DAVV के नए एग्जाम पैटर्न में बड़ा झटका: BA-BSc के 2 हजार से ज्यादा छात्र हिंदी-अंग्रेजी में फेल
करीब 13 हजार विद्यार्थियों ने दी थी परीक्षा, नए सिस्टम में 35 नंबर की अनिवार्यता; दोनों विषयों में खराब रिजल्ट के बाद कॉलेजों से मांगी रिपोर्ट
इंदौर की देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) में नए परीक्षा पैटर्न के तहत जारी हुए पहले परिणाम ने विश्वविद्यालय और संबद्ध कॉलेजों की चिंता बढ़ा दी है। BA और BSc फर्स्ट ईयर के 2 हजार से अधिक विद्यार्थी अनिवार्य हिंदी और अंग्रेजी विषयों में पास नहीं हो सके। नए परीक्षा सिस्टम के तहत पहली बार परीक्षा देने वाले इन छात्रों के परिणाम में करीब 15 प्रतिशत विद्यार्थी भाषा विषयों में न्यूनतम अंक हासिल नहीं कर पाए।
नए रिजल्ट का असर BA और BSc फर्स्ट ईयर के कुल परिणाम पर भी दिखाई दिया। इन दोनों पाठ्यक्रमों का संयुक्त पास प्रतिशत करीब 40 प्रतिशत रहा। DAVV ने खराब प्रदर्शन को देखते हुए अब अपने संबद्ध कॉलेजों से जवाब और जानकारी मांगी है। विश्वविद्यालय यह जानना चाहता है कि हिंदी और अंग्रेजी की कक्षाएं कितनी संचालित की गईं और इन विषयों को पढ़ाने के लिए कॉलेजों ने किस तरह की व्यवस्था अपनाई थी।
इस परीक्षा में BA और BSc फर्स्ट ईयर के करीब 13 हजार विद्यार्थी शामिल हुए थे। इन विद्यार्थियों पर विश्वविद्यालय के नए परीक्षा पैटर्न का इस्तेमाल किया गया था। यह व्यवस्था Ordinance 14-1 के तहत लागू की गई है, जिसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप लागू किया गया है।
नए सिस्टम में परीक्षा का तरीका पहले की तुलना में बदल दिया गया है। पहले विद्यार्थियों के लिए 70 अंकों की थ्योरी परीक्षा और 30 अंकों का इंटरनल असेसमेंट होता था। अब इस व्यवस्था को बदलकर 100 अंकों का एक ही थ्योरी पेपर किया गया है। नए नियम में विद्यार्थी को इसी थ्योरी परीक्षा में कम से कम 35 अंक हासिल करना जरूरी है।
इस बदलाव का सबसे बड़ा असर उन विद्यार्थियों पर पड़ा है, जो थ्योरी पेपर में न्यूनतम अंक हासिल नहीं कर सके। पहले इंटरनल असेसमेंट के अंक कम थ्योरी स्कोर की कुछ हद तक भरपाई कर देते थे, लेकिन नए पैटर्न में ऐसी गुंजाइश नहीं बची है। विश्वविद्यालय के अधिकारियों का मानना है कि नए सिस्टम ने खास तौर पर भाषा विषयों में विद्यार्थियों की पढ़ाई से जुड़ी कमियों को सामने ला दिया है।
हिंदी और अंग्रेजी के अलावा मल्टीडिसिप्लिनरी, भारत बोध और वोकेशनल पेपरों में भी करीब 10 प्रतिशत विद्यार्थी असफल हुए हैं। हालांकि, सबसे ज्यादा चिंता अनिवार्य भाषा विषयों के परिणाम को लेकर सामने आई है। विश्वविद्यालय ने इसी वजह से संबद्ध कॉलेजों से इन विषयों की पढ़ाई और कक्षाओं से संबंधित जानकारी मांगी है।
BA और BSc के परिणाम की तुलना BCom के परिणाम से करने पर भी अंतर सामने आया है। BCom फर्स्ट ईयर के विद्यार्थियों ने भी इसी परीक्षा व्यवस्था के तहत अनिवार्य विषयों की परीक्षा दी थी, लेकिन इस पाठ्यक्रम का कुल पास प्रतिशत करीब 75 प्रतिशत रहा। इसके मुकाबले BA और BSc का संयुक्त पास प्रतिशत लगभग 40 प्रतिशत रहने से विश्वविद्यालय ने मामले की समीक्षा शुरू की है।
DAVV की ओर से अब संबद्ध कॉलेजों को हिंदी और अंग्रेजी विषयों की पढ़ाई से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया है। कॉलेजों से यह जानकारी मांगी गई है कि इन विषयों की कितनी कक्षाएं आयोजित की गईं और विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए कौन-कौन से तरीके अपनाए गए। विश्वविद्यालय इस जानकारी के जरिए यह समझने की कोशिश कर रहा है कि भाषा विषयों में इतने विद्यार्थियों के कमजोर प्रदर्शन की वजह क्या रही।
DAVV के परीक्षा नियंत्रक प्रोफेसर अशेष तिवारी के अनुसार, यह Ordinance 14-1 के तहत 100 अंकों की थ्योरी परीक्षा वाला पहला परीक्षा परिणाम है। उनके मुताबिक, पहले इंटरनल असेसमेंट से विद्यार्थियों को कुल अंक सुधारने में मदद मिलती थी। अब हिंदी और अंग्रेजी में 2 हजार से अधिक विद्यार्थियों के असफल होने के बाद कॉलेजों से इन विषयों की पढ़ाई से संबंधित रिपोर्ट मांगी जा रही है।
नए परीक्षा पैटर्न के पहले परिणाम के बाद अब विश्वविद्यालय का फोकस यह पता लगाने पर है कि विद्यार्थियों के कमजोर प्रदर्शन के पीछे मुख्य वजह क्या रही। कॉलेजों से मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर हिंदी और अंग्रेजी की पढ़ाई और कक्षाओं से जुड़ी स्थिति की समीक्षा की जाएगी। फिलहाल इस परिणाम ने DAVV के नए परीक्षा सिस्टम को लेकर चर्चा जरूर तेज कर दी है।
news desk MPcg