हिमाचल हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, आरक्षण का लाभ लेकर नहीं ले सकेंगे सामान्य वर्ग की सीट
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया और आरक्षण व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जो अभ्यर्थी प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण का लाभ लेकर आगे बढ़ता है, वह बाद में सामान्य वर्ग (General Category) की सीट पर दावा नहीं कर सकता, भले ही अंतिम मेरिट में उसके अंक सामान्य वर्ग के कटऑफ से अधिक हों।
2015 HAS परीक्षा की मेरिट सूची पर असर
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बी.सी. नेगी की खंडपीठ ने हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग (HPPSC) को वर्ष 2015 की हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा (HAS) परीक्षा की मेरिट सूची दोबारा निर्धारित करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि यदि नई मेरिट सूची में अपीलकर्ता पात्र पाए जाते हैं, तो उन्हें संबंधित पद पर नियुक्ति दी जाए।
क्या था पूरा मामला
वर्ष 2013 में हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग ने HAS और संबद्ध सेवाओं के लिए भर्ती विज्ञापन जारी किया था। अंतिम परिणाम 2015 में घोषित हुआ।
आरोप था कि आयोग ने आरक्षित वर्ग के कुछ अभ्यर्थियों को सामान्य वर्ग की सीटों पर समायोजित कर दिया, क्योंकि उन्होंने मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार में सामान्य वर्ग के लिए निर्धारित न्यूनतम अंकों से अधिक अंक हासिल किए थे। इसी निर्णय को चुनौती देते हुए प्रतिभा चौहान और मोहित गुप्ता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
कोर्ट ने क्या कहा
हाई कोर्ट ने माना कि यदि किसी उम्मीदवार ने प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण का लाभ प्राप्त किया है, तो वह भर्ती प्रक्रिया के अंतिम चरण में सामान्य वर्ग की सीट का दावा नहीं कर सकता। ऐसा करना समान अवसर और आरक्षण व्यवस्था के मूल उद्देश्य के विपरीत होगा।
पहले से नियुक्त कर्मचारियों को राहत
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस फैसले का असर उन कर्मचारियों पर नहीं पड़ेगा जो पहले से नियुक्त होकर सेवाएं दे रहे हैं। यानी पहले से कार्यरत अधिकारियों को उनके पदों से नहीं हटाया जाएगा।
भर्ती प्रक्रिया के लिए मिसाल बनेगा फैसला
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य की भर्ती प्रक्रियाओं में एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल बनेगा। इससे आरक्षण और सामान्य वर्ग की सीटों के निर्धारण को लेकर स्पष्टता आएगी तथा चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता मजबूत होगी।
युवाओं के बीच बढ़ी चर्चा
फैसले के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के बीच इस विषय पर चर्चा तेज हो गई है। कई उम्मीदवार इसे आरक्षण नियमों की स्पष्ट व्याख्या मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे भर्ती प्रक्रिया में बड़े बदलाव के रूप में देख रहे हैं।
news desk MPcg