सहरसा में 'शोले स्टाइल' प्रदर्शन: डिग्री कॉलेज की मांग को लेकर मोबाइल टावर पर चढ़े पूर्व मुखिया और वकील, 6 घंटे बाद उतरे; अब FIR दर्ज

सहरसा में 'शोले स्टाइल' प्रदर्शन: डिग्री कॉलेज की मांग को लेकर मोबाइल टावर पर चढ़े पूर्व मुखिया और वकील, 6 घंटे बाद उतरे; अब FIR दर्ज

 बिहार के सहरसा जिले में डिग्री कॉलेज की मांग को लेकर किया गया अनोखा विरोध प्रदर्शन अब कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया है। सत्तरकटैया प्रखंड के मेनहा गांव में राजकीय डिग्री कॉलेज की स्थापना की मांग को लेकर पूर्व मुखिया संजीव कुमार राय और अधिवक्ता अमरेन्द्र यादव मोबाइल टावर पर चढ़ गए। करीब छह घंटे तक चले इस हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद प्रशासन के आश्वासन पर दोनों नीचे उतरे, लेकिन इसके बाद पुलिस ने दोनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली।

पुलिस के अनुसार, दोनों पर सरकारी कार्य में बाधा डालने और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है।

डिग्री कॉलेज की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन

जानकारी के मुताबिक, मेनहा गांव में लंबे समय से राजकीय डिग्री कॉलेज खोलने की मांग को लेकर ग्रामीण आंदोलन कर रहे थे।

ग्रामीणों ने 10 जुलाई से खादीपुर स्थित सामुदायिक चबूतरे पर धरना शुरू किया था। उनका कहना था कि क्षेत्र में उच्च शिक्षा के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं, जिसके कारण छात्रों को दूसरे क्षेत्रों में जाना पड़ता है।

ग्रामीणों की मांग है कि मेनहा गांव में डिग्री कॉलेज की स्थापना की जाए, ताकि आसपास के युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए दूर न जाना पड़े।

अचानक मोबाइल टावर पर चढ़े पूर्व मुखिया और अधिवक्ता

बुधवार को आंदोलन के दौरान पूर्व मुखिया संजीव कुमार राय और अधिवक्ता अमरेन्द्र यादव अचानक खादीपुर स्थित एक मोबाइल टावर पर चढ़ गए।

दोनों ने ऐलान किया कि जब तक प्रशासन की ओर से डिग्री कॉलेज स्थापना को लेकर कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक वे टावर से नीचे नहीं उतरेंगे।

उनके टावर पर चढ़ते ही मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण जमा हो गए। देखते ही देखते पूरा इलाका चर्चा का केंद्र बन गया।

लोगों ने इसे फिल्म 'शोले' के उस दृश्य से जोड़ना शुरू कर दिया, जिसमें विरोध जताने के लिए ऊंचाई पर चढ़ने का नाटकीय तरीका दिखाया गया था।

प्रशासन के पहुंचने से मचा हड़कंप

घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन सक्रिय हो गया। मौके पर जिला शिक्षा पदाधिकारी रोहित रोशन, सदर इंस्पेक्टर शशि कुमार राणा, अंचलाधिकारी शिखा सिंह, बीडीओ शारिक अहमद, बिहरा थाना के अपर थानाध्यक्ष विवेक कुमार, एसआई ज्योति कुमारी सहित पुलिस बल पहुंचा।

अधिकारियों ने टावर पर चढ़े दोनों आंदोलनकारियों से बातचीत शुरू की।

प्रशासन की टीम ने उन्हें समझाने का प्रयास किया और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नीचे उतरने की अपील की।

छह घंटे तक चला हाईवोल्टेज ड्रामा

करीब छह घंटे तक टावर पर प्रदर्शन जारी रहा। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर मौजूद रहे।

प्रशासनिक अधिकारियों ने आंदोलनकारियों और ग्रामीणों को उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल का भरोसा दिया।

आश्वासन मिलने के बाद पूर्व मुखिया और अधिवक्ता सुरक्षित रूप से टावर से नीचे उतर आए।

इसके बाद प्रशासन और पुलिस ने राहत की सांस ली।

आंदोलन के बाद पुलिस ने दर्ज की FIR

टावर से उतरने के बाद मामला शांत हुआ, लेकिन पुलिस ने इस प्रदर्शन को लेकर कार्रवाई शुरू कर दी।

बिहरा थाना में पूर्व मुखिया संजीव कुमार राय और अधिवक्ता अमरेन्द्र यादव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

पुलिस ने दोनों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित करने के आरोप लगाए हैं।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस तरह के प्रदर्शन से सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होती है और किसी भी अप्रिय घटना की आशंका बनी रहती है।

ग्रामीणों की मांग पर क्या बोले अधिकारी?

प्रशासन की ओर से अभी तक डिग्री कॉलेज की स्थापना को लेकर अंतिम निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई है।

हालांकि अधिकारियों ने आंदोलनकारियों को आश्वासन दिया है कि उनकी मांग को संबंधित स्तर पर भेजा जाएगा और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में कॉलेज खुलने से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं को फायदा मिलेगा।

शिक्षा सुविधा को लेकर लंबे समय से मांग

स्थानीय लोगों के अनुसार, सत्तरकटैया क्षेत्र के कई गांवों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूर-दराज के इलाकों में जाना पड़ता है।

विशेषकर छात्राओं के लिए स्थानीय स्तर पर डिग्री कॉलेज नहीं होने से परेशानी बढ़ जाती है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि मेनहा में कॉलेज स्थापित होता है तो आसपास के कई गांवों के युवाओं को बेहतर अवसर मिल सकेंगे।

प्रदर्शन के तरीके पर उठे सवाल

हालांकि, कॉलेज की मांग को लेकर ग्रामीणों की समस्या अपनी जगह है, लेकिन प्रशासन का कहना है कि टावर पर चढ़कर प्रदर्शन करना जोखिम भरा तरीका है।

ऐसी स्थिति में प्रदर्शनकारियों की जान को खतरा रहता है और पुलिस-प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था में अतिरिक्त संसाधन लगाने पड़ते हैं।

अब आगे की कार्रवाई पर नजर

FIR दर्ज होने के बाद अब पुलिस मामले की जांच कर रही है। वहीं ग्रामीणों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है कि डिग्री कॉलेज की मांग को लेकर कोई ठोस कदम उठाया जाता है या नहीं।

फिलहाल सहरसा का यह 'शोले स्टाइल' प्रदर्शन चर्चा में है, जहां शिक्षा की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब कानूनी प्रक्रिया तक पहुंच गया है।