी

जुमे की नमाज के मद्देनजर भोपाल प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है। संवेदनशील धार्मिक स्थलों के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

प्रशासन की ओर से शांति बनाए रखने की अपील की गई है तथा किसी भी प्रकार की अफवाहों से बचने को कहा गया है। अधिकारियों का कहना है कि सभी धार्मिक गतिविधियों पर सामान्य सुरक्षा व्यवस्था के तहत निगरानी रखी जाएगी और कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।

सरकार की ओर से क्या स्थिति?

अब तक राज्य सरकार की ओर से इस विरोध प्रदर्शन पर कोई नया आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सरकार पहले भी यह स्पष्ट कर चुकी है कि वक्फ बोर्ड का गठन लागू कानूनी प्रावधानों के अनुरूप किया गया है।

यदि भविष्य में सरकार या वक्फ बोर्ड की ओर से इस विषय पर कोई नया स्पष्टीकरण या निर्णय आता है तो विवाद की दिशा बदल सकती है।

आगे क्या?

जुमे की नमाज के दौरान होने वाला यह काली पट्टी विरोध प्रदर्शन इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह ज्ञापनों, प्रेस कॉन्फ्रेंस, विरोध प्रदर्शनों, वीडियो संदेशों और इस्तीफों के बाद पहला बड़ा सामूहिक एवं प्रतीकात्मक विरोध होगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष संवाद के माध्यम से समाधान तलाशते हैं तो विवाद शांत हो सकता है। फिलहाल सभी की नजरें शुक्रवार को होने वाले शांतिपूर्ण विरोध और उसके बाद सरकार की संभावित प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।