मंत्री बंगले पर ट्रांसफर ‘डील’ का स्टिंग SDO के 15 लाख, नर्स के 5 लाख तक की मांग, ऑन-कैमरा बयान से मचा हड़कंप
मध्य प्रदेश में हालिया तबादला प्रक्रिया एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। आरोप है कि सरकारी ट्रांसफर सिस्टम में पैसों की लेन-देन वाली एक संगठित व्यवस्था काम कर रही थी, जिसमें मंत्रियों के बंगले से लेकर वल्लभ भवन तक के नाम सामने आए हैं। एक स्टिंग ऑपरेशन में सामने आए कथित वीडियो और बातचीत ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, स्टिंग में मंत्री के बंगले पर तैनात स्टाफ सदस्य, वल्लभ भवन का एक बाबू और ऊर्जा विकास निगम का एक कर्मचारी ट्रांसफर के बदले पैसे की मांग और डील तय करते हुए नजर आते हैं। आरोप है कि अलग-अलग पदों के ट्रांसफर के लिए अलग-अलग रेट तय किए गए थे। एसडीओ स्तर के ट्रांसफर के लिए लगभग 15 लाख रुपये तक की मांग की बात सामने आई है, जबकि नर्स के ट्रांसफर के लिए करीब 5 लाख रुपये तक की डील का दावा किया गया है।
स्टिंग में सामने आए कथित संवाद में एक बाबू का बयान सबसे ज्यादा चर्चा में है, जिसमें वह कहता है—“मंत्री बगैर कुछ नहीं होगा।” इस कथन ने पूरे ट्रांसफर सिस्टम की पारदर्शिता और प्रशासनिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो सामने आने के बाद यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर संवेदनशील बन गया है।
सूत्रों के अनुसार, ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर इस तरह की अनौपचारिक ‘रेट लिस्ट’ और बिचौलियों की भूमिका पहले भी कई बार सवालों के घेरे में रही है, लेकिन इस बार स्टिंग में सामने आए सीधे संवाद और कथित फिक्स रेट ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
हालांकि, इस पूरे मामले पर अभी तक संबंधित मंत्री, विभागीय अधिकारियों या सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। वीडियो की सत्यता और उसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच की मांग तेज हो गई है।
प्रशासनिक हलकों में इस स्टिंग के बाद सतर्कता बढ़ा दी गई है और संभावना जताई जा रही है कि उच्च स्तर पर जांच के आदेश दिए जा सकते हैं। वहीं विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर हो सकता है।
फिलहाल, पूरा मामला जांच और पुष्टि के दायरे में है, लेकिन सामने आए आरोपों ने एक बार फिर मध्य प्रदेश के ट्रांसफर सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
news desk MPcg