भारतीय परिवारों पर बढ़ता कर्ज, जीडीपी के 41.3% तक पहुंची घरेलू उधारी

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इंदौर।
भारतीय परिवारों पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। आसान लोन उपलब्धता और बढ़ते लाइफस्टाइल खर्चों के चलते लोग बड़ी संख्या में कर्ज ले रहे हैं। पर्सनल लोन अब मोबाइल पर एक क्लिक में मिल रहा है, जबकि नौकरीपेशा लोगों को बैंक प्री-अप्रूव्ड पर्सनल और कार लोन के ऑफर दे रहे हैं। इसका असर यह हुआ है कि मार्च 2025 के अंत तक घरेलू कर्ज बढ़कर देश की जीडीपी के 41.3 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो पांच साल के औसत 38.3 प्रतिशत से काफी अधिक है और बीते तीन वर्षों से लगातार बढ़ रहा है।

आरबीआई की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट के अनुसार, परिवारों के कर्ज में वृद्धि का बड़ा कारण खपत से जुड़ा कर्ज है। भारतीय परिवार संपत्ति निर्माण के बजाय दैनिक जरूरतों और उपभोग के लिए ज्यादा कर्ज ले रहे हैं। कुल घरेलू उधारी में पर्सनल लोन, ऑटो लोन और क्रेडिट कार्ड कर्ज की हिस्सेदारी 55.3 प्रतिशत हो गई है, जो वर्ष 2020 में 43 प्रतिशत थी। खपत आधारित कर्ज की वृद्धि दर होम लोन, कृषि और बिजनेस लोन से तेज है।

कुल कर्ज में होम लोन की हिस्सेदारी 28.6 प्रतिशत और कृषि व व्यवसाय से जुड़े कर्ज की हिस्सेदारी 16.1 प्रतिशत है। हालांकि कर्ज बढ़ने के साथ राहत की बात यह है कि परिवारों की वित्तीय बचत में भी सुधार देखा गया है। वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में घरेलू वित्तीय बचत बढ़कर जीडीपी के 7.6 प्रतिशत तक पहुंच गई है। महंगाई में कुछ नरमी आने से लोगों की बचत क्षमता बेहतर हुई है और घरेलू सकल वित्तीय बचत बढ़कर 11.2 प्रतिशत दर्ज की गई है।