बिहार की बेटी पायल कुमारी ने जापान में बढ़ाया देश का मान, 'No Helmet, No Start Bike' प्रोजेक्ट के साथ Sakura Science Program में किया प्रतिनिधित्व

बिहार की बेटी पायल कुमारी ने जापान में बढ़ाया देश का मान, 'No Helmet, No Start Bike' प्रोजेक्ट के साथ Sakura Science Program में किया प्रतिनिधित्व

बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के सिकटा की रहने वाली पायल कुमारी रौनियार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन करते हुए जापान में आयोजित प्रतिष्ठित Sakura Science Program में बिहार का प्रतिनिधित्व किया। सड़क सुरक्षा पर आधारित अपने अभिनव 'No Helmet, No Start Bike' प्रोजेक्ट के साथ पायल ने न केवल राज्य बल्कि पूरे देश का गौरव बढ़ाया। जापान की शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक संस्थाओं के भ्रमण और अंतरराष्ट्रीय छात्रों के साथ संवाद के बाद वह भारत लौट आई हैं।

पायल की इस उपलब्धि को बिहार के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है। विज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में उनकी भागीदारी यह दर्शाती है कि छोटे शहरों और कस्बों के छात्र भी वैश्विक मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकते हैं।

भारत से चुने गए 51 छात्रों में शामिल थीं पायल

जानकारी के अनुसार, 27 जून को पायल भारत से जापान के लिए रवाना हुई थीं। Sakura Science Program के तहत भारत से कुल 51 छात्रों का चयन किया गया था, जिनमें 20 छात्राएं शामिल थीं। बिहार से इस कार्यक्रम में पायल कुमारी रौनियार अकेली प्रतिभागी थीं।

वर्तमान में पायल पटना के कंकड़बाग स्थित New Era Public School में कक्षा 11वीं की छात्रा हैं। उनका चयन सड़क सुरक्षा और तकनीकी नवाचार पर आधारित उनके प्रोजेक्ट 'No Helmet, No Start Bike' के आधार पर किया गया।

क्या है 'No Helmet, No Start Bike' प्रोजेक्ट?

पायल का प्रोजेक्ट सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने की सोच पर आधारित है। इस अवधारणा का उद्देश्य ऐसा तकनीकी समाधान विकसित करना है, जिसमें यदि चालक हेलमेट नहीं पहने, तो बाइक स्टार्ट ही न हो।

भारत में हर वर्ष सड़क दुर्घटनाओं में बड़ी संख्या में लोगों की जान हेलमेट का उपयोग न करने के कारण जाती है। ऐसे में यह प्रोजेक्ट तकनीक के माध्यम से सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण विचार माना जा रहा है।

जापान साइंस एंड टेक्नोलॉजी एजेंसी में मिला वैश्विक अनुभव

जापान पहुंचने के बाद पायल ने सबसे पहले Japan Science and Technology Agency (JST) में आयोजित ओरिएंटेशन कार्यक्रम में भाग लिया।

इस दौरान उन्हें जापान की वैज्ञानिक कार्यप्रणाली, अनुसंधान संस्कृति, समयपालन, अनुशासन और नवाचार आधारित शिक्षा प्रणाली की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि जापान किस प्रकार विज्ञान और तकनीक को सामाजिक विकास से जोड़कर आगे बढ़ा रहा है।

भारतीय दूतावास और जापानी संस्कृति से हुईं रूबरू

ओरिएंटेशन कार्यक्रम के बाद पायल ने टोक्यो स्थित भारतीय दूतावास का दौरा किया। यहां भारतीय अधिकारियों से मुलाकात के दौरान उन्हें भारत-जापान संबंधों, शिक्षा सहयोग और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक आदान-प्रदान की जानकारी दी गई।

इसके बाद उन्होंने टोक्यो के प्रसिद्ध आसाकुसा सांस्कृतिक क्षेत्र का भ्रमण किया, जहां जापान की पारंपरिक संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहर, स्वच्छता व्यवस्था और अनुशासित जीवनशैली को करीब से समझने का अवसर मिला।

