भोपाल कलेक्ट्रेट में दिशा समिति की बैठक बनी सियासी अखाड़ा: मास्टर प्लान पर भिड़े विधायक और जनपद अध्यक्ष, स्मार्ट सिटी पर भी गरजी सत्ता-विपक्ष की आवाज
राजधानी भोपाल के कलेक्ट्रेट में शुक्रवार को आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक उस समय हाईवोल्टेज राजनीतिक हंगामे में बदल गई, जब शहर के बहुप्रतीक्षित मास्टर प्लान को लेकर कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और आतिफ अकील की फंदा जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रमोद सिंह राजपूत से तीखी नोकझोंक हो गई। दोनों पक्षों के बीच बहस इतनी बढ़ गई कि एक-दूसरे पर उंगली उठाते हुए तीखे शब्दों का आदान-प्रदान हुआ। आरोप है कि प्रमोद सिंह राजपूत ने बहस के दौरान कांग्रेस विधायकों से "औकात में रहकर बात करो" कहा। इसके बाद दोनों विधायक बैठक का बहिष्कार करते हुए बाहर निकल गए।
बैठक में केवल मास्टर प्लान ही नहीं, बल्कि स्मार्ट सिटी परियोजना, अमृत-2.0, शहर की जर्जर सड़कें, अधूरे पेंचवर्क, स्ट्रीट लाइट, विकास कार्यों की धीमी रफ्तार और विभागों के बीच समन्वय की कमी जैसे मुद्दों पर भी जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों को घेरा। भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी ने तो यहां तक कह दिया कि "स्मार्ट सिटी ने भोपाल का नाश कर दिया।"
दिशा समिति की बैठक में मौजूद रहे कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि
बैठक में भोपाल सांसद आलोक शर्मा, भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी, कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद, आतिफ अकील, भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा, नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन, महापौर मालती राय, विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद थे।
बैठक का उद्देश्य जिले में चल रही केंद्र सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों की समीक्षा करना था, लेकिन मास्टर प्लान के मुद्दे पर शुरू हुई बहस ने पूरे माहौल को राजनीतिक रंग दे दिया।
मास्टर प्लान पर शुरू हुई चर्चा
बैठक में भोपाल के लंबे समय से लंबित मास्टर प्लान को लेकर चर्चा शुरू हुई। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद इस विषय पर भोपाल सांसद आलोक शर्मा से अपनी बात रख रहे थे। उनका कहना था कि मास्टर प्लान लागू होने में लगातार हो रही देरी के कारण शहर का सुनियोजित विकास प्रभावित हो रहा है।
इसी दौरान फंदा जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रमोद सिंह राजपूत ने चर्चा के बीच हस्तक्षेप किया। इसके बाद दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बहस के दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे की ओर उंगली दिखाते हुए अपनी बात रखी। माहौल लगातार गर्म होता गया और कुछ देर के लिए बैठक का एजेंडा पूरी तरह पीछे छूट गया।
"तुम हमें सिखाओगे?" – आरिफ मसूद
विवाद के दौरान आरिफ मसूद ने नाराजगी जताते हुए कहा कि वे सांसद आलोक शर्मा से चर्चा कर रहे हैं और बीच में इस प्रकार हस्तक्षेप करना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि भोपाल का मास्टर प्लान इसी तरह लंबित रहा तो शहर का विकास प्रभावित होगा। उन्होंने यह भी कहा कि वे सांसद का सम्मान करते हुए बैठक में आए हैं और इस प्रकार की टिप्पणी तथा व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता।
"औकात में रहकर बात करो" – प्रमोद सिंह राजपूत
विवाद के दौरान आरोप है कि प्रमोद सिंह राजपूत ने कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद से "औकात में रहकर बात करो" कहा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उन्होंने ऊंची आवाज में बात करने पर भी आपत्ति जताई।
इस कथित टिप्पणी के बाद दोनों पक्षों के बीच बहस और तेज हो गई। बैठक में मौजूद अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी स्थिति को शांत कराने का प्रयास करते रहे।
लगभग दस मिनट तक चला विवाद
बैठक में यह तीखी नोकझोंक करीब दस मिनट तक चलती रही। इस दौरान कई बार माहौल इतना गर्म हो गया कि बैठक की कार्यवाही प्रभावित होती दिखाई दी।
हालांकि बाद में स्थिति सामान्य हुई, लेकिन कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और आतिफ अकील ने बैठक में बने रहने के बजाय बाहर निकलने का फैसला किया।
कांग्रेस विधायकों का वॉकआउट
विवाद के बाद कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और आतिफ अकील बैठक से वॉकआउट कर गए।
बाहर आने के बाद आरिफ मसूद ने कहा कि जनप्रतिनिधियों के साथ इस प्रकार की भाषा और व्यवहार लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके विधायक के विशेषाधिकार का हनन हुआ है।
उन्होंने कहा कि पूरे मामले की शिकायत विधानसभा अध्यक्ष से की जाएगी।
