चार साल बाद भी फाइलों में कैद 'सक्षम युवा' योजना: अमेठी के गांवों में खेल मैदान और ओपन जिम का इंतजार, ग्रामीण प्रतिभाओं के सपनों पर लगा ब्रेक

चार साल बाद भी फाइलों में कैद 'सक्षम युवा' योजना: अमेठी के गांवों में खेल मैदान और ओपन जिम का इंतजार, ग्रामीण प्रतिभाओं के सपनों पर लगा ब्रेक

उत्तर प्रदेश सरकार की ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई 'सक्षम युवा योजना' अमेठी जिले में अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकी है। वर्ष 2022 के लोक कल्याण संकल्प पत्र में शामिल इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य प्रत्येक ग्राम पंचायत में खेल मैदान और ओपन जिम विकसित कर ग्रामीण युवाओं को आधुनिक खेल सुविधाएं उपलब्ध कराना था। लेकिन योजना शुरू होने के लगभग चार वर्ष बाद भी जिले के अधिकांश गांवों में इसका लाभ धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है।

जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी खिलाड़ी खुले मैदान, खाली खेतों, सड़कों या विद्यालय परिसरों में अभ्यास करने को मजबूर हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शुरुआती स्तर पर खिलाड़ियों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलतीं, तो ग्रामीण प्रतिभाओं का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना कठिन हो जाता है।

क्या है 'सक्षम युवा योजना'?

'सक्षम युवा योजना' उत्तर प्रदेश सरकार की एक ग्रामीण खेल अवसंरचना (Sports Infrastructure) विकसित करने की पहल है। इसका उद्देश्य गांवों में खेल संस्कृति को बढ़ावा देना और युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही अभ्यास के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

योजना के तहत—

प्रत्येक ग्राम पंचायत में खेल मैदान विकसित किए जाने थे।
युवाओं और महिलाओं के लिए ओपन जिम स्थापित किए जाने थे।
निर्माण कार्य मनरेगा (MGNREGA) के माध्यम से कराया जाना था।
खेल मैदानों के लिए भूमि चिन्हित करने की जिम्मेदारी राजस्व विभाग को सौंपी गई थी।
जिला युवा कल्याण विभाग को योजना के समन्वय और निगरानी की जिम्मेदारी दी गई थी।

योजना का उद्देश्य केवल खेल सुविधाएं उपलब्ध कराना ही नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में फिटनेस, स्वास्थ्य और खेल संस्कृति को बढ़ावा देना भी था।

अमेठी में क्या है वर्तमान स्थिति?

अमेठी जिले में योजना की प्रगति अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी है।

स्थानीय प्रशासनिक जानकारी के अनुसार कई ग्राम पंचायतों में—

खेल मैदानों के लिए भूमि का चयन ही नहीं हो पाया।
कई स्थानों पर भूमि विवाद सामने आए।
जहां भूमि उपलब्ध हुई, वहां निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका।
कई गांवों में ओपन जिम लगाने की प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ी।

परिणामस्वरूप हजारों ग्रामीण युवाओं को अब भी आधुनिक खेल सुविधाओं का इंतजार है।

खेल प्रतिभाओं पर पड़ रहा असर

ग्रामीण क्षेत्रों से हर वर्ष एथलेटिक्स, कबड्डी, कुश्ती, हॉकी, वॉलीबॉल और फुटबॉल जैसे खेलों में कई प्रतिभाएं सामने आती हैं।

लेकिन प्रशिक्षित मैदान, रनिंग ट्रैक, फिटनेस उपकरण और नियमित अभ्यास स्थल न होने के कारण अधिकांश खिलाड़ी शुरुआती स्तर पर ही पिछड़ जाते हैं।

स्थानीय खिलाड़ियों का कहना है कि—

बारिश के दौरान अभ्यास पूरी तरह बंद हो जाता है।
मैदान समतल नहीं होने से चोट लगने का खतरा रहता है।
फिटनेस प्रशिक्षण के लिए कोई ओपन जिम उपलब्ध नहीं है।
प्रतियोगिताओं की तैयारी के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है।
शासन के कई निर्देश, लेकिन जमीन पर धीमी प्रगति

उत्तर प्रदेश शासन की ओर से योजना के क्रियान्वयन को लेकर समय-समय पर कई दिशा-निर्देश जारी किए गए।

सरकार ने सभी जिलों से कहा था कि—

चरणबद्ध तरीके से प्रत्येक ग्राम पंचायत में खेल मैदान विकसित किए जाएं।
निर्माण कार्य की नियमित मॉनिटरिंग हो।
प्रत्येक माह की 5 तारीख तक प्रगति रिपोर्ट शासन को भेजी जाए।
जिला स्तर पर समीक्षा बैठक आयोजित की जाए।

इसके बावजूद अमेठी में योजना की गति संतोषजनक नहीं मानी जा रही है।

जिला युवा कल्याण विभाग की क्या भूमिका?