JAXA स्पेस सेंटर में जाना अंतरिक्ष विज्ञान का अनुभव

30 जून को पायल ने जापान की अंतरिक्ष एजेंसी JAXA Tsukuba Space Center का दौरा किया। यहां उन्होंने उपग्रह तकनीक, रॉकेट लॉन्च सिस्टम, चंद्र मिशन, अंतरिक्ष अनुसंधान और आधुनिक स्पेस टेक्नोलॉजी से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी प्राप्त की।

इस दौरान वैज्ञानिकों ने प्रतिभागियों को अंतरिक्ष अनुसंधान में जापान की उपलब्धियों और भविष्य की परियोजनाओं के बारे में भी जानकारी दी।

टोक्यो विश्वविद्यालय में देखी आधुनिक शिक्षा प्रणाली

जापान यात्रा के दौरान पायल ने University of Tokyo के Kashiwa Campus का भी भ्रमण किया। यहां उन्होंने अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं, अनुसंधान सुविधाओं और आधुनिक शिक्षा प्रणाली का अवलोकन किया।

उन्होंने विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं और छात्रों के साथ बातचीत कर वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी विकास की प्रक्रियाओं को समझा।

अंतरराष्ट्रीय छात्रों के बीच प्रस्तुत की भारत की सांस्कृतिक विरासत

1 जुलाई को पायल ने Meikei High School में आयोजित अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों में भाग लिया।

इस कार्यक्रम में जापान, भारत, ताइवान और इंडोनेशिया के छात्रों ने विभिन्न विषयों पर विचार साझा किए। आर्किटेक्चर विषय पर आयोजित समूह चर्चा में पायल ने बिहार और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक एवं स्थापत्य विरासत के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

विदेशी छात्रों ने भारतीय संस्कृति, ऐतिहासिक स्मारकों और पारंपरिक वास्तुकला को लेकर विशेष रुचि दिखाई तथा पायल की प्रस्तुति की सराहना की।

विज्ञान, रोबोटिक्स और नई तकनीकों को करीब से समझा

2 जुलाई को उन्होंने National Museum of Nature and Science तथा Dai Nippon Printing Company का भ्रमण किया।

यहां पायल ने रोबोटिक्स, डिजिटल प्रिंटिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, वैज्ञानिक अनुसंधान और अत्याधुनिक औद्योगिक तकनीकों से जुड़ी जानकारी प्राप्त की। संग्रहालय में प्रदर्शित वैज्ञानिक मॉडलों और तकनीकी नवाचारों ने उन्हें काफी प्रभावित किया।

स्मार्ट नेविगेशन तकनीक पर मिला विशेष व्याख्यान

3 जुलाई को पायल ने Miraikan – The National Museum of Emerging Science and Innovation में प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. चीको असाकावा के व्याख्यान में भाग लिया।

इस व्याख्यान में दृष्टिबाधित लोगों के लिए विकसित स्मार्ट नेविगेशन तकनीक और सहायक तकनीकों की जानकारी दी गई। पायल ने बताया कि इस तरह की तकनीकें समाज के सभी वर्गों के लिए विज्ञान को उपयोगी बनाने का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

बिहार के युवाओं के लिए बनीं प्रेरणा

पायल कुमारी रौनियार की उपलब्धि यह साबित करती है कि प्रतिभा अवसर मिलने पर वैश्विक मंच तक पहुंच सकती है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में बिहार का प्रतिनिधित्व कर यह संदेश दिया है कि मेहनत, नवाचार और वैज्ञानिक सोच के बल पर दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई जा सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे कार्यक्रम भारत और जापान के बीच वैज्ञानिक सहयोग को मजबूत करने के साथ-साथ छात्रों को वैश्विक अनुसंधान, तकनीक और नवाचार से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। पायल की सफलता बिहार के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनने के साथ-साथ सड़क सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर तकनीकी समाधान विकसित करने की दिशा में भी एक सकारात्मक पहल मानी जा रही है।