मध्य प्रदेश में मानसून ने पकड़ी रफ्तार: सामान्य से 10% अधिक बारिश दर्ज, 32 जिलों में औसत से ज्यादा वर्षा; पन्ना और सतना में भारी बारिश का अलर्ट

मध्य प्रदेश में मानसून ने पकड़ी रफ्तार: सामान्य से 10% अधिक बारिश दर्ज, 32 जिलों में औसत से ज्यादा वर्षा; पन्ना और सतना में भारी बारिश का अलर्ट

मध्य प्रदेश में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और जुलाई के पहले पखवाड़े में हुई अच्छी बारिश ने प्रदेश की तस्वीर बदल दी है। जून महीने में सामान्य से कम वर्षा की भरपाई अब जुलाई की लगातार बारिश ने कर दी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, प्रदेश में अब तक 234.4 मिलीमीटर (लगभग 9.4 इंच) बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 212.3 मिलीमीटर (लगभग 8.3 इंच) मानी जाती है। इस तरह राज्य में अब तक सामान्य से करीब 10 प्रतिशत अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय है और जुलाई के दौरान अधिकांश क्षेत्रों में बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। हालांकि बारिश का वितरण सभी क्षेत्रों में समान नहीं है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में सामान्य से काफी अधिक वर्षा हुई है, जबकि पूर्वी हिस्से में अब भी कुछ जिलों में बारिश सामान्य से कम बनी हुई है।

पन्ना और सतना में भारी बारिश का अलर्ट

भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए पन्ना और सतना जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार इन जिलों में कुछ स्थानों पर 100 मिलीमीटर या उससे अधिक वर्षा हो सकती है। स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने और संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

नदी-नालों के किनारे रहने वाले लोगों, निचले इलाकों के निवासियों तथा किसानों को भी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

32 जिलों में सामान्य से अधिक बरसे बादल

प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में इस बार मानसून ने अच्छी शुरुआत की है। राजधानी भोपाल, आर्थिक राजधानी इंदौर, धार्मिक नगरी उज्जैन सहित कुल 32 जिलों में अब तक सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई है।

अच्छी बारिश से जलाशयों में पानी की आवक बढ़ी है, भूजल स्तर में सुधार की उम्मीद जगी है और खरीफ फसलों की बुवाई को भी गति मिली है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर हुई वर्षा से सोयाबीन, धान, मक्का, उड़द, मूंग और अन्य खरीफ फसलों को लाभ मिलेगा।

इन जिलों में भी बारिश की संभावना

मौसम विभाग ने अगले चार दिनों के दौरान प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में कहीं हल्की तो कहीं मध्यम एवं तेज बारिश की संभावना जताई है।

बारिश की संभावना वाले प्रमुख जिलों में—

भोपाल
रायसेन
सीहोर
राजगढ़
विदिशा
इंदौर
धार
झाबुआ
अलीराजपुर
बुरहानपुर
बड़वानी
खंडवा
खरगोन
उज्जैन
रतलाम
मंदसौर
नीमच
देवास
शाजापुर
आगर-मालवा
नर्मदापुरम
बैतूल
हरदा
ग्वालियर
मुरैना
भिंड
दतिया
शिवपुरी
गुना
अशोकनगर
जबलपुर
कटनी
नरसिंहपुर
छिंदवाड़ा
पांढुर्णा
सिवनी
बालाघाट
मंडला
डिंडौरी
रीवा
सीधी
सिंगरौली
मऊगंज
मैहर
शहडोल
उमरिया
अनूपपुर
सागर
दमोह
छतरपुर
टीकमगढ़
निवाड़ी

शामिल हैं।

गुरुवार को इन जिलों में हुई अच्छी बारिश

गुरुवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय रहा। मौसम विभाग के अनुसार—

मंडला में लगभग पौन इंच वर्षा दर्ज की गई।
सिंगरौली में आधा इंच से अधिक बारिश हुई।
बालाघाट में भी करीब आधा इंच वर्षा रिकॉर्ड की गई।
इसके अलावा बैतूल, ग्वालियर, नर्मदापुरम, जबलपुर, खजुराहो, सागर, सतना और सीधी सहित कई जिलों में अच्छी बारिश हुई।

लगातार हो रही बारिश से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है और लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली है।

जुलाई के पहले नौ दिनों ने बदल दी तस्वीर

जून महीने में प्रदेश में मानसून की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रही थी। उस दौरान सामान्य से लगभग 30 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई थी। हालांकि जुलाई के शुरुआती नौ दिनों में लगातार हुई अच्छी बारिश ने स्थिति पूरी तरह बदल दी।

अब प्रदेश में कुल मिलाकर सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की जा चुकी है और जून की अधिकांश कमी पूरी हो गई है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जुलाई के शेष दिनों में भी इसी प्रकार वर्षा होती रही तो इस वर्ष मानसून सामान्य से बेहतर रह सकता है।

पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश में अंतर

बारिश के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के दोनों हिस्सों में वर्षा का वितरण अलग-अलग रहा है।

पश्चिमी मध्य प्रदेश में सामान्य से लगभग 29 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई है।
जबकि पूर्वी मध्य प्रदेश में अब भी औसत से करीब 9 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून ट्रफ की स्थिति और कम दबाव वाले क्षेत्रों के प्रभाव से आने वाले दिनों में पूर्वी जिलों में भी वर्षा की गतिविधियां तेज हो सकती हैं।

किसानों के लिए राहत की खबर

प्रदेश में समय पर हुई बारिश किसानों के लिए राहत लेकर आई है। कई जिलों में खरीफ फसलों की बुवाई तेजी से चल रही है। पर्याप्त नमी मिलने से खेतों में अंकुरण बेहतर होने की संभावना है।

कृषि विभाग के अनुसार जिन क्षेत्रों में लगातार बारिश हो रही है वहां किसानों को जल निकासी की उचित व्यवस्था बनाए रखने की सलाह दी गई है ताकि खेतों में जलभराव से फसलों को नुकसान न पहुंचे।

जलाशयों और बांधों में बढ़ी आवक

अच्छी बारिश के कारण प्रदेश के कई प्रमुख बांधों, तालाबों और जलाशयों में पानी की आवक बढ़ने लगी है। इससे पेयजल संकट कम होने की उम्मीद है। साथ ही सिंचाई परियोजनाओं को भी आने वाले महीनों में पर्याप्त पानी मिलने की संभावना है।

मौसम विभाग की सलाह

भारत मौसम विज्ञान विभाग ने लोगों से अपील की है कि भारी बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें। नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें तथा बिजली गिरने की संभावना के दौरान खुले स्थानों में जाने से बचें।

प्रशासन ने भी जिला स्तर पर आपदा प्रबंधन दलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया जा सके।

मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई के दूसरे और तीसरे सप्ताह में भी मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां जारी रहेंगी। यदि बंगाल की खाड़ी में नया कम दबाव का क्षेत्र बनता है, तो प्रदेश में वर्षा की तीव्रता और बढ़ सकती है।