ग्रेटर नोएडा के K-ब्लॉक में जलभराव से उद्योग प्रभावित, उद्यमियों ने यूपीसीडा के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी

ग्रेटर नोएडा के K-ब्लॉक में जलभराव से उद्योग प्रभावित, उद्यमियों ने यूपीसीडा के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी

उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) के औद्योगिक क्षेत्र साइट-5 स्थित K-ब्लॉक में बुनियादी सुविधाओं की बदहाली को लेकर उद्यमियों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। हाल ही में हुई बारिश के बाद पूरे क्षेत्र में जलभराव और जाम नालियों की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है, जिससे उद्योगों का संचालन और कामगारों का आवागमन प्रभावित हो रहा है।

उद्यमियों का आरोप है कि वर्षों से नालियों की समुचित सफाई नहीं कराई गई, जिसके कारण मामूली बारिश के बाद भी सड़कें और फैक्ट्री परिसरों के आसपास गंदा पानी भर जाता है। स्थिति यह है कि कई जगहों पर फैक्ट्रियों के मुख्य प्रवेश द्वार तक बदबूदार पानी जमा है, जिससे कर्मचारियों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

गंदे पानी से बढ़ा बीमारी का खतरा

स्थानीय उद्यमियों के अनुसार, जलभराव के कारण मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। इससे डेंगू, मलेरिया और त्वचा संबंधी बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। कई कामगार पहले ही स्वास्थ्य समस्याओं की शिकायत कर चुके हैं।

उद्यमी अनमोल का कहना है कि पूरे K-ब्लॉक की अधिकांश नालियां जाम हैं। बारिश होते ही नालियां ओवरफ्लो हो जाती हैं और गंदा पानी सड़कों पर फैल जाता है। उनका आरोप है कि लंबे समय से सफाई कार्य नहीं कराया गया है, जिससे समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है।

कामगारों और वाहन चालकों को हो रही परेशानी

जलभराव के कारण फैक्ट्रियों में काम करने वाले कर्मचारियों को रोजाना गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। कई स्थानों पर दोपहिया वाहन फिसलने की घटनाएं भी सामने आई हैं। पैदल चलने वालों के लिए भी सड़क पर चलना मुश्किल हो गया है।

उद्यमियों का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र में ऐसी स्थिति निवेश और उत्पादन दोनों पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आने वाले मानसून में हालात और बिगड़ सकते हैं।

शिकायतों के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई

K-ब्लॉक के उद्यमी राहुल ने बताया कि इस संबंध में कई बार यूपीसीडा अधिकारियों को लिखित और मौखिक शिकायतें दी जा चुकी हैं। हर बार आश्वासन तो मिलता है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं देती।

उनका कहना है कि नालियों की नियमित सफाई के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था मौजूद नहीं है, जिसके कारण समस्या हर साल और गंभीर रूप ले लेती है।

उद्योग संगठनों ने दी आंदोलन की चेतावनी

उद्यमी राजेश खन्ना के अनुसार, कई वर्षों से नालियों की सफाई नहीं हुई है। हाल की हल्की बारिश ने ही पूरे क्षेत्र की व्यवस्था की पोल खोल दी है। मानसून के दौरान स्थिति और खराब होने की आशंका है।

इंडस्ट्रियल बिजनेस एसोसिएशन (IBA) के अध्यक्ष अमित उपाध्याय ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही जलनिकासी और सफाई व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो उद्यमी आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये का निवेश करने वाले उद्योगों को बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

यूपीसीडा ने जांच का दिया आश्वासन

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए यूपीसीडा ग्रेटर नोएडा के क्षेत्रीय प्रबंधक अनिल शर्मा ने कहा कि उन्हें अभी तक इस संबंध में कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। हालांकि उन्होंने आश्वासन दिया कि K-ब्लॉक की स्थिति की जांच कराकर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि प्राधिकरण का उद्देश्य औद्योगिक क्षेत्रों को स्वच्छ रखना और उद्यमियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। जांच रिपोर्ट के आधार पर जल्द कार्रवाई की जाएगी।

मानसून से पहले समाधान की मांग

उद्यमियों का कहना है कि मानसून की शुरुआत से पहले यदि नालियों की सफाई और जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया तो औद्योगिक क्षेत्र में बड़े स्तर पर जलभराव की स्थिति बन सकती है। ऐसे में उद्योगों के संचालन, कर्मचारियों की सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।