बदरीनाथ के बाद पिरान कलियर दरगाह में चढ़ावा चोरी के आरोप? विधायक मोहम्मद शहजाद ने उठाए सवाल, व्यवस्था पर निगरानी बढ़ाने की मांग

बदरीनाथ के बाद पिरान कलियर दरगाह में चढ़ावा चोरी के आरोप? विधायक मोहम्मद शहजाद ने उठाए सवाल, व्यवस्था पर निगरानी बढ़ाने की मांग

देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर चढ़ावे की सुरक्षा और प्रबंधन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब उत्तराखंड की प्रसिद्ध दरगाह पिरान कलियर में भी चढ़ावा व्यवस्था को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

लक्सर विधायक मोहम्मद शहजाद ने आरोप लगाया है कि दरगाह में चढ़ावे की व्यवस्था में खामियां हैं और कुछ लोग श्रद्धालुओं की आस्था का फायदा उठाकर चोरी जैसी गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दरगाह में बड़ी संख्या में फर्जी खादिम सक्रिय हैं, जो जायरीनों को प्रभावित कर चढ़ावे से जुड़ी गड़बड़ियों में शामिल हैं।

विधायक ने सरकार से मांग की है कि धार्मिक स्थलों पर चढ़ावे की व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए और ऐसी व्यवस्था हो कि श्रद्धालु नकद राशि, जेवरात या कीमती सामान चढ़ाने के बजाय केवल फूल और प्रसाद अर्पित करें।

हालांकि, दरगाह प्रबंधन ने आरोपों को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया है। प्रबंधन का कहना है कि दरगाह में गोलक की गिनती सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में होती है और सुरक्षा व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

विधायक मोहम्मद शहजाद ने उठाए सवाल

लक्सर विधायक मोहम्मद शहजाद ने कहा कि धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालु अपनी आस्था के कारण बड़ी मात्रा में धन, आभूषण और अन्य वस्तुएं चढ़ाते हैं। ऐसे में इनकी सुरक्षा और पारदर्शिता बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा कि हाल के समय में देश के कई धार्मिक स्थलों पर चढ़ावे से जुड़ी शिकायतें सामने आई हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने पिरान कलियर दरगाह की व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई।

विधायक ने कहा कि—

चढ़ावे की गिनती पूरी पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए।
हर स्तर पर निगरानी व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए।
श्रद्धालुओं की आस्था के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ नहीं होना चाहिए।
2011 में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था मामला

विधायक मोहम्मद शहजाद ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2011 में दरगाह पिरान कलियर की व्यवस्थाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

उनके अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने दरगाह की व्यवस्था की जिम्मेदारी जिलाधिकारी (DM) को दी थी, ताकि प्रशासनिक स्तर पर बेहतर निगरानी हो सके।

उन्होंने कहा कि एक समय उम्मीद थी कि आईएएस अधिकारी के नेतृत्व में व्यवस्था में सुधार होगा, लेकिन बाद में जिम्मेदारी नीचे के अधिकारियों को सौंप दी गई।

विधायक के मुताबिक—

जिलाधिकारी ने जिम्मेदारी ज्वाइंट मजिस्ट्रेट को दी।
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने इसे तहसीलदार स्तर पर सौंप दिया।

उन्होंने कहा कि शुरुआत में गोलक की गिनती बिना कैमरों के होती थी, लेकिन उनकी पहल के बाद सीसीटीवी निगरानी में गिनती की व्यवस्था शुरू हुई।

हर सप्ताह चढ़ावे की गिनती की मांग

विधायक ने दावा किया कि उन्होंने प्रशासन से मांग की थी कि दरगाह में आने वाले चढ़ावे की नियमित और पारदर्शी तरीके से गिनती कराई जाए।

उन्होंने कहा कि हर सप्ताह गोलक की गिनती की व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे किसी भी तरह की आशंका को खत्म किया जा सके।

उनका कहना है कि धार्मिक स्थलों पर आने वाला चढ़ावा जनता की आस्था से जुड़ा होता है, इसलिए इसमें किसी भी तरह की अनियमितता नहीं होनी चाहिए।

"जहां चढ़ावा है, वहां चोरी की संभावना रहती है"

विधायक मोहम्मद शहजाद ने कहा कि देश के कई धार्मिक स्थलों से चढ़ावे को लेकर शिकायतें सामने आई हैं।

