ई-रिक्शा बैटरी सिस्टम से छेड़छाड़ कर ठगी का मामला: भोपाल-उज्जैन में जांच जारी, BMS ऐप के दुरुपयोग की आशंका

ई-रिक्शा बैटरी सिस्टम से छेड़छाड़ कर ठगी का मामला: भोपाल-उज्जैन में जांच जारी, BMS ऐप के दुरुपयोग की आशंका

मध्य प्रदेश के भोपाल और उज्जैन में ई-रिक्शा चालकों के साथ तकनीक आधारित ठगी के एक नए प्रकार का मामला सामने आया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि कुछ लोग मोबाइल ऐप और ब्लूटूथ तकनीक का कथित रूप से दुरुपयोग कर ई-रिक्शा के बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (Battery Management System - BMS) में हस्तक्षेप कर रहे थे। इसके बाद वाहन के अचानक बंद होने पर खुद को मैकेनिक बताकर पैसे लेकर उसे दोबारा चालू करने का आरोप है।

पुलिस ने इस मामले में उज्जैन से एक आरोपी को हिरासत में लेकर साइबर ठगी और संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया है। पूरे मामले की तकनीकी जांच जारी है।

उज्जैन में कैसे सामने आया मामला

उज्जैन में पिछले कुछ दिनों के भीतर कई ई-रिक्शा चलते-चलते अचानक बंद होने की शिकायतें मिलीं। चालकों का आरोप था कि वाहन बिना किसी तकनीकी खराबी के अचानक बंद हो जाते थे और कुछ ही देर बाद एक व्यक्ति मौके पर पहुंचकर खुद को मैकेनिक बताता था।

आरोप है कि वह 200 से 300 रुपये लेकर वाहन को दोबारा चालू कर देता था। लगातार एक जैसे पैटर्न के चलते ई-रिक्शा यूनियन ने पुलिस को सूचना दी।

एक आरोपी गिरफ्तार

पुलिस कार्रवाई में रीतेश भानूपा (18), निवासी ग्राम नवली, थाना भैरूगढ़ क्षेत्र को गिरफ्तार किया गया। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि वह कथित तौर पर BAT BMS नामक मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग करता था।

पुलिस के अनुसार आरोपी ब्लूटूथ ऑन होने पर आसपास मौजूद ई-रिक्शा के BMS सिस्टम को स्कैन करता था और जिन वाहनों में सुरक्षा सेटिंग कमजोर होती थी, वहां अनधिकृत एक्सेस की कोशिश करता था। इसके बाद वाहन के बैटरी सिस्टम को लॉक या डिसेबल करने की स्थिति बनती थी।

BMS सिस्टम क्या होता है

ई-रिक्शा और इलेक्ट्रिक वाहनों में बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) एक इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट होती है, जो बैटरी के चार्ज, तापमान, वोल्टेज और सुरक्षा को नियंत्रित करती है।

तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार:

यदि BMS में ब्लूटूथ आधारित कनेक्टिविटी है
और उसमें मजबूत पासवर्ड/एन्क्रिप्शन नहीं है
तो वह आसपास के डिवाइस से स्कैन होकर अनधिकृत एक्सेस के लिए संवेदनशील हो सकता है।

इसी तकनीकी संभावना का उपयोग करके छेड़छाड़ की आशंका पुलिस जांच का हिस्सा है, लेकिन अभी इसे पूरी तरह सिद्ध नहीं माना गया है।

भोपाल में भी सामने आए समान मामले

भोपाल के पुराने शहर क्षेत्रों में भी इसी तरह की शिकायतें दर्ज हुई हैं। कई ई-रिक्शा चालकों ने बताया कि उनके वाहन अचानक चलते-चलते बंद हो गए, जिससे यात्रियों को भी परेशानी हुई।

कुछ मामलों में चालकों ने आरोप लगाया कि बैटरी सिस्टम को दोबारा चालू कराने के लिए उन्हें कंपनी या सर्विस सेंटर जाना पड़ा। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि पुलिस जांच में की जा रही है।

तकनीकी जांच का फोकस

पुलिस और साइबर सेल अब इस बात की जांच कर रही है कि:

क्या वास्तव में BAT BMS या अन्य ऐप के जरिए BMS सिस्टम एक्सेस किया गया
या यह केवल तकनीकी खराबी/कनेक्टिविटी समस्या थी
किन ई-रिक्शा मॉडलों में ब्लूटूथ सुरक्षा कमजोर थी
क्या किसी संगठित नेटवर्क द्वारा इस तरह की गतिविधि की जा रही थी

पुलिस ने कहा है कि सभी पहलुओं पर तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से जांच की जा रही है।

चालकों की शिकायतें और आर्थिक असर

ई-रिक्शा चालकों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं से उनकी दैनिक आय प्रभावित हो रही है। वाहन बीच रास्ते में बंद होने से यात्रियों को भी परेशानी होती है और कई बार विवाद की स्थिति बन जाती है।

चालकों ने यह भी आरोप लगाया कि बार-बार सर्विस या अनलॉक प्रक्रिया के कारण अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। हालांकि, यह दावा किस स्तर तक सही है, इसकी जांच अभी जारी है।

पुलिस की आधिकारिक स्थिति

ट्रैफिक सब-इंस्पेक्टर इंद्रपाल राजपूत के अनुसार, शिकायतों के आधार पर मामला दर्ज किया गया है और जांच की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपी ने कितने वाहनों को प्रभावित किया और उसका तरीका कितना प्रभावी था।

अधिकारियों ने कहा है कि प्रारंभिक जांच में यह मामला साइबर फ्रॉड और तकनीकी सिस्टम के दुरुपयोग से जुड़ा प्रतीत होता है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष तकनीकी रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के बाद ही निकलेगा।

सुरक्षा पर उठे सवाल

यह मामला इलेक्ट्रिक वाहनों में उपयोग होने वाली डिजिटल तकनीक और IoT (Internet of Things) आधारित सिस्टम की सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ऐसे सिस्टम में पर्याप्त सुरक्षा प्रोटोकॉल न हों, तो उनका दुरुपयोग संभव हो सकता है।

इसी कारण अब कई कंपनियां BMS सिस्टम में:

पासवर्ड सुरक्षा
एन्क्रिप्शन
और डिवाइस-लेवल ऑथेंटिकेशन
जैसी सुविधाएं जोड़ रही हैं।
निष्कर्ष

भोपाल और उज्जैन का यह मामला केवल एक ठगी की घटना नहीं, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहन तकनीक की साइबर सुरक्षा चुनौतियों को भी उजागर करता है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि यह मामला वास्तविक तकनीकी हैकिंग का था या केवल सिस्टम त्रुटियों का दुरुपयोग।