सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 पर केंद्र को जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 और वक्फ अधिनियम 1995 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि ये कानून संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21, 25, 26, 27 का उल्लंघन करते हैं और भेदभावपूर्ण हैं, क्योंकि केवल मुसलमानों के लिए धार्मिक संपत्ति प्रबंधन का कानून है। कोर्ट ने याचिका को 1995 के अधिनियम को चुनौती देने वाली अन्य लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ा।
वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 को लेकर मंगलवार को फिर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने संशोधित वक्फ अधिनियम 1995 के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया है। इसके साथ इस याचिका को 1995 के वक्फ अधिनियम को चुनौती देने वाली लंबित याचिकाओं से जोड़ दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की खंडपीठ ने ये नोटिस सरकार को दिया। पीठ निखिल उपाध्याय द्वारा 1995 अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान सीजेआई गवई ने याचिकाकर्ता के वकील अश्विनी उपाध्याय से पूछा कि 1995 अधिनियम को अब क्यों चुनौती दी जा रही है। इस पर वकील ने कहा कि हम 2013 के संशोधन को भी चुनौती दे रहे हैं। इसके बाद सीजेआई ने कहा कि इसमें भी 12 साल हो गए। हम देरी की वजह से केस खारिज कर देंगे।
इसका जवाब देते हुए वकील उपाध्याय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले से ही 2020-21 में पूजा स्थल अधिनियम 1991 और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम 1992 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। बता दें कि याचिकाकर्ता ने वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 द्वारा संशोधित वक्फ अधिनियम 1995 की कई धाराओं की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि ये प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21, 25, 26, 27 के विरुद्ध हैं। याचिकाकर्ता ने ये भी तर्क दिया कि केवल मुसलमानों के पास ही उनकी धार्मिक संपत्तियों को संभालने से संबंधित कानून है और अन्य धर्मों के पास ऐसा कोई कानून नहीं है। इसलिए यह तर्क दिया गया कि वक्फ अधिनियम 1995 भेदभावपूर्ण था।
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