उन्होंने कहा—

"जहां भी चढ़ावा होता है, वहां चोरी की संभावना बनी रहती है। इसलिए व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि किसी को भी गड़बड़ी करने का मौका न मिले।"

उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे को धार्मिक नजरिए से नहीं बल्कि श्रद्धालुओं की भावनाओं और पारदर्शिता के नजरिए से देखा जाना चाहिए।

नकली खादिमों पर कार्रवाई की मांग

विधायक ने आरोप लगाया कि पिरान कलियर में बड़ी संख्या में ऐसे लोग मौजूद हैं जो खुद को खादिम बताकर श्रद्धालुओं से संपर्क करते हैं।

उनका आरोप है कि कुछ लोग जायरीनों को भ्रमित कर उनसे पैसे लेते हैं या चढ़ावे से जुड़ी गड़बड़ी करते हैं।

उन्होंने प्रशासन से मांग की कि—

फर्जी खादिमों की पहचान की जाए।
उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
श्रद्धालुओं को जागरूक किया जाए।
विधायक ने कहा- इसे हिंदू-मुस्लिम नजरिए से न देखें

विधायक मोहम्मद शहजाद ने कहा कि धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं से जुड़े मुद्दों को किसी धर्म विशेष से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि मामला केवल श्रद्धालुओं की आस्था और व्यवस्था की पारदर्शिता का है।

उनके अनुसार, चाहे कोई भी धार्मिक स्थल हो, वहां आने वाले श्रद्धालुओं की भावनाओं और चढ़ावे की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

दरगाह प्रबंधन ने आरोपों पर क्या कहा?

दरगाह प्रबंधक और रुड़की तहसीलदार विकास अवस्थी ने व्यवस्था को लेकर सफाई दी है।

उन्होंने कहा कि दरगाह में अब चढ़ावे की गिनती पूरी सावधानी के साथ की जाती है और गोलक की गिनती सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में होती है।

उन्होंने बताया कि—

चढ़ावे की प्रक्रिया पर नजर रखी जाती है।
सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है।
नकली खादिमों पर समय-समय पर कार्रवाई की जाती है।

उन्होंने कहा कि कुछ लोग दरगाह के बाहर जायरीनों को बहला-फुसलाकर चंदा लेने की कोशिश करते हैं, जिन पर प्रशासन कार्रवाई करता है।

क्या है पिरान कलियर दरगाह का महत्व?

पिरान कलियर दरगाह उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के रुड़की क्षेत्र में स्थित एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है।

यहां हर साल देश-विदेश से बड़ी संख्या में जायरीन पहुंचते हैं। यह दरगाह सूफी संत हजरत अलाउद्दीन अली अहमद साबिर कलियरी की दरगाह के रूप में प्रसिद्ध है।

श्रद्धालु यहां मन्नत मांगने और आस्था प्रकट करने के लिए आते हैं।

बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी के कारण यहां चढ़ावे और प्रबंधन की व्यवस्था महत्वपूर्ण मुद्दा बन जाती है।

बदरीनाथ और अन्य धार्मिक स्थलों के मामलों के बीच उठा मुद्दा

हाल के दिनों में देश के कुछ बड़े धार्मिक स्थलों पर चढ़ावे से जुड़ी शिकायतों और जांच की खबरों के बाद धार्मिक स्थलों की वित्तीय पारदर्शिता पर चर्चा तेज हुई है।

ऐसे मामलों में मुख्य सवाल उठते हैं—

चढ़ावे की गिनती कैसे होती है?
उसकी निगरानी कौन करता है?
सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है?
श्रद्धालुओं के विश्वास को कैसे बनाए रखा जाए?

पिरान कलियर को लेकर भी अब इसी तरह की पारदर्शिता और निगरानी की मांग उठाई जा रही है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल पिरान कलियर दरगाह में चढ़ावे को लेकर विधायक के आरोपों के बाद प्रशासन और दरगाह प्रबंधन की भूमिका पर नजर रहेगी।

प्रशासन के सामने चुनौती है कि—

श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।
चढ़ावे की व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी हो।
फर्जी खादिमों और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाई जाए।

वहीं, दरगाह प्रबंधन का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में सुधार किए गए हैं और निगरानी लगातार जारी है।