PoK में फिर भड़की हिंसा: रावलकोट में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की फायरिंग में 6 नागरिकों की मौत, व्हाइट हाउस तक पहुंची विरोध की आवाज
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हालात लगातार विस्फोटक बने हुए हैं। मंगलवार को रावलकोट में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई हिंसक झड़प के दौरान गोलीबारी में कम से कम 6 नागरिकों की मौत हो गई। इस घटना ने पहले से उबल रहे जनाक्रोश को और भड़का दिया है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, झड़पें शहर के न्यू बस टर्मिनल और मटियाल मीरा क्षेत्र के आसपास हुईं, जहां पिछले कई सप्ताह से पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा बलों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी हैं।
हालांकि, घटना को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। भारतीय और कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में सुरक्षा बलों की फायरिंग में नागरिकों की मौत की बात कही गई है, जबकि पाकिस्तान के सरकारी पक्ष का दावा है कि प्रतिबंधित संगठन जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के हथियारबंद लोगों ने सुरक्षा बलों पर हमला किया, जिसमें एक रेंजर की भी मौत हुई।
मृतकों में कई स्थानीय नागरिक शामिल
रिपोर्टों के अनुसार, मृतकों में जाहिद मुगल, जफर मुगल, अर्सलान अकबर और वाजिद हयात समेत कई स्थानीय नागरिक शामिल हैं। वाजिद हयात की मौत रावलकोट के मटियाल मीरा बस टर्मिनल के पास हुई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया, जिसके बाद हालात बेकाबू हो गए।
कई सप्ताह से उबाल पर है PoK
PoK में पिछले कई महीनों से राजनीतिक और सामाजिक असंतोष लगातार बढ़ रहा है। बिजली संकट, महंगाई, बेरोजगारी, प्रशासनिक दमन, राजनीतिक अधिकारों की मांग और चुनावी व्यवस्था को लेकर जनता लगातार विरोध प्रदर्शन कर रही है।
जून 2026 से रावलकोट, मुजफ्फराबाद और अन्य इलाकों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए हैं। कई घटनाओं में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक टकराव हुआ, जिनमें दर्जनों लोगों की मौत और सैकड़ों के घायल होने की खबरें सामने आई थीं।
JAAC पर कार्रवाई से और बढ़ा विवाद
पाकिस्तानी प्रशासन ने हाल के दिनों में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर प्रतिबंध लगाने और उसके नेताओं के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। प्रशासन का आरोप है कि संगठन कानून-व्यवस्था बिगाड़ रहा है, जबकि प्रदर्शनकारी इसे नागरिक अधिकारों की लड़ाई बता रहे हैं।
मानवाधिकार संगठनों ने भी विरोध प्रदर्शनों पर सख्त कार्रवाई, इंटरनेट बंदी और बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों को लेकर चिंता जताई है।
व्हाइट हाउस के बाहर भी हुआ प्रदर्शन
इस ताजा हिंसा से एक दिन पहले अमेरिका में रहने वाले पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के लोगों ने व्हाइट हाउस के बाहर प्रदर्शन किया।
करीब 100 प्रदर्शनकारियों—जिनमें महिलाएं, बच्चे और सामुदायिक प्रतिनिधि शामिल थे—ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि नागरिक इलाकों में सैन्य कार्रवाई की जा रही है और आम लोगों के खिलाफ घातक बल का इस्तेमाल हो रहा है।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारियों ने कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं—
नागरिक इलाकों से पाकिस्तानी सेना की वापसी।
निहत्थे नागरिकों पर कथित बल प्रयोग की अंतरराष्ट्रीय जांच।
लंबे समय से जारी इंटरनेट बंदी समाप्त करना।
प्रभावित क्षेत्रों तक मानवीय सहायता पहुंचाने की अनुमति।
नियंत्रण रेखा (LoC) के कुछ मार्ग मानवीय राहत के लिए खोलने की मांग।
भारत का क्या है रुख?
भारत सरकार पहले भी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में जारी विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया दे चुकी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हालिया बयान में कहा था कि PoK में जारी विरोध प्रदर्शन वहां दशकों से चले आ रहे "व्यवस्थित शोषण, लोकतांत्रिक अधिकारों के अभाव और प्रशासनिक दमन" का परिणाम हैं।
पाकिस्तान के सामने बढ़ती चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान पहले से आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और बलूचिस्तान समेत कई क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में PoK में लगातार बढ़ता जनाक्रोश इस्लामाबाद के लिए एक नई चुनौती बनता जा रहा है। हाल के हफ्तों में रावलकोट और आसपास के इलाकों में लगातार विरोध प्रदर्शन, सुरक्षा बलों की तैनाती और इंटरनेट प्रतिबंध जैसी घटनाओं ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
news desk MPcg