बंगाल TMC में दो फाड़ के संकेत: ऋतब्रत बनर्जी गुट ने बिप्लब मित्र को बनाया प्रदेश अध्यक्ष, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले संगठन से बढ़ा टकराव
पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में संगठनात्मक विवाद अब खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के अंदर चल रही खींचतान के बीच ऋतब्रत बनर्जी गुट ने वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बिप्लब मित्र को अपने गुट की ओर से तृणमूल कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष घोषित कर दिया है। यह फैसला मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा खुद को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष घोषित किए जाने के बाद सामने आया है।
शुक्रवार को कोलकाता के तपसिया इलाके में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद ऋतब्रत बनर्जी गुट ने नई संगठनात्मक संरचना का ऐलान किया। इस घोषणा के बाद बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और तृणमूल कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर विवाद और गहराने के संकेत मिल रहे हैं।
हालांकि, इस पूरे मामले में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि संगठनात्मक स्तर पर अंतिम वैधता किस गुट को मिलेगी। दोनों पक्ष अपने-अपने दावों को मजबूत बता रहे हैं।
ममता बनर्जी के फैसले के बाद सामने आया दूसरा नेतृत्व
तृणमूल कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव की शुरुआत हाल ही में हुई, जब पार्टी की वरिष्ठ नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य ने प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया। इसके बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्वयं प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने की घोषणा की।
ममता बनर्जी के इस कदम को पार्टी संगठन को अपने नियंत्रण में मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा गया। लेकिन इसके बाद ऋतब्रत बनर्जी गुट ने अलग संगठनात्मक ढांचा पेश करते हुए बिप्लब मित्र को प्रदेश अध्यक्ष घोषित कर दिया।
ऋतब्रत गुट ने अपने संगठन को ही "असल तृणमूल कांग्रेस" बताते हुए नई नियुक्तियों की घोषणा की है। इस कदम से पार्टी के भीतर सत्ता और संगठन नियंत्रण को लेकर संघर्ष खुलकर सामने आ गया है।
तपसिया में हुई लंबी बैठक, कई फैसलों पर लगी मुहर
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को कोलकाता के तपसिया इलाके के एक होटल में ऋतब्रत बनर्जी गुट की लंबी बैठक हुई। इस बैठक में पार्टी संगठन की भविष्य की रणनीति, आगामी कार्यक्रमों और विभिन्न इकाइयों के पुनर्गठन पर चर्चा की गई।
बैठक के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बिप्लब मित्र के नाम की घोषणा प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर की।
इसके अलावा कसबा विधानसभा क्षेत्र के विधायक जावेद खान को कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
गुट की ओर से दावा किया गया कि यह फैसला पार्टी को मजबूत करने और संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है।
बिप्लब मित्र को क्यों मिली जिम्मेदारी?
बिप्लब मित्र पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय नेता रहे हैं। वे पूर्व मंत्री रह चुके हैं और संगठनात्मक अनुभव रखने वाले नेताओं में शामिल हैं।
ऋतब्रत गुट ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी देकर अपने संगठनात्मक आधार को मजबूत करने का प्रयास किया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अनुभवी चेहरे को आगे लाने का उद्देश्य पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं और नेताओं को अपने साथ जोड़ना हो सकता है।
हालांकि, बिप्लब मित्र की नियुक्ति को लेकर अभी ममता बनर्जी गुट की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
कई मोर्चों पर नई नियुक्तियां
ऋतब्रत बनर्जी गुट ने प्रदेश अध्यक्ष के अलावा पार्टी के कई अन्य संगठनों में भी बदलाव की घोषणा की है।
घोषित नियुक्तियों के अनुसार:
चंद्रिमा भट्टाचार्य को राष्ट्रीय कार्यसमिति का सदस्य बनाया गया है।
महिला संगठन की अध्यक्ष की जिम्मेदारी सबीना यासमीन को दी गई है।
महिला संगठन की कार्यकारी अध्यक्ष शिउली साहा को बनाया गया है।
छात्र संगठन तृणमूल कांग्रेस छात्र परिषद (TMCP) की जिम्मेदारी सुदीप राहा को दी गई है।
छात्र संगठन के चेयरमैन पद पर कोहिनूर मजूमदार नियुक्त किए गए हैं।
युवा संगठन की जिम्मेदारी अनीसुर रहमान विदेश को सौंपी गई है।
अनुसूचित जाति-जनजाति प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी पूर्व विधायक आशीष मार्जित को दी गई है।
इन नियुक्तियों के जरिए गुट ने पार्टी के विभिन्न मोर्चों पर अपनी पकड़ मजबूत करने का संदेश देने की कोशिश की है।
चुनाव आयोग में दस्तावेज जमा करने का दावा
ऋतब्रत बनर्जी और उनके सहयोगियों ने दावा किया है कि उन्होंने तृणमूल कांग्रेस पर अपने संगठनात्मक दावे के समर्थन में मुख्य चुनाव अधिकारी के समक्ष आवश्यक दस्तावेज जमा किए हैं।
उनका कहना है कि संगठन से जुड़े दस्तावेज और आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद ही नई संरचना की घोषणा की गई है।
हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से अभी तक इस विवाद को लेकर कोई अंतिम निर्णय या आधिकारिक मान्यता की जानकारी सामने नहीं आई है।
21 जुलाई शहीद दिवस कार्यक्रम को लेकर भी विवाद
बैठक में आगामी 21 जुलाई शहीद दिवस कार्यक्रम को लेकर भी चर्चा हुई। तृणमूल कांग्रेस हर साल 21 जुलाई को शहीद दिवस के रूप में मनाती है, जिसका बंगाल की राजनीति में विशेष महत्व है।
ऋतब्रत बनर्जी ने बताया कि विक्टोरिया हाउस के सामने कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति नहीं मिलने के बाद गांधी प्रतिमा के सामने कार्यक्रम आयोजित करने के लिए प्रशासन से अनुमति मांगी गई है।
उन्होंने कहा कि उनका गुट हर वर्ष की तरह इस बार भी शहीद दिवस कार्यक्रम आयोजित करेगा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शहीद दिवस जैसे बड़े कार्यक्रम में दोनों गुटों की सक्रियता पार्टी के अंदर शक्ति प्रदर्शन का रूप ले सकती है।
TMC के लिए बढ़ी चुनौती
तृणमूल कांग्रेस लंबे समय से ममता बनर्जी के नेतृत्व में एकजुट पार्टी के रूप में काम करती रही है। ऐसे में संगठन के भीतर अलग-अलग नेतृत्व संरचनाओं का सामने आना पार्टी के लिए चुनौती बन सकता है।
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, बंगाल की राजनीति में संगठन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है और बूथ स्तर तक मजबूत नेटवर्क रखने वाली पार्टियों के लिए आंतरिक एकजुटता जरूरी होती है।
यदि विवाद लंबा खिंचता है तो इसका असर पार्टी कार्यकर्ताओं, आगामी चुनावी तैयारियों और संगठनात्मक फैसलों पर पड़ सकता है।
आगे क्या होगा?
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि चुनाव आयोग और पार्टी के कार्यकर्ता किस गुट को मान्यता देते हैं। साथ ही यह भी देखना होगा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला संगठन इस चुनौती का किस तरह जवाब देता है।
फिलहाल तृणमूल कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर शुरू हुआ विवाद बंगाल की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है। आने वाले दिनों में होने वाली राजनीतिक गतिविधियां यह तय करेंगी कि पार्टी में यह संघर्ष किस दिशा में आगे बढ़ता है।
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