झारखंड के कृषि बाजार बनेंगे हाईटेक मॉडल, शिबू सोरेन की स्मृति में राज्यभर में खुलेंगे आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र, किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
झारखंड के कृषि बाजार बनेंगे हाईटेक मॉडल, शिबू सोरेन की स्मृति में खुलेगा आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र, किसानों की आय बढ़ाने और कृषि विपणन व्यवस्था को मजबूत करने की बड़ी योजना तैयार
झारखंड राज्य कृषि विपणन पर्षद ने राज्य की सभी बाजार समितियों को आधुनिक हाईटेक मॉडल बाजार के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य राज्य की कृषि विपणन व्यवस्था को मजबूत करना, किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और उनकी आय में बढ़ोतरी सुनिश्चित करना है।
रांची में आयोजित झारखंड राज्य कृषि विपणन पर्षद के नवनिर्मित निदेशक मंडल की पहली बैठक में यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। बैठक की अध्यक्षता पर्षद के अध्यक्ष रवींद्र सिंह ने की, जबकि प्रबंध निदेशक अजय कुमार साव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में राज्य के कृषि ढांचे को आधुनिक बनाने और बाजार समितियों को डिजिटल एवं पारदर्शी प्रणाली से जोड़ने पर विस्तार से चर्चा हुई।
योजना के तहत राज्य के सभी कृषि बाजारों में आधारभूत ढांचे को मजबूत किया जाएगा। इसमें सड़कों का निर्माण, स्वच्छ और आधुनिक शौचालयों की व्यवस्था, प्रशासनिक भवनों का विकास और अन्य आवश्यक सुविधाओं का विस्तार शामिल है। इसके साथ ही जर्जर और खाली पड़ी जमीनों का उपयोग कर वहां जी-2 श्रेणी की दुकानों का निर्माण किया जाएगा। इन विकास कार्यों के लिए नाबार्ड से वित्तीय सहायता लेने की योजना भी बनाई गई है।
किसानों की आय बढ़ाने के लिए राज्य की सभी बाजार समितियों को ई-नाम (इलेक्ट्रॉनिक नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट) प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। इससे किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य मिलेगा, पारदर्शिता बढ़ेगी और बिचौलियों की भूमिका कम होगी। डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से किसानों को सीधे खरीदारों से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा।
इसके अलावा, बैठक में एक और बड़ा निर्णय लिया गया है कि राज्य के सभी पांच प्रमंडलों में दिशोम गुरु शिबू सोरेन की स्मृति में आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों का उद्देश्य किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों को आधुनिक कृषि तकनीकों, विपणन रणनीतियों और प्रबंधन कौशल का प्रशिक्षण देना होगा। इससे ग्रामीण युवाओं और किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने में मदद मिलेगी।
अधिकारियों का मानना है कि इन सभी योजनाओं के लागू होने से झारखंड की कृषि विपणन प्रणाली में व्यापक सुधार होगा। इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था भी मजबूत और आत्मनिर्भर बनेगी।
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