ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना: मुआवजे की मांग को लेकर प्रभावित ग्रामीणों का आंदोलन तेज, हाईकोर्ट के आदेश के पालन की उठी मांग

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना: मुआवजे की मांग को लेकर प्रभावित ग्रामीणों का आंदोलन तेज, हाईकोर्ट के आदेश के पालन की उठी मांग

उत्तराखंड की महत्वाकांक्षी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों ने मुआवजा भुगतान में कथित देरी को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है। रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) की इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण से प्रभावित जनासू, खिलगढ़ मल्ला और खिलगढ़ तल्ला गांवों के ग्रामीणों का आरोप है कि उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद उन्हें चार गुना प्रतिकर (मुआवजा) और 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का भुगतान अब तक नहीं किया गया है।

ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभागों पर न्यायालय के निर्देशों का पालन न करने का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी है कि जब तक उन्हें नियमानुसार मुआवजा नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

क्या है पूरा मामला?

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग ब्रॉडगेज रेल परियोजना उत्तराखंड की सबसे महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजनाओं में से एक है। इस परियोजना के तहत कई जिलों में भूमि अधिग्रहण किया गया है, जिससे हजारों परिवार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुए हैं।

श्रीनगर गढ़वाल क्षेत्र के जनासू, खिलगढ़ मल्ला और खिलगढ़ तल्ला गांवों के प्रभावित किसानों का कहना है कि उनकी भूमि परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई, लेकिन उन्हें न्यायालय द्वारा निर्धारित मुआवजा अभी तक प्राप्त नहीं हुआ।

ग्रामीणों का दावा

आंदोलन कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार उन्हें अधिग्रहित भूमि का चार गुना प्रतिकर तथा भुगतान में देरी के कारण 12 प्रतिशत ब्याज मिलना चाहिए। उनका आरोप है कि कई बार प्रशासन, जिला अधिकारियों और संबंधित विभागों के समक्ष अपनी मांग रखने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से लंबित भुगतान के कारण अनेक परिवार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। भूमि अधिग्रहण के बाद उनकी आजीविका प्रभावित हुई है और उचित मुआवजा न मिलने से उनकी परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं।

प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि परियोजना से जुड़े अधिकारी और प्रशासनिक तंत्र न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद भुगतान प्रक्रिया पूरी नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि न्यायिक आदेशों के अनुपालन में हो रही देरी से प्रभावित परिवारों को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

हालांकि, प्रशासन और आरवीएनएल की ओर से इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले में संबंधित विभाग की प्रतिक्रिया आने का इंतजार है।

आंदोलन को तेज करने की चेतावनी

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जब तक सभी पात्र किसानों को नियमानुसार चार गुना मुआवजा और 12 प्रतिशत ब्याज का भुगतान नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन को और व्यापक एवं उग्र बनाया जाएगा। ऐसी स्थिति में किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था संबंधी स्थिति उत्पन्न होने की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

परियोजना का महत्व

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना उत्तराखंड की सबसे बड़ी रेल अवसंरचना परियोजनाओं में शामिल है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक रेल संपर्क स्थापित होगा, जिससे गढ़वाल क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार, सैन्य लॉजिस्टिक्स और स्थानीय परिवहन को बड़ी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

यह रेल लाइन चारधाम यात्रा मार्ग के लिए भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है और भविष्य में पर्वतीय क्षेत्रों के विकास में अहम भूमिका निभा सकती है।

भूमि अधिग्रहण और मुआवजा बना चुनौती

बड़े आधारभूत ढांचा परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण और उचित मुआवजा अक्सर प्रमुख चुनौती बनकर सामने आता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रभावित परिवारों को समय पर और न्यायसंगत मुआवजा मिले तो परियोजनाओं का कार्य भी बिना विवाद के आगे बढ़ सकता है।

फिलहाल श्रीनगर गढ़वाल के तीन गांवों में आंदोलन जारी है। अब सभी की नजर प्रशासन और आरवीएनएल की आगामी कार्रवाई पर है कि न्यायालय के आदेशों के अनुपालन और मुआवजा भुगतान को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है।