कांवड़ की ऊंचाई 10 फीट और चौड़ाई 12 फीट तय, दिल्ली-UP पुलिस ने तैयार किया मेगा सिक्योरिटी प्लान; 20 लाख श्रद्धालुओं के लिए विशेष इंतजाम

कांवड़ की ऊंचाई 10 फीट और चौड़ाई 12 फीट तय, दिल्ली-UP पुलिस ने तैयार किया मेगा सिक्योरिटी प्लान; 20 लाख श्रद्धालुओं के लिए विशेष इंतजाम

श्रावण मास के पावन अवसर पर आयोजित होने वाली कांवड़ यात्रा 2026 को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और शांतिपूर्ण बनाने के लिए दिल्ली पुलिस, उत्तर प्रदेश पुलिस और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के प्रशासनिक अधिकारियों ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। हर वर्ष करोड़ों शिवभक्त गंगाजल लेकर अपने-अपने शिवालयों तक पहुंचते हैं, जिससे दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड और राजस्थान के प्रमुख मार्गों पर भारी भीड़ रहती है। इस वर्ष यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था, दुर्घटना या कानून-व्यवस्था की समस्या से बचने के लिए दिल्ली में उच्चस्तरीय समन्वय बैठक आयोजित की गई, जिसमें सुरक्षा, ट्रैफिक प्रबंधन, आपदा प्रबंधन और अंतरराज्यीय समन्वय सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

30 जुलाई से शुरू होगी कांवड़ यात्रा, लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना

प्रशासन के अनुसार इस वर्ष 30 जुलाई 2026 से कांवड़ यात्रा शुरू होगी। इस दौरान उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों से लाखों श्रद्धालु हरिद्वार, गंगोत्री, गौमुख और अन्य पवित्र स्थलों से गंगाजल लेकर पैदल यात्रा करेंगे। यात्रा के दौरान राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य मार्गों और प्रमुख शहरों में श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही को देखते हुए पहले से ही सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन की विस्तृत योजना तैयार की जा रही है। अधिकारियों का अनुमान है कि इस बार भी करोड़ों श्रद्धालु यात्रा में शामिल होंगे।

दिल्ली में हुई अंतरराज्यीय समन्वय बैठक

दिल्ली के लक्ष्मी नगर में आयोजित समन्वय बैठक की अध्यक्षता संयुक्त पुलिस आयुक्त (दिल्ली) संजय कुमार ने की। बैठक में दिल्ली पुलिस, उत्तर प्रदेश पुलिस तथा एनसीआर के विभिन्न जिलों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बागपत के पुलिस अधीक्षक सूरज कुमार राय भी बैठक में मौजूद रहे।

बैठक का मुख्य उद्देश्य विभिन्न राज्यों के पुलिस और प्रशासनिक विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना था ताकि यात्रा के दौरान किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। अधिकारियों ने संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था और आपसी सूचना साझा करने की प्रणाली को और मजबूत बनाने पर जोर दिया।

कांवड़ की ऊंचाई और चौड़ाई को लेकर जारी किए गए दिशा-निर्देश

बैठक में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय कांवड़ के आकार को लेकर लिया गया। अधिकारियों ने श्रद्धालुओं से अपील की कि कांवड़ की अधिकतम ऊंचाई 10 फीट तथा चौड़ाई 12 फीट से अधिक न रखी जाए।

प्रशासन का कहना है कि पिछले वर्षों में अत्यधिक ऊंची और चौड़ी कांवड़ों के कारण कई स्थानों पर बिजली की हाईटेंशन लाइनों से टकराने, यातायात बाधित होने, पुलों और फ्लाईओवर पर जाम लगने तथा आपातकालीन सेवाओं के प्रभावित होने जैसी समस्याएं सामने आई थीं। इसलिए इस बार सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह सीमा निर्धारित की गई है।

डीजे और म्यूजिक सिस्टम को लेकर भी सख्त निर्देश

बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि यात्रा के दौरान लगाए जाने वाले म्यूजिक सिस्टम और डीजे की ध्वनि निर्धारित मानकों के अनुरूप ही होनी चाहिए। अधिकारियों ने श्रद्धालुओं और कांवड़ समितियों से अनुरोध किया कि धार्मिक यात्रा की गरिमा बनाए रखें तथा अश्लील, भड़काऊ या सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करने वाले गीतों का प्रयोग न करें।

