सिंगापुर में बढ़ी हिंदू आबादी, 5 साल में हिस्सेदारी 5% से बढ़कर 5.4% हुई: सर्वे में सामने आया धार्मिक बदलाव का ट्रेंड

सिंगापुर में बढ़ी हिंदू आबादी, 5 साल में हिस्सेदारी 5% से बढ़कर 5.4% हुई: सर्वे में सामने आया धार्मिक बदलाव का ट्रेंड

धर्म से दूरी बनाने वालों की संख्या में भी बड़ा इजाफा, 2025 में 23.9% लोगों ने खुद को किसी धर्म से नहीं जोड़ा

सिंगापुर में पिछले पांच वर्षों के दौरान धार्मिक जनसांख्यिकी में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सरकारी सर्वेक्षण के अनुसार, देश में हिंदू आबादी की हिस्सेदारी में वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि कुछ अन्य प्रमुख धर्मों के अनुयायियों के अनुपात में कमी आई है। इसके साथ ही ऐसे लोगों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है, जो खुद को किसी भी धर्म से नहीं जोड़ते हैं।

सिंगापुर के जनरल हाउसहोल्ड सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2020 में देश की 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र की आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी 5.0 प्रतिशत थी, जो 2025 में बढ़कर 5.4 प्रतिशत हो गई। यानी पांच वर्षों में हिंदू समुदाय की हिस्सेदारी में 0.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

हिंदू समुदाय की हिस्सेदारी बढ़ने वाला प्रमुख धर्म

सर्वे के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में हिंदू धर्म ऐसा प्रमुख धर्म रहा, जिसके अनुयायियों के प्रतिशत में सकारात्मक बदलाव दर्ज किया गया। इसके पीछे विशेषज्ञों ने कई कारण बताए हैं, जिनमें भारत से आने वाले प्रवासियों की बढ़ती संख्या, पेशेवरों का सिंगापुर में बसना और जनसांख्यिकीय बदलाव शामिल हैं।

सिंगापुर में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं। इनमें तमिल समुदाय की संख्या भी काफी महत्वपूर्ण है, जिनकी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं हिंदू धर्म से जुड़ी हुई हैं।

धार्मिक पहचान से दूरी बढ़ी, गैर-धार्मिक आबादी 23.9% पहुंची

सर्वे की सबसे बड़ी बात यह रही कि सिंगापुर में खुद को किसी धर्म से नहीं जोड़ने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है।

2020 में ऐसे लोगों की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत थी, जो 2025 में बढ़कर 23.9 प्रतिशत हो गई। यानी पांच वर्षों में गैर-धार्मिक आबादी में करीब 3.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव सिंगापुर जैसे आधुनिक और बहुसांस्कृतिक समाज में बदलती सामाजिक सोच को दर्शाता है, जहां बड़ी संख्या में लोग धार्मिक पहचान के बजाय व्यक्तिगत विचारों और जीवनशैली को प्राथमिकता दे रहे हैं।

ईसाई, ताओ और बौद्ध आबादी के अनुपात में कमी

सर्वे के आंकड़ों के अनुसार, कुछ प्रमुख धर्मों के अनुयायियों की हिस्सेदारी में गिरावट दर्ज की गई।

ईसाई आबादी की हिस्सेदारी में करीब 1.8 प्रतिशत की कमी आई।
ताओ धर्म मानने वालों की संख्या में लगभग 1.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
बौद्ध धर्म के अनुयायियों के अनुपात में भी कमी देखने को मिली।

हालांकि, सिंगापुर अब भी दुनिया के सबसे धार्मिक रूप से विविध देशों में शामिल है, जहां कई धर्मों और संस्कृतियों के लोग साथ रहते हैं।

हिंदू आबादी बढ़ने के पीछे क्या हैं कारण?

विशेषज्ञों के मुताबिक, सिंगापुर में हिंदू आबादी बढ़ने के पीछे मुख्य कारण प्रवासन और प्राकृतिक जनसंख्या बदलाव हैं।

1. भारत से बढ़ता प्रवासन

सिंगापुर एशिया का एक बड़ा आर्थिक केंद्र है। यहां भारत से बड़ी संख्या में आईटी, वित्त, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों से जुड़े पेशेवर पहुंचते हैं। इनमें कई लोग लंबे समय तक रहने के बाद स्थायी निवासी या नागरिक बन जाते हैं।

2. जन्म और मृत्यु दर का अंतर

रिपोर्ट में बताया गया कि हिंदू समुदाय में जन्म दर और मृत्यु दर के बीच अंतर भी आबादी के अनुपात को प्रभावित करता है। हिंदुओं में जन्म दर करीब 7.3 प्रति हजार और मृत्यु दर करीब 5 प्रति हजार दर्ज की गई।

3. धार्मिक पहचान बनाए रखने की प्रवृत्ति

सर्वे में यह भी सामने आया कि हिंदू समुदाय में अपनी धार्मिक पहचान बनाए रखने की दर काफी अधिक है। करीब 97 प्रतिशत हिंदू अपने मूल धर्म से जुड़े रहते हैं।

धार्मिक पहचान बनाए रखने में हिंदू समुदाय आगे

सर्वे के अनुसार, अपने मूल धर्म को बनाए रखने के मामले में हिंदू समुदाय की रिटेंशन रेट सबसे अधिक रही।

हिंदू: 97 प्रतिशत
मुस्लिम: 96.1 प्रतिशत
ताओ: 91.7 प्रतिशत
बौद्ध: 79.7 प्रतिशत

वहीं ईसाई समुदायों में यह दर अपेक्षाकृत कम दर्ज की गई।

सिंगापुर की बदलती सामाजिक तस्वीर

सिंगापुर लंबे समय से धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता के लिए जाना जाता है। यहां चीनी, मलय, भारतीय और अन्य समुदायों के लोग रहते हैं। नए आंकड़े बताते हैं कि देश में एक ओर कुछ धार्मिक समुदायों की हिस्सेदारी बदल रही है, वहीं दूसरी ओर नई पीढ़ी में धर्म से दूरी बनाने का रुझान भी बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में प्रवासन, जन्म दर और सामाजिक बदलाव सिंगापुर की धार्मिक जनसंख्या संरचना को और प्रभावित कर सकते हैं।