मेडिकल फैकल्टी इंटरव्यू में गड़बड़ी का मामला: MP हाईकोर्ट ने सरकार को विभागीय जांच पूरी करने के दिए निर्देश

मेडिकल फैकल्टी इंटरव्यू में गड़बड़ी का मामला: MP हाईकोर्ट ने सरकार को विभागीय जांच पूरी करने के दिए निर्देश

अधिकारियों की लापरवाही जांच में सामने आई, चार हफ्ते में नई रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश; पीडियाट्रिक्स के लिए दोबारा इंटरव्यू का प्रस्ताव

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने मेडिकल फैकल्टी के इंटरव्यू से जुड़े कथित अनियमितता के मामले में राज्य सरकार को विभागीय जांच को आगे बढ़ाकर उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि विभागीय जांच में अधिकारियों की ओर से ड्यूटी में लापरवाही सामने आने के बाद अब मामले में आगे की प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए। कोर्ट ने सरकार से इस संबंध में निर्धारित समय के भीतर नई अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी है।

यह मामला डॉक्टर आरडी दत्त की ओर से दायर अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। सुनवाई के दौरान लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से एक अनुपालन रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गई। यह रिपोर्ट विभाग के अपर मुख्य सचिव की ओर से हस्ताक्षरित थी। रिपोर्ट में मेडिकल फैकल्टी के इंटरव्यू की प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की कार्यप्रणाली और कथित लापरवाही का उल्लेख किया गया था।

हाईकोर्ट ने सरकार की ओर से पेश अनुपालन रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लिया। इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि विभागीय जांच की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए उसे उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाए। यह रिपोर्ट हाईकोर्ट के 20 मई 2026 को दिए गए पहले के आदेश के पालन में पेश की गई थी।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि पीडियाट्रिक्स यानी बाल रोग विषय के लिए दोबारा इंटरव्यू कराने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। सरकार के अनुसार, यह प्रक्रिया हाईकोर्ट के पहले दिए गए निर्देशों के अनुरूप पूरी की जाएगी। कोर्ट में बताया गया कि नए इंटरव्यू से संबंधित प्रक्रिया दो अलग-अलग रिट याचिकाओं में दिए गए निर्देशों के अनुसार आगे बढ़ाई जाएगी।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नई अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। कोर्ट ने कहा है कि अगली रिपोर्ट के साथ लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव का हलफनामा भी पेश किया जाए। हलफनामे में विभागीय जांच में जिन अधिकारियों की भूमिका सामने आई है, उनके खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई का विवरण देना होगा।

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने से फिलहाल छूट भी दी है। अब सरकार को अगली सुनवाई तक विभागीय जांच की प्रगति और अधिकारियों के खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई की स्थिति कोर्ट के सामने रखना होगी।

हाईकोर्ट के इस निर्देश के बाद अब मामले में विभागीय जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। साथ ही पीडियाट्रिक्स फैकल्टी के लिए नए इंटरव्यू कराने के प्रस्ताव पर भी कार्रवाई होगी। सरकार को चार सप्ताह के भीतर नई अनुपालन रिपोर्ट और अपर मुख्य सचिव का हलफनामा पेश करना है। इसके बाद कोर्ट आगे की स्थिति पर विचार करेगा।