ईरान में सत्ता संघर्ष तेज: विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर महाभियोग की तैयारी, राष्ट्रपति पजशकियान की ताकत पर उठे सवाल

ईरान में सत्ता संघर्ष तेज: विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर महाभियोग की तैयारी, राष्ट्रपति पजशकियान की ताकत पर उठे सवाल

अमेरिका से तनाव के बीच ईरान में बढ़ी राजनीतिक हलचल, IRGC की बढ़ती भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज

ईरान में एक बार फिर सत्ता के अंदर चल रही खींचतान सुर्खियों में है। अमेरिका के साथ तनाव, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ते विवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा संकट के बीच अब देश की आंतरिक राजनीति में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के कुछ सांसद विदेश मंत्री अब्बास अराघची के खिलाफ महाभियोग की तैयारी कर रहे हैं। सांसदों का आरोप है कि अमेरिका के साथ बातचीत और कूटनीतिक फैसलों को लेकर विदेश मंत्रालय की रणनीति पर सवाल खड़े होते हैं।

वरिष्ठ सांसद होसैनअली हाजीदेलिगानी ने दावा किया है कि अराघची के खिलाफ महाभियोग लाने के लिए जरूरी दस्तावेज और सबूत जुटाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सही समय आने पर संसद में यह प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

हालांकि, अभी तक महाभियोग की औपचारिक प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है और विदेश मंत्रालय की ओर से इस मामले पर कोई बड़ा बयान सामने नहीं आया है।

अमेरिका से बातचीत बनी विवाद की वजह

अब्बास अराघची लंबे समय से ईरान की विदेश नीति के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। परमाणु समझौते और पश्चिमी देशों के साथ बातचीत में उनकी अहम भूमिका रही है।

लेकिन ईरान के कट्टरपंथी सांसदों का एक वर्ग अमेरिका के साथ बातचीत की नीति का विरोध करता रहा है। उनका मानना है कि मौजूदा हालात में अमेरिका पर भरोसा करना सही रणनीति नहीं है।

सांसद हाजीदेलिगानी ने अमेरिका के साथ हुई बातचीत पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी समझौते में ईरान की संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं किया जा सकता।

वहीं, दूसरी तरफ ईरान के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव और आर्थिक प्रतिबंधों के बीच कूटनीतिक रास्ते खुले रखना भी सरकार की रणनीति का हिस्सा है।

राष्ट्रपति मसूद पजशकियान की भूमिका पर बढ़ी चर्चा

इस पूरे घटनाक्रम के बीच राष्ट्रपति मसूद पजशकियान की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।

कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान में सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े बड़े फैसलों में राष्ट्रपति की भूमिका सीमित की जा रही है और सर्वोच्च नेता के नियंत्रण वाले सुरक्षा संस्थानों का प्रभाव बढ़ रहा है।

ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में राष्ट्रपति सरकार के प्रशासनिक कामकाज का नेतृत्व करते हैं, लेकिन रक्षा, सुरक्षा और विदेश नीति के कई महत्वपूर्ण मामलों में सर्वोच्च नेता की भूमिका सबसे प्रभावशाली मानी जाती है।

IRGC की बढ़ती ताकत पर दुनिया की नजर

ईरान की सबसे प्रभावशाली संस्थाओं में से एक इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) है।

IRGC केवल सैन्य संगठन नहीं है, बल्कि ईरान की क्षेत्रीय रणनीति, सुरक्षा नीति और विदेशी अभियानों में भी इसकी अहम भूमिका रही है।

अमेरिका और इजराइल के साथ तनाव के बीच IRGC का प्रभाव और ज्यादा बढ़ता दिखाई दे रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा, परमाणु कार्यक्रम और अमेरिका से जुड़े मामलों में सैन्य नेतृत्व की राय को अधिक महत्व दिया जा रहा है।

हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और ईरानी सत्ता संरचना में वास्तविक शक्ति संतुलन को लेकर अलग-अलग आकलन सामने आते रहे हैं।

पजशकियान ने इस्तीफे की खबरों को किया खारिज

राजनीतिक दबाव के बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने इस्तीफा देने की खबरों को खारिज किया है।

उन्होंने कहा कि वह अपने पद पर बने रहेंगे और देश की सुरक्षा के लिए सभी संस्थानों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

पजशकियान ने यह भी कहा कि ईरान युद्ध को बढ़ाना नहीं चाहता, लेकिन अगर देश की सुरक्षा पर खतरा आता है तो वह अपनी रक्षा करने में पीछे नहीं हटेगा।

होर्मुज स्ट्रेट बना तनाव का सबसे बड़ा केंद्र

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा होर्मुज स्ट्रेट बना हुआ है।

यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा परिवहन रास्तों में शामिल है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस इसी रास्ते से होकर गुजरता है।

क्षेत्र में किसी भी सैन्य टकराव या समुद्री बाधा का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

हालिया तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज में लंबे समय तक संकट बना रहता है तो तेल कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

अमेरिका-ईरान बातचीत पर असमंजस जारी

ईरान और अमेरिका के बीच संभावित बातचीत को लेकर भी स्थिति साफ नहीं है।

कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत की कोशिशें जारी हैं, जिसमें खाड़ी देशों की मध्यस्थता की भूमिका हो सकती है।

वहीं, ईरान ने कई बार कहा है कि वह अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों से जुड़े मुद्दों पर कोई समझौता नहीं करेगा।

खाड़ी देशों की बढ़ी चिंता

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव पूरे खाड़ी क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

सऊदी अरब, कतर, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश लगातार क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।

खाड़ी देशों को डर है कि अगर संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तेल व्यापार, समुद्री मार्गों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।

ईरान की राजनीति में आगे क्या?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विदेश मंत्री अराघची के खिलाफ महाभियोग वास्तव में शुरू होगा या यह केवल राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति है।

दूसरा बड़ा सवाल यह है कि ईरान की विदेश नीति में आने वाले समय में कूटनीति का प्रभाव रहेगा या सुरक्षा संस्थानों की भूमिका और मजबूत होगी।

अमेरिका के साथ तनाव, परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय संघर्ष और घरेलू राजनीतिक दबाव के बीच ईरान के लिए आने वाले दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

निष्कर्ष

ईरान में विदेश मंत्री अब्बास अराघची के खिलाफ महाभियोग की तैयारी और राष्ट्रपति मसूद पजशकियान की भूमिका को लेकर उठ रहे सवाल देश के अंदर चल रहे शक्ति संतुलन को दिखाते हैं।

हालांकि कई दावे अभी मीडिया रिपोर्ट्स और राजनीतिक बयानों पर आधारित हैं, लेकिन यह साफ है कि ईरान इस समय बाहरी दबाव और आंतरिक राजनीतिक चुनौतियों दोनों का सामना कर रहा है।

अमेरिका के साथ तनाव, IRGC का प्रभाव और सत्ता के भीतर बदलते समीकरण आने वाले समय में ईरान की दिशा तय कर सकते हैं।