मुरैना में सड़क निर्माण की मांग को लेकर युवक का आमरण अनशन जारी: 25 किमी दंडवत यात्रा के बाद अब भूख हड़ताल, प्रशासन ने दिया आश्वासन, सांसद ने बताया 'पब्लिसिटी स्टंट'
मध्य प्रदेश के मुरैना जिले की दिमनी विधानसभा में सड़क निर्माण की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब बड़ा जनमुद्दा बनता जा रहा है। पीपरीपुरा–जौहां–श्यामपुर खुर्द मार्ग के निर्माण की मांग को लेकर युवक नवीन सिंह तोमर पिछले कई दिनों से लगातार आंदोलन कर रहे हैं। पहले उन्होंने करीब 25 किलोमीटर की दंडवत यात्रा कर सरकार और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया, लेकिन सड़क निर्माण शुरू नहीं होने पर अब उन्होंने आमरण अनशन शुरू कर दिया है।
अनशन के दूसरे दिन आंदोलन स्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीण, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग पहुंचने लगे। वहीं, इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है। स्थानीय सांसद ने आंदोलन को "पब्लिसिटी स्टंट" करार दिया है, जबकि आंदोलनकारी का कहना है कि यह केवल क्षेत्र के हजारों लोगों की वर्षों पुरानी समस्या को सरकार तक पहुंचाने का प्रयास है।
वर्षों से सड़क निर्माण की मांग
ग्रामीणों के अनुसार पीपरीपुरा, जौहां और श्यामपुर खुर्द को जोड़ने वाली सड़क लंबे समय से जर्जर स्थिति में है। बरसात के मौसम में सड़क पर आवागमन बेहद कठिन हो जाता है। कीचड़, गड्ढों और जलभराव के कारण स्कूली बच्चों, किसानों, मरीजों और दैनिक यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन अब तक सड़क निर्माण का कार्य शुरू नहीं हो सका।
25 किलोमीटर की दंडवत यात्रा से शुरू हुआ आंदोलन
सड़क निर्माण की मांग को लेकर नवीन सिंह तोमर ने पहले लगभग 25 किलोमीटर लंबी दंडवत यात्रा निकाली थी। इस यात्रा का उद्देश्य सरकार और प्रशासन का ध्यान क्षेत्र की समस्या की ओर आकर्षित करना था।
दंडवत यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण भी उनके समर्थन में शामिल हुए। यात्रा के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ओर से सड़क निर्माण शुरू कराने का आश्वासन मिलने पर आंदोलन अस्थायी रूप से समाप्त कर दिया गया था।
आश्वासन के बाद भी काम शुरू नहीं हुआ
आंदोलनकारी नवीन सिंह तोमर का आरोप है कि उन्हें सड़क निर्माण का भरोसा दिया गया था, लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया। इसी कारण उन्होंने दोबारा आंदोलन का रास्ता चुना और अब आमरण अनशन पर बैठ गए हैं।
उनका कहना है कि केवल मौखिक आश्वासन स्वीकार नहीं किया जाएगा। जब तक निर्माण एजेंसी मौके पर पहुंचकर वास्तविक रूप से सड़क निर्माण शुरू नहीं करती, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा।
अनशन स्थल पर बढ़ने लगी भीड़
आमरण अनशन के दूसरे दिन आंदोलन स्थल पर लोगों की संख्या लगातार बढ़ती दिखाई दी। आसपास के गांवों से ग्रामीण समर्थन देने पहुंचे। कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने भी सड़क निर्माण की मांग को जायज़ बताते हुए प्रशासन से जल्द कार्रवाई करने की अपील की।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क केवल एक विकास परियोजना नहीं बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और रोजगार से जुड़ा बुनियादी मुद्दा है।
प्रशासन और पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने किया निरीक्षण
आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारी और लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारी अनशन स्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने आंदोलनकारी से चर्चा कर सड़क निर्माण प्रक्रिया जल्द शुरू कराने का आश्वासन दिया।
प्रशासन ने स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए रखने की बात कही है ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो और आंदोलन शांतिपूर्ण बना रहे।
हालांकि आंदोलनकारी ने स्पष्ट किया है कि केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि जब तक मशीनें मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं करेंगी, तब तक उनका आमरण अनशन जारी रहेगा।
सांसद का बयान बना चर्चा का विषय
इस पूरे मामले में स्थानीय सांसद की प्रतिक्रिया भी चर्चा का विषय बनी हुई है। सांसद ने इस आंदोलन को "पब्लिसिटी स्टंट" बताते हुए कहा कि इसे अनावश्यक रूप से राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बनाया जा रहा है।
दूसरी ओर आंदोलनकारी और उनके समर्थकों ने इस बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उनका संघर्ष किसी व्यक्तिगत प्रचार के लिए नहीं, बल्कि क्षेत्र के हजारों लोगों की बुनियादी सुविधा के लिए है।
सड़क का स्थानीय लोगों के लिए महत्व
ग्रामीणों के अनुसार यह मार्ग कई गांवों को जोड़ता है। सड़क खराब होने के कारण—
मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में देरी होती है।
विद्यार्थियों को स्कूल-कॉलेज आने-जाने में परेशानी होती है।
किसानों को अपनी उपज मंडियों तक ले जाने में कठिनाई आती है।
बरसात में कई हिस्सों में आवागमन लगभग ठप हो जाता है।
आपातकालीन सेवाओं के संचालन में भी बाधा आती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क बनने से क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।
राजनीतिक और प्रशासनिक नजरें आंदोलन पर
अनशन लगातार जारी रहने और लोगों का समर्थन बढ़ने के बाद अब प्रशासन तथा राजनीतिक दलों की नजर इस आंदोलन पर बनी हुई है। यदि शीघ्र समाधान नहीं निकला, तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।
फिलहाल प्रशासन आंदोलनकारी से लगातार संवाद बनाए हुए है और स्थिति को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने का प्रयास कर रहा है।
क्या है आंदोलनकारी की मांग?
नवीन सिंह तोमर की प्रमुख मांग है कि पीपरीपुरा–जौहां–श्यामपुर खुर्द सड़क का निर्माण कार्य तत्काल शुरू किया जाए। उनका कहना है कि जब तक मौके पर वास्तविक निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं होता, तब तक वे अपना आमरण अनशन समाप्त नहीं करेंगे।
अब सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि निर्माण कार्य जल्द शुरू होता है तो आंदोलन समाप्त हो सकता है, अन्यथा यह विरोध प्रदर्शन आने वाले दिनों में और व्यापक रूप ले सकता है।
news desk MPcg