स्मार्ट सिटी परियोजना पर भाजपा विधायक का बड़ा बयान
बैठक में स्मार्ट सिटी परियोजना भी चर्चा का बड़ा विषय रही।
भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी ने अधिकारियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि "स्मार्ट सिटी ने भोपाल का नाश कर दिया।"
उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजना के तहत करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन नागरिकों को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल सकीं।
उनका कहना था कि—
कई इमारतों में मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं।
कई स्थानों पर लिफ्ट तक ठीक से संचालित नहीं हो रही।
कम्युनिटी हॉल नहीं बनाए गए।
दशहरा मैदान की स्थिति खराब हो गई।
विकास कार्यों में समन्वय का अभाव है।
उन्होंने सुझाव दिया कि स्मार्ट सिटी के बड़े व्यावसायिक प्लॉटों को छोटे हिस्सों में विभाजित किया जाए, जिससे उन्हें बेचना आसान होगा और परियोजना को राजस्व भी मिलेगा।
भाजपा विधायक का कांग्रेस विधायक ने किया समर्थन
राजनीतिक मतभेदों के बावजूद इस मुद्दे पर कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी की बात का समर्थन किया।
उन्होंने कहा कि यदि एक वरिष्ठ विधायक शहर की समस्याओं की ओर ध्यान दिला रहे हैं तो अधिकारियों को उन सुझावों को गंभीरता से लेना चाहिए और शीघ्र समाधान करना चाहिए।
सड़कों और अमृत-2.0 पर भी अधिकारियों से सवाल
बैठक में शहर की बदहाल सड़कों, बार-बार होने वाली खुदाई, अधूरे पेंचवर्क और अमृत-2.0 परियोजना के कार्यों को लेकर भी अधिकारियों से जवाब मांगा गया।
जनप्रतिनिधियों ने कहा कि विभिन्न विभाग बिना समन्वय के सड़कें खोद देते हैं और बाद में लंबे समय तक मरम्मत नहीं होती, जिससे नागरिकों को भारी परेशानी होती है।
नगर निगम आयुक्त ने माना— समस्याएं हैं
नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने स्वीकार किया कि शहर के कई क्षेत्रों में समस्याएं हैं।
उन्होंने कहा कि संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर चरणबद्ध तरीके से समस्याओं का समाधान किया जाएगा।
महापौर मालती राय ने भी उठाए मुद्दे
महापौर मालती राय ने स्मार्ट सिटी क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट और अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर शिकायतों के बावजूद समय पर समाधान नहीं हो पाता, जिससे आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है।
कलेक्टर प्रियंक मिश्रा का आश्वासन
भोपाल कलेक्टर एवं स्मार्ट सिटी बोर्ड के अध्यक्ष प्रियंक मिश्रा ने बैठक में कहा कि जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों की अलग-अलग समीक्षा की जाएगी।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि विभागीय समन्वय के माध्यम से लंबित समस्याओं का समाधान कराया जाएगा।
सांसद आलोक शर्मा ने नोडल एजेंसी का दिया सुझाव
भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि स्मार्ट सिटी परियोजना में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि पूरे प्रोजेक्ट के लिए एक नोडल एजेंसी बनाई जाए, जिससे सभी विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो सके।
मास्टर प्लान जल्द लागू करने की मांग
बैठक के बाद सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि भोपाल के सुनियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान का जल्द लागू होना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि वे शीघ्र ही मुख्यमंत्री से मुलाकात कर मास्टर प्लान लागू कराने की मांग करेंगे।
भोजपाल वेटलैंड प्राधिकरण के गठन का प्रस्ताव
बैठक में भोजपाल वेटलैंड प्राधिकरण के गठन का प्रस्ताव भी पारित किया गया।
प्रस्ताव के अनुसार, संभागायुक्त को इसका अध्यक्ष बनाया जाएगा। इसमें भोपाल और सीहोर के कलेक्टर, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा जनप्रतिनिधियों को शामिल करने का सुझाव दिया गया।
इसके अलावा भोपाल को वेटलैंड सिटी घोषित करने की मांग भी रखी गई।
राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना विवाद
बैठक में विकास कार्यों की समीक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण विषय एजेंडे में शामिल थे, लेकिन मास्टर प्लान को लेकर विधायक और जनपद पंचायत अध्यक्ष के बीच हुई तीखी नोकझोंक पूरे घटनाक्रम का सबसे चर्चित हिस्सा बन गई।
एक ओर कांग्रेस ने इसे जनप्रतिनिधियों के सम्मान और विशेषाधिकार का मुद्दा बताया है, वहीं बैठक में उठे मास्टर प्लान, स्मार्ट सिटी और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवालों ने भोपाल के विकास मॉडल पर भी नई बहस छेड़ दी है। फिलहाल, विधानसभा अध्यक्ष से शिकायत की घोषणा के बाद इस विवाद के राजनीतिक रूप से और तूल पकड़ने की संभावना बनी हुई है।
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