जैश, लश्कर और अल-कायदा से जुड़े 23 पाकिस्तानी आतंकवादी घोषित, गृह मंत्रालय का बड़ा एक्शन; UAPA के तहत हुई कार्रवाई से NIA को मिलेगी और ताकत

जैश, लश्कर और अल-कायदा से जुड़े 23 पाकिस्तानी आतंकवादी घोषित, गृह मंत्रालय का बड़ा एक्शन; UAPA के तहत हुई कार्रवाई से NIA को मिलेगी और ताकत

भारत सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति को और सख्ती से लागू करते हुए पाकिस्तान में सक्रिय 23 व्यक्तियों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), 1967 के तहत 'व्यक्तिगत आतंकवादी' (Individual Terrorist) घोषित किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा शनिवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, इन व्यक्तियों का संबंध जैश-ए-मोहम्मद (JeM), लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जमात-उद-दावा (JuD), अल-कायदा (Al-Qaeda) तथा कुछ मामलों में आईएसआईएस (ISIS) जैसे प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों से बताया गया है।

गृह मंत्रालय के अनुसार, सूची में शामिल ये सभी व्यक्ति भारत विरोधी आतंकवादी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। इन पर जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की भर्ती, सीमा पार घुसपैठ, प्रशिक्षण शिविरों का संचालन, ड्रोन के माध्यम से हथियार एवं विस्फोटक भेजने, आतंकवादी फंडिंग, मॉड्यूल तैयार करने तथा सुरक्षा बलों और नागरिकों पर हमलों की साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप हैं।

UAPA के तहत क्या होती है 'व्यक्तिगत आतंकवादी' की घोषणा?

यह कार्रवाई गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 35 के तहत की गई है। वर्ष 2019 में संसद द्वारा किए गए संशोधन के बाद केंद्र सरकार को केवल किसी संगठन को ही नहीं, बल्कि किसी व्यक्ति को भी आतंकवादी घोषित करने का अधिकार मिला।

2019 से पहले कानून के तहत केवल आतंकवादी संगठनों को प्रतिबंधित घोषित किया जा सकता था, लेकिन संशोधन के बाद ऐसे व्यक्तियों को भी सूचीबद्ध किया जाने लगा जो किसी आतंकी संगठन के लिए सीधे तौर पर काम करते हैं या आतंकवादी गतिविधियों का संचालन करते हैं।

गृह मंत्रालय ने क्या कहा?

गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि सूची में शामिल व्यक्ति लंबे समय से पाकिस्तान की धरती से भारत विरोधी आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त रहे हैं। इनके खिलाफ विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों और जांच एजेंसियों के पास आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े इनपुट, जांच रिपोर्ट और अन्य साक्ष्य उपलब्ध हैं।

सरकार का कहना है कि ये आतंकवादी—

जम्मू-कश्मीर में युवाओं की भर्ती करते थे।
सीमा पार से आतंकवादियों की घुसपैठ कराते थे।
लॉन्च पैड और प्रशिक्षण शिविर संचालित करते थे।
ड्रोन के जरिए हथियार, गोला-बारूद और नशीले पदार्थ भेजने में शामिल थे।
आतंकवादी मॉड्यूल तैयार कर हमलों की योजना बनाते थे।
आतंकवादी संगठनों के लिए धन जुटाने और उसका वितरण करते थे।
भारत में सुरक्षा प्रतिष्ठानों और आम नागरिकों को निशाना बनाने की साजिश रचते थे।
हाफिज सईद के तीन करीबी सहयोगियों पर विशेष फोकस

गृह मंत्रालय ने अपनी अधिसूचना में लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद के तीन करीबी सहयोगियों का विशेष रूप से उल्लेख किया है।

1. राणा इफ्तिखार

अधिसूचना के अनुसार लगभग 54 वर्षीय राणा इफ्तिखार विभिन्न जिहादी संगठनों के बीच समन्वय स्थापित करता है। वह युवाओं को आतंकवादी गतिविधियों के लिए उकसाने, आतंकी नेटवर्क को सक्रिय रखने तथा हाफिज सईद के विश्वसनीय सहयोगी के रूप में कार्य करता रहा है।

2. अब्दुल रऊफ

करीब 52 वर्षीय अब्दुल रऊफ पर लश्कर-ए-तैयबा और जमात-उद-दावा के लिए आतंकवादी गतिविधियों की योजना बनाने, समन्वय करने और फंड जुटाने का आरोप है। गृह मंत्रालय के अनुसार वह सीधे हाफिज सईद के निर्देशों पर काम करता था और संगठन के प्रमुख संचालकों में शामिल रहा है।

3. हाफिज खालिद वलीद

करीब 51 वर्षीय हाफिज खालिद वलीद को कई आतंकवादी गतिविधियों का कथित मास्टरमाइंड बताया गया है। अधिसूचना के अनुसार वह हाफिज सईद की सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा भी रहा और आतंकवादी अभियानों की योजना बनाने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

नगरोटा और सुंजवान हमलों से जुड़े होने का आरोप

गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार सूची में शामिल कुछ आतंकवादियों का संबंध भारत में हुए बड़े आतंकी हमलों से भी है।

तीन आतंकवादियों पर 29 नवंबर 2016 को जम्मू के नगरोटा स्थित सेना के कैंप पर हुए आतंकी हमले में शामिल होने का आरोप है।
दो आतंकवादियों पर 10 फरवरी 2018 को जम्मू के सुंजवान मिलिट्री स्टेशन पर हुए आतंकी हमले में भूमिका होने का आरोप लगाया गया है।

इन हमलों में भारतीय सेना के जवान शहीद हुए थे तथा सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया था।

NIA और अन्य एजेंसियों को क्या मिलेगा अधिकार?