ध्वनि प्रदूषण नियमों का पालन कराने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस विशेष निगरानी रखेगी। आवश्यकता पड़ने पर नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

सुरक्षा व्यवस्था को बनाया जाएगा हाईटेक

कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को पहले से अधिक मजबूत बनाया जाएगा। पुलिस द्वारा संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त बल तैनात किया जाएगा। प्रमुख मार्गों की निगरानी सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के माध्यम से की जाएगी। इसके अलावा क्विक रिस्पांस टीम (QRT), बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वायड और महिला सुरक्षा दल भी तैनात रहेंगे।

आपातकालीन चिकित्सा सहायता, एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और आपदा प्रबंधन टीमों को भी प्रमुख स्थानों पर तैनात किया जाएगा ताकि किसी भी दुर्घटना या स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

यातायात व्यवस्था होगी सबसे बड़ी चुनौती

कांवड़ यात्रा के दौरान दिल्ली, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, नोएडा और अन्य एनसीआर क्षेत्रों में भारी ट्रैफिक दबाव देखने को मिलता है। इसे देखते हुए पुलिस विस्तृत ट्रैफिक डायवर्जन प्लान तैयार कर रही है।

भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किए जाएंगे। प्रमुख चौराहों और हाईवे पर अतिरिक्त ट्रैफिक पुलिस तैनात रहेगी। आम नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की जाएगी ताकि वे यात्रा अवधि के दौरान वैकल्पिक मार्गों का उपयोग कर सकें।

पुरा महादेव मंदिर में उमड़ेगा आस्था का महासैलाब

बागपत स्थित ऐतिहासिक परशुरामेश्वर (पुरा महादेव) मंदिर में श्रावणी शिवरात्रि के अवसर पर चार दिवसीय विशाल मेले का आयोजन किया जाएगा। प्रशासन का अनुमान है कि इस दौरान 20 लाख से अधिक श्रद्धालु मंदिर पहुंच सकते हैं।

यहीं से बड़ी संख्या में कांवड़िए दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान की ओर प्रस्थान करते हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चिकित्सा शिविर, पेयजल, अस्थायी शौचालय, पार्किंग, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं।

बागपत प्रशासन ने शुरू की जमीनी तैयारियां

बागपत की जिलाधिकारी अस्मिता लाल पहले ही संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर चुकी हैं। जिला प्रशासन सड़क मरम्मत, बैरिकेडिंग, साफ-सफाई, कंट्रोल रूम, हेल्प डेस्क, मेडिकल कैंप और सुरक्षा व्यवस्था को समय से पहले पूरा करने में जुटा हुआ है।

सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि यात्रा शुरू होने से पहले आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

अंतरराज्यीय समन्वय रहेगा सबसे अहम

कांवड़ यात्रा कई राज्यों से होकर गुजरती है, इसलिए दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखंड की पुलिस के बीच लगातार समन्वय बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया है। किसी भी सुरक्षा इनपुट, ट्रैफिक अपडेट या आपात स्थिति की सूचना तत्काल साझा करने के लिए विशेष संचार व्यवस्था तैयार की जा रही है।

श्रद्धालुओं से प्रशासन की अपील

पुलिस और प्रशासन ने सभी शिवभक्तों से अपील की है कि वे निर्धारित नियमों का पालन करें, सीमित आकार की कांवड़ का ही उपयोग करें, ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों का सम्मान करें, प्रशासन और पुलिस के निर्देशों का पालन करें तथा किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें। अधिकारियों ने कहा कि श्रद्धालुओं के सहयोग से ही यात्रा को सुरक्षित, शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया जा सकेगा।

धार्मिक आस्था के साथ सुरक्षा भी सर्वोच्च प्राथमिकता

कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है। इतनी विशाल संख्या में लोगों की मौजूदगी को देखते हुए प्रशासन इस बार सुरक्षा, यातायात, चिकित्सा, आपदा प्रबंधन और अंतरराज्यीय समन्वय पर विशेष ध्यान दे रहा है। यदि सभी संबंधित एजेंसियां और श्रद्धालु मिलकर निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करते हैं, तो कांवड़ यात्रा 2026 को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सफलतापूर्वक संपन्न कराया जा सकेगा।