योजना के संचालन की जिम्मेदारी जिला युवा कल्याण विभाग को दी गई है।

इसके अंतर्गत—

खेल मैदानों की प्रगति की समीक्षा।
व्यायाम प्रशिक्षकों के साथ समन्वय।
खेल गतिविधियों को बढ़ावा देना।
खिलाड़ियों की आवश्यकताओं का आकलन।
खेलो इंडिया जैसी योजनाओं के साथ समन्वय।

हालांकि स्थानीय स्तर पर इन व्यवस्थाओं का अपेक्षित प्रभाव अभी तक दिखाई नहीं दे रहा है।

भूमि की कमी बनी सबसे बड़ी चुनौती

योजना के सामने सबसे बड़ी बाधाओं में से एक उपयुक्त सरकारी भूमि की उपलब्धता बताई जा रही है।

कई ग्राम पंचायतों में—

सरकारी भूमि उपलब्ध नहीं है।
उपलब्ध भूमि पर अतिक्रमण है।
कुछ स्थानों पर भूमि विवाद न्यायालयों में लंबित हैं।
राजस्व अभिलेखों में तकनीकी समस्याएं सामने आई हैं।

इन कारणों से कई प्रस्तावित खेल मैदान अभी तक शुरू नहीं हो सके।

खेलो इंडिया अभियान पर भी असर

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ग्राम स्तर पर खेल अवसंरचना विकसित नहीं होगी तो खेलो इंडिया जैसी राष्ट्रीय योजनाओं का पूरा लाभ भी ग्रामीण क्षेत्रों तक नहीं पहुंच पाएगा।

भारत सरकार की खेल नीति का प्रमुख उद्देश्य जमीनी स्तर से खिलाड़ियों की पहचान कर उन्हें आगे बढ़ाना है।

लेकिन पर्याप्त स्थानीय सुविधाओं के अभाव में प्रतिभाओं की पहचान और प्रशिक्षण दोनों प्रभावित होते हैं।

जिला युवा कल्याण अधिकारी ने क्या कहा?

अमेठी के जिला युवा कल्याण अधिकारी मयंक पटेल ने स्वीकार किया कि कुछ स्थानों पर भूमि उपलब्ध न होने के कारण खेल मैदान विकसित नहीं हो सके हैं।

उन्होंने कहा कि—

"जहां भूमि उपलब्ध नहीं है वहां वैकल्पिक व्यवस्था पर काम किया जा रहा है। जिन स्थानों पर खेल मैदान बन चुके हैं, उनका निरीक्षण कर आवश्यक सुविधाएं दुरुस्त कराई जाएंगी ताकि खिलाड़ियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।"

क्यों महत्वपूर्ण है ग्रामीण खेल अवसंरचना?

विशेषज्ञों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में खेल सुविधाएं विकसित होने से—

नई खेल प्रतिभाओं की पहचान होती है।
युवाओं में नशामुक्ति और सकारात्मक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है।
स्वास्थ्य और फिटनेस बेहतर होती है।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए खिलाड़ियों की मजबूत आधारशिला तैयार होती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक भागीदारी और सामुदायिक खेल संस्कृति विकसित होती है।
आगे क्या?

योजना को गति देने के लिए प्रशासन को कई स्तरों पर कार्य करना होगा—

भूमि चिन्हांकन की प्रक्रिया तेज करनी होगी।
लंबित निर्माण कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करना होगा।
नियमित निरीक्षण और मॉनिटरिंग सुनिश्चित करनी होगी।
खेल प्रशिक्षकों की नियुक्ति और प्रशिक्षण गतिविधियां बढ़ानी होंगी।
ओपन जिम और खेल मैदानों का रखरखाव भी सुनिश्चित करना होगा।

यदि इन बिंदुओं पर प्रभावी ढंग से काम किया जाता है, तो 'सक्षम युवा योजना' ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार, स्वास्थ्य और खेल के क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल सकती है।

प्रमुख तथ्य
'सक्षम युवा योजना' उत्तर प्रदेश सरकार की ग्रामीण खेल अवसंरचना विकसित करने की योजना है।
योजना वर्ष 2022 के लोक कल्याण संकल्प पत्र में शामिल की गई थी।
प्रत्येक ग्राम पंचायत में खेल मैदान और ओपन जिम विकसित करने का लक्ष्य रखा गया।
अमेठी के अधिकांश गांवों में चार वर्ष बाद भी योजना का पूर्ण क्रियान्वयन नहीं हो सका।
भूमि की अनुपलब्धता और प्रशासनिक देरी प्रमुख बाधाओं के रूप में सामने आई हैं।
जिला युवा कल्याण विभाग ने लंबित कार्यों में तेजी लाने और बने हुए खेल मैदानों का निरीक्षण कराने की बात कही है।