भोजशाला: मंदिर या मस्जिद? एएसआई ने कोर्ट को सौंपी रिपोर्ट

भोजशाला: मंदिर या मस्जिद? एएसआई ने कोर्ट को सौंपी रिपोर्ट


धार: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने धार में स्थित भोजशाला की साइंटिफिक स्टडी कर 2,000 पेज की रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंप दी है। करीब तीन महीने चली इस स्टडी के दौरान हिंदू और मुस्लिम पक्ष ने अपने-अपने दावे किए हैं। 22 जुलाई को हाईकोर्ट में अगली सुनवाई होगी। दावा किया जा रहा है कि यहां 94 से ज्यादा क्षतिग्रस्त मूर्तियां बरामद की गई हैं।

एएसआई की रिपोर्ट:

रिपोर्ट की लंबाई: 2000 पेज
रिपोर्ट सौंपने की तिथि: 15 जुलाई 2024
अगली सुनवाई: 22 जुलाई 2024

एएसआई की स्टडी:

एएसआई ने धार जिले में स्थित भोजशाला का सर्वे पूरा कर अपनी दो हजार पेज की रिपोर्ट मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बैंच को सौंप दी है। अब 22 जुलाई को इस मसले पर सुनवाई होगी। सर्वे के दौरान कई महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं जो साबित करते हैं कि यहां पहले एक हिंदू मंदिर था।

विवाद का इतिहास:

धार जिले के इस 11वीं सदी में बने परिसर का विवाद नया नहीं है। हिंदू समुदाय भोजशाला को वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद कहता है। हिंदू फ्रंट ऑफ जस्टिस की याचिका पर हाईकोर्ट ने 11 मार्च को एएसआई को आदेश दिया था कि वह छह हफ्ते में भोजशाला परिसर की साइंटिफिक स्टडी कर अपनी रिपोर्ट सौंपे।

हिंदू पक्ष का दावा:

हिंदू फ्रंट ऑफ जस्टिस के वकील एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने कहा कि इस मामले में एएसआई रिपोर्ट महत्वपूर्ण है। एएसआई रिपोर्ट ने हमारे केस को मजबूत किया है। उन्होंने दावा किया कि सर्वे के दौरान कई ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जो साबित करते हैं कि यहां मंदिर था।

वकील हरि शंकर जैन ने कहा कि हिंदू जनता सदियों से धार में पूजा करने के लिए तरस रही थी। उन्होंने कहा, "रिपोर्ट में साबित हो गया है कि वहां पहले हिंदू मंदिर था। वेद शास्त्र, संस्कृत, धार्मिक शिक्षा के पठन-पाठन का कार्य वहां होता था।"

एएसआई के सर्वे के दौरान मिले साक्ष्य:

94 से ज्यादा टूटी मूर्तियां प्राप्त हुई हैं।
खंभों पर वेद-शास्त्रों के चिन्ह मिले हैं, श्लोक लिखे मिलें हैं।
पुरानी कलाकृतियां मिली हैं।

आदेश और विवाद:

पूरा विवाद एएसआई के सात अप्रैल 2003 के आदेश को लेकर है। हिंदुओं और मुस्लिमों में विवाद बढ़ने पर एएसआई ने आदेश जारी कर परिसर में प्रवेश को सीमित किया था। आदेश के बाद 21 साल से हिंदू सिर्फ मंगलवार को भोजशाला में पूजा-अर्चना कर सकते हैं, जबकि मुस्लिम शुक्रवार को नमाज अदा कर सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट भी जाएगा मामला:

भोजशाला के मसले पर एक पक्ष पहले ही सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने एएसआई को निर्देश दिया था कि साइंटिफिक स्टडी के दौरान भोजशाला के भौतिक ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। इस वजह से हिंदू पक्ष अब एएसआई की रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कह रहा है।

रिपोर्ट का सार्वजनिक न होना:

एएसआई की रिपोर्ट की प्रतियां दोनों ही पक्षों को सौंपी जाएगी। कोर्ट ने दोनों ही पक्षों को सख्त निर्देश दिए हैं कि रिपोर्ट को सार्वजनिक न करें। एएसआई ने कार्बन डेटिंग, जीपीएस सहित अन्य तकनीक इस सर्वे में अपनाई है। भोजशाला के बड़े हिस्से में खुदाई भी की गई है। दावा किया गया है कि खुदाई के दौरान पुरानी मूर्तियों के अवशेष, धार्मिक चिह्न मिले हैं।

इतिहास:

वर्ष 1902 में अंग्रेजों के शासनकाल में एएसआई ने धार भोजशाला का सर्वे किया था। तब की रिपोर्ट में मंदिर के अलावा परिसर के एक हिस्से में मस्जिद का उल्लेख भी किया गया था। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने नए सिरे से स्टडी के निर्देश दिए थे। यह सर्वे रिपोर्ट हाईकोर्ट में चल रही याचिका के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।