DU में गोबर विवाद: DUSU अध्यक्ष ने प्रिंसिपल के ऑफिस में लगाया गोबर, VC ने कहा- रिसर्च घर से शुरू करें
दिल्ली यूनिवर्सिटी के लक्ष्मीबाई कॉलेज में प्रिंसिपल द्वारा क्लासरूम में गोबर लगाने के शोध के खिलाफ DUSU अध्यक्ष ने उनके ऑफिस में गोबर लगाकर विरोध किया। कुलपति ने सुझाव दिया कि ऐसे प्रयोग पहले घर पर किए जाएं। छात्रों ने बुनियादी सुविधाओं की कमी पर भी सवाल उठाए।
नई दिल्ली, 16 अप्रैल 2025: दिल्ली यूनिवर्सिटी के लक्ष्मीबाई कॉलेज में क्लासरूम की दीवारों पर गोबर लगाने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब और गहरा गया है। दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (DUSU) के अध्यक्ष रौनक खत्री ने मंगलवार को कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. प्रत्यूष वत्सला के ऑफिस की दीवारों पर गोबर लगाकर विरोध जताया। यह कदम प्रिंसिपल द्वारा क्लासरूम में गोबर लगाने के एक वायरल वीडियो के जवाब में उठाया गया, जिसे उन्होंने शीतलन के लिए एक शोध प्रयोग बताया था।
विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें प्रिंसिपल प्रत्यूष वत्सला क्लासरूम की दीवारों पर गोबर और मिट्टी का मिश्रण लगाती नजर आईं। उन्होंने इसे 'स्वदेशी और टिकाऊ शीतलन तकनीकों' पर आधारित एक शोध परियोजना का हिस्सा बताया, जिसका शीर्षक है 'पारंपरिक भारतीय ज्ञान का उपयोग करके गर्मी तनाव नियंत्रण का अध्ययन'। यह प्रयोग कॉलेज के सी ब्लॉक में पुरानी और अस्थायी संरचनाओं (पोर्टा केबिन) में किया गया, जो गर्मियों में अत्यधिक गर्म हो जाते हैं।
प्रिंसिपल ने दावा किया कि यह मिश्रण कच्चा गोबर नहीं, बल्कि मिट्टी के साथ तैयार किया गया एक यौगिक था। उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रयोग केवल उन कमरों में किया गया जो नियमित रूप से उपयोग नहीं होते। हालांकि, छात्रों और DUSU ने इस कदम की कड़ी आलोचना की और इसे 'अवैज्ञानिक' और 'अनुचित' करार दिया।
DUSU का विरोध
मंगलवार को रौनक खत्री और कुछ छात्रों ने प्रिंसिपल के ऑफिस में प्रवेश किया और उनकी दीवारों पर गोबर लगाकर विरोध दर्ज किया। खत्री ने कहा, "अगर छात्रों को गोबर लगी दीवारों वाले क्लासरूम में पढ़ना पड़ सकता है, तो प्रिंसिपल को भी अपने ऑफिस में ऐसा ही माहौल मिलना चाहिए।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रिंसिपल ने उनके आने की खबर मिलते ही कॉलेज छोड़ दिया था।
खत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस घटना की जानकारी साझा करते हुए तंज कसा, "हमें पूरा विश्वास है कि अब मैडम अपने कमरे से एसी हटवाकर छात्रों को सौंप देंगी और गोबर से ठंडे इस आधुनिक माहौल में कॉलेज चलाएंगी।" उन्होंने यह भी मांग की कि शिक्षा मंत्रालय पोर्टा केबिन क्लासरूम में एयर कंडीशनर लगाए, ताकि छात्रों को बेहतर पढ़ाई का माहौल मिले।
दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुलपति की प्रतिक्रिया
दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पारंपरिक ज्ञान का वैज्ञानिक महत्व हो सकता है, लेकिन ऐसे प्रयोगों को नियंत्रित वातावरण में करना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया, "ऐसे शोध पहले निजी तौर पर या घर पर किए जाएं, ताकि यह हास्य का विषय न बने।" कुलपति ने यह भी जोड़ा कि यदि गोबर से कमरों को ठंडा करने का दावा सही है, तो प्रिंसिपल को सबसे पहले अपने ऑफिस और घर में यह प्रयोग करना चाहिए।
छात्रों की शिकायतें
छात्रों का कहना है कि लक्ष्मीबाई कॉलेज में बुनियादी सुविधाओं की कमी है, जैसे पीने का साफ पानी, स्वच्छ शौचालय, और कार्यशील पंखे। एक छात्र नेता ने कहा, "क्लासरूम में खिड़कियों के शीशे टूटे हैं, मच्छरों की समस्या है, और गर्मी असहनीय है। गोबर लगाने जैसे प्रयोगों के बजाय इन समस्याओं का समाधान करना चाहिए।"
प्रिंसिपल का पक्ष
प्रत्यूष वत्सला ने अपने बचाव में कहा कि यह शोध अभी प्रारंभिक चरण में है और एक सप्ताह बाद इसके परिणाम साझा किए जाएंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वीडियो को उन्होंने स्वयं शिक्षकों के व्हाट्सएप ग्रुप में साझा किया था, ताकि इस प्रयोग के बारे में जानकारी दी जा सके। उन्होंने जोर देकर कहा, "प्राकृतिक मिट्टी को छूने में कोई हानि नहीं है। कुछ लोग बिना पूरी जानकारी के गलत सूचना फैला रहे हैं।"
संभावित कानूनी कार्रवाई
रौनक खत्री ने घोषणा की है कि वह इस मामले में प्रिंसिपल के खिलाफ FIR दर्ज करेंगे और इसे उच्च न्यायालय तक ले जाएंगे। उनका दावा है कि बिना छात्रों की सहमति के क्लासरूम में गोबर लगाना नियमों का उल्लंघन है।
news desk MPcg