Rajasthan: 25 दिन बीत गए हैं लेकिन नहीं हुआ मंत्रिमंडल का निर्माण, अब 100 दिन में कैसे पूरी होगी 'मोदी की गारंटी'
Rajasthan: 25 दिन बीत गए हैं लेकिन नहीं हुआ मंत्रिमंडल का निर्माण, अब 100 दिन में कैसे पूरी होगी 'मोदी की गारंटी'
Rajasthan: राजस्थान में भी मंत्रिमंडल विस्तार होने वाला है। भजनलाल सरकार का एक-दो दिन में मंत्रिमंडल विस्तार होने की उम्मीद जताई जा रही हैइस बार, मंत्रिमंडल गठन की लम्बी कड़ी का सामना कर रहे हैं। 25 दिन बीत गए हैं, लेकिन ताजगी से मंत्रिमंडल का निर्माण अब तक हुआ नहीं है। 45 विभागों की जिम्मेदारी सीएम के पास है, और दो डिप्टी सीएम भी अब तक जिम्मेदारियों में शामिल नहीं हो सके हैं। भाजपा ने विजन पत्र के दौरान 100 दिन में सभी वादों को पूरा करने का वादा किया था, लेकिन ताजगी से 25 दिन बाद भी मंत्रिमंडल तैयार नहीं हो सका है। लोकसभा चुनावों के आस-पास भी इस देरी का असर हो सकता है।
मंत्रिमंडल में देरी ने कांग्रेस को राहत दी है, जिसने कहा है, कि भाजपा ने 100 दिनों में सभी वादों को पूरा करने की गारंटी दी थी, लेकिन इस दौरान तक मंत्रिमंडल का गठन नहीं हुआ है। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि इससे लोकसभा चुनाव में भाजपा को भूना जा सकता है। पार्टी के नेता जनता के सामने उतरकर यह बताएंगे कि भाजपा ने अपने 100 दिन के वादे पूरे नहीं किए हैं।
पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि जनता में निराशा बढ़ रही है, क्योंकि राजस्थान की जनता ने 3 दिसंबर को भाजपा को स्पष्ट जनादेश दिया था, लेकिन अब तक मंत्रिमंडल का गठन नहीं हुआ है। यह स्थिति शासन संचालन में ठहराव की स्थिति बना देती है और जनता देख रही है कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए कौन-कौन से मंत्री उपलब्ध हैं। जल्दी ही मंत्रिमंडल का गठन होना चाहिए ताकि सरकार की कामकाजी स्थिति में सुधार हो सके।
राजभवन में शपथ ग्रहण की तैयारी पूरी है, और मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है। राज्यपाल का 28 दिसंबर को जोधपुर जाने का कार्यक्रम है, और 27 को कोई कार्यक्रम नहीं है। बताया जा रहा है कि लगभग 20 से 22 मंत्री मंत्रिमंडल में शामिल हो सकते हैं,और इसमें कई ओबीसी चेहरे भी हो सकते हैं।
राजस्थान में छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश की तरह इस बार नए चेहरों को मौका मिल सकता है। जिनको कभी मंत्री नहीं बनाया है। हालांकि कुछ वरिष्ठ विधायकों को भी मंत्री बनाया जा सकता है। लोकसभा चुनावों से पहले जातियों और क्षेत्रीय संतुलन को बनाए रखने के लिए विधायकों को मंत्रिमंडल में जोड़ा जाएगा, जिससे पार्टी लोकसभा चुनावों में इसे भुना सके।
राजस्थान में मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 30 मंत्री बन सकते हैं, और पहले चरण में करीब 20 मंत्री बनाए जा सकते हैं, जिनमें 10 कैबिनेट और 10 राज्य मंत्री हो सकते हैं। पांच से सात जगहें खाली रखी जा सकती हैं, जिन्हें लोकसभा चुनावों के बाद भरा जा सकता है।
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