भिवानी के तिगड़ाना में तालाब सौंदर्यीकरण पर उठे सवाल, उद्घाटन के बाद भी जमीन पर नहीं दिखी ‘खूबसूरती’!
लाखों-करोड़ों रुपये खर्च होने के दावे के बीच तालाब की तस्वीर ने खड़े किए सवाल, लोगों ने पूछा- आखिर विकास का पैसा गया कहां?
भिवानी, हरियाणा। हरियाणा के भिवानी जिले के तिगड़ाना गांव में तालाब के सौंदर्यीकरण को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों और दावों में कहा जा रहा है कि तालाब के विकास और सौंदर्यीकरण पर बड़ी रकम खर्च की गई और इसका उद्घाटन भी हो चुका है। लेकिन मौके की तस्वीरें इस दावे से अलग नजर आ रही हैं।
दावा है कि जिस तालाब को विकास कार्यों के बाद सुंदर और व्यवस्थित बनाया जाना था, उसकी मौजूदा स्थिति देखकर लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर विकास कार्यों पर खर्च की गई रकम का असर जमीन पर क्यों दिखाई नहीं दे रहा।
कागजों पर विकास, जमीन पर सवाल
मामले को लेकर सोशल मीडिया पर तंज भी देखने को मिल रहा है कि “विकास पहले फाइलों में हुआ और तालाब तक पहुंचते-पहुंचते थक गया।” हालांकि, यह एक व्यंग्यात्मक टिप्पणी है और इसे सरकारी रिकॉर्ड या जांच का निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर तालाब के सौंदर्यीकरण पर बड़ी राशि खर्च की गई है, तो मौके पर उसका वास्तविक काम कितना हुआ और उसकी गुणवत्ता कैसी है?
सरकारी स्तर पर तालाबों के विकास पर जोर
हरियाणा में अमृत सरोवर और अन्य योजनाओं के तहत गांवों के तालाबों के पुनर्जीवन, सौंदर्यीकरण और जल संरक्षण पर काम किया गया है। जनवरी 2024 में राज्य सरकार ने 60 अमृत सरोवरों के उद्घाटन की जानकारी दी थी, जिनमें भिवानी जिले के तीन तालाब भी शामिल थे। सरकार ने उस समय बताया था कि राज्य में 2,082 तालाबों का पुनर्जीवन किया जा चुका था और इस काम पर कुल 267 करोड़ रुपये खर्च हुए थे।
वहीं, जुलाई 2026 में तिगड़ाना के करीब 50 साल पुराने जलघर के 18 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्निर्माण की योजना की भी रिपोर्ट सामने आई थी। हालांकि, यह परियोजना तालाब के सौंदर्यीकरण से अलग है।
लोगों के सवालों का जवाब जरूरी
तालाब सौंदर्यीकरण के मामले में अब स्थानीय स्तर पर यह स्पष्ट होना जरूरी है कि परियोजना की कुल लागत कितनी थी, किस विभाग ने काम कराया, किस एजेंसी को ठेका दिया गया और काम की गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर हुई।
अगर वास्तव में सरकारी राशि खर्च हुई है, तो उसके उपयोग और काम की स्थिति का रिकॉर्ड सार्वजनिक होना चाहिए। वहीं यदि सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावे गलत या बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए हैं, तो संबंधित विभाग की ओर से स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
फिलहाल जांच के बिना निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी
उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि सरकारी पैसे का गबन हुआ है। इसके लिए आधिकारिक जांच, टेंडर रिकॉर्ड, भुगतान विवरण और मौके की तकनीकी जांच जरूरी होगी।
फिलहाल तिगड़ाना तालाब को लेकर सामने आई तस्वीरों ने सरकारी विकास कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी पर जरूर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस मामले में क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या मौके का निरीक्षण किया जाता है।
news desk MPcg