इन व्यक्तियों को आतंकवादी घोषित किए जाने के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), प्रवर्तन एजेंसियों तथा अन्य सुरक्षा संस्थाओं को उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने का मजबूत आधार मिल जाएगा।

इस कार्रवाई के बाद एजेंसियां—

आतंकियों की संपत्तियों की पहचान कर उन्हें जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर सकती हैं।
बैंक खाते और वित्तीय नेटवर्क की जांच कर फंडिंग रोक सकती हैं।
आतंकवादी गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाले आर्थिक स्रोतों पर कार्रवाई कर सकती हैं।
हथियारों और विस्फोटकों की खरीद-बिक्री से जुड़े नेटवर्क पर कानूनी कार्रवाई कर सकती हैं।
आतंकियों के सहयोगियों, समर्थकों और फंडिंग नेटवर्क के खिलाफ जांच तेज कर सकती हैं।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग के तहत अन्य देशों से कानूनी सहायता मांगने की प्रक्रिया भी मजबूत हो सकती है।
सूची में शामिल आतंकवादियों की संख्या हुई 80

शनिवार को 23 नए नाम जोड़े जाने के बाद भारत सरकार द्वारा UAPA के तहत घोषित व्यक्तिगत आतंकवादियों की कुल संख्या 80 हो गई है।

गृह मंत्रालय समय-समय पर खुफिया एजेंसियों, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), जम्मू-कश्मीर पुलिस तथा अन्य सुरक्षा एजेंसियों से प्राप्त सूचनाओं और जांच रिपोर्टों के आधार पर इस सूची को अपडेट करता है।

किन संगठनों से जुड़े हैं ये आतंकी?

गृह मंत्रालय के अनुसार सूची में शामिल व्यक्ति मुख्य रूप से इन प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों से जुड़े रहे हैं—

जैश-ए-मोहम्मद (JeM)
लश्कर-ए-तैयबा (LeT)
जमात-उद-दावा (JuD)
अल-कायदा (Al-Qaeda)
इस्लामिक स्टेट (ISIS) – कुछ मामलों में

इन संगठनों को भारत सरकार पहले ही आतंकवादी संगठन घोषित कर चुकी है।

सूची में शामिल प्रमुख नाम
जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े बताए गए व्यक्ति
मसूद इलियास कश्मीरी
मोहम्मद मुसादिक उर्फ डॉक्टर
मुफ्ती मुहम्मद असगर खान उर्फ अबू साद
हाफिज अब्दुल शकूर उर्फ कारी जर्रार
अब्दुल्ला जिहादी
गुलाम फरीद
मौलाना इमदाद उल्लाह मक्की
वसीम नूर जट
लश्कर-ए-तैयबा और संबद्ध नेटवर्क से जुड़े बताए गए व्यक्ति
फिरदौस अहमद भट
हारून रशीद गनई
बिलाल अहमद मीर
आबिद कय्यूम लोन
नजीर अहमद गुज्जर
अब्दुल रऊफ उर्फ हाफिज अब्दुल रऊफ
अशफाक अहमद
हाफिज खालिद वलीद
मौलाना सैफुल्ला खालिद
मोहम्मद याकूब
मौलाना यूसुफ तैबी
ओवैस फारूक
कारी याकूब शेख
राणा इफ्तिखार
मोहम्मद शाहिद फैसल (जिसके अल-कायदा और ISIS से भी संबंध बताए गए हैं)
भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति में क्यों अहम है यह कदम?

सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, किसी व्यक्ति को UAPA के तहत आतंकवादी घोषित करने का उद्देश्य केवल उसका नाम सूची में जोड़ना नहीं होता, बल्कि उसके पूरे नेटवर्क को कानूनी रूप से निशाने पर लाना होता है। इससे आतंकियों की वित्तीय गतिविधियों, सहयोगियों, संपत्तियों, फंडिंग चैनलों और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों पर कार्रवाई आसान हो जाती है। यह कदम भारत की 'आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance Against Terrorism)' नीति का हिस्सा माना जा रहा है।

हालांकि, किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया, उपलब्ध साक्ष्यों और कानून के प्रावधानों के अनुसार होता है।

(यह समाचार केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना, UAPA के प्रावधानों तथा उपलब्ध सार्वजनिक सरकारी जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।)