अयोध्या श्रीराम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले पर हिमाचल में सियासत तेज, CM सुक्खू के नेतृत्व में कांग्रेस का प्रदर्शन; शिमला में की राम पूजा, निष्पक्ष जांच की मांग
अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर हिमाचल प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मंगलवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश कांग्रेस ने शिमला में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार, मंत्रिमंडल के सदस्य और पार्टी विधायक राम बाजार स्थित श्रीराम मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने भगवान श्रीराम की पूजा-अर्चना की। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने जाखू स्थित हनुमान मंदिर में भी दर्शन किए।
कांग्रेस ने इस मामले को करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय बताते हुए इसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है। वहीं, इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को भी कांग्रेस ने निशाने पर लिया है।
क्या है पूरा मामला?
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर में कथित रूप से चढ़ावे से संबंधित वित्तीय अनियमितताओं और चोरी के आरोप सामने आने के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। मामले में जांच एजेंसियों और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि अभी जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
इसी घटनाक्रम के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस ने भी इसे सार्वजनिक आस्था से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए विरोध प्रदर्शन आयोजित किया।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने की राम मंदिर में पूजा
प्रदर्शन समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पार्टी नेताओं के साथ शिमला के राम बाजार स्थित श्रीराम मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने भगवान श्रीराम की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि की कामना की।
इसके बाद मुख्यमंत्री का प्रतिनिधिमंडल जाखू स्थित प्रसिद्ध हनुमान मंदिर भी पहुंचा, जहां दर्शन और पूजा की गई।
कांग्रेस ने लगाए ये आरोप
प्रदेश कांग्रेस का कहना है कि श्रीराम मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। पार्टी का आरोप है कि यदि मंदिर के चढ़ावे से जुड़े किसी भी प्रकार के वित्तीय घोटाले या चोरी की शिकायत सामने आई है, तो उसकी निष्पक्ष और समयबद्ध जांच होनी चाहिए।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि भाजपा वर्षों से भगवान राम के नाम पर राजनीति करती रही है, लेकिन अब जब मंदिर से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है, तब वह इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब देने से बच रही है।
पार्टी का कहना है कि धार्मिक संस्थानों में आने वाला दान श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़ा होता है, इसलिए ऐसे मामलों में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
पहले ही लिया गया था आंदोलन का फैसला
प्रदेश कांग्रेस की हाल ही में हुई बैठक में इस मुद्दे को लेकर राज्यभर में विरोध कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया गया था। उसी रणनीति के तहत मंगलवार को शिमला में प्रदर्शन किया गया।
कांग्रेस का कहना है कि यह आंदोलन किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था और धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए है।
जांच जारी, आधिकारिक निष्कर्ष का इंतजार
श्रीराम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले की जांच संबंधित एजेंसियों द्वारा की जा रही है। अभी तक जांच पूरी नहीं हुई है और न ही किसी न्यायिक अथवा जांच एजेंसी ने अंतिम रिपोर्ट जारी की है। इसलिए मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्ष आने के बाद ही हो सकेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखना सार्वजनिक विश्वास के लिए आवश्यक है। यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई आवश्यक होगी।
राजनीतिक असर
अयोध्या श्रीराम मंदिर से जुड़ा यह मामला अब उत्तर प्रदेश से निकलकर अन्य राज्यों की राजनीति में भी प्रभाव डालने लगा है। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस द्वारा किए गए प्रदर्शन के बाद आने वाले दिनों में अन्य राज्यों में भी इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और विरोध कार्यक्रम देखने को मिल सकते हैं। वहीं, जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इस पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
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