पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पांचवीं पुण्यतिथि पर हिमाचल ने किया नमन, शिमला में श्रद्धांजलि सभा; विक्रमादित्य सिंह बोले- 'उनका विकास मॉडल आज भी प्रदेश की सबसे बड़ी प्रेरणा'

पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पांचवीं पुण्यतिथि पर हिमाचल ने किया नमन, शिमला में श्रद्धांजलि सभा; विक्रमादित्य सिंह बोले- 'उनका विकास मॉडल आज भी प्रदेश की सबसे बड़ी प्रेरणा'

 हिमाचल प्रदेश के छह बार मुख्यमंत्री रहे वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय राजा वीरभद्र सिंह की पांचवीं पुण्यतिथि पर बुधवार को पूरे प्रदेश में उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया। राजधानी शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर नेताओं, जनप्रतिनिधियों, पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश सरकार में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह, जो स्वर्गीय वीरभद्र सिंह के पुत्र भी हैं, ने अपने पिता के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका विकास मॉडल आज भी हिमाचल प्रदेश के लिए मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के संतुलित विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की जो सोच राजा वीरभद्र सिंह ने दी थी, उसी दिशा में वर्तमान सरकार आगे बढ़ रही है।

रिज मैदान में हुआ श्रद्धांजलि कार्यक्रम

पांचवीं पुण्यतिथि के अवसर पर शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कांग्रेस नेताओं, जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की प्रतिमा पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि देने वालों में—

लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह
शिमला के मेयर सुरेंद्र चौहान
विधायक हरीश जनारथा
कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता
विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि
बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और आम नागरिक

शामिल रहे।

कार्यक्रम के दौरान दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई और उनके सार्वजनिक जीवन तथा राजनीतिक योगदान को याद किया गया।

"पूरा हिमाचल आज भी उन्हें याद करता है"

श्रद्धांजलि कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि आज पूरा हिमाचल प्रदेश अपने लोकप्रिय नेता और पूर्व मुख्यमंत्री को श्रद्धापूर्वक याद कर रहा है।

उन्होंने कहा कि कुछ ही दिन पहले उनकी जयंती भी पूरे प्रदेश में मनाई गई थी और अब उनकी पुण्यतिथि पर फिर से उनके दिखाए विकास के रास्ते पर आगे बढ़ने का संकल्प दोहराया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह केवल एक राजनीतिक नेता नहीं थे, बल्कि हिमाचल प्रदेश के विकास की पहचान थे।

विकास को बताया सबसे बड़ी विरासत

विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि उनके पिता का सपना केवल सरकार चलाना नहीं था, बल्कि प्रदेश के हर क्षेत्र और समाज के हर वर्ग तक विकास पहुंचाना था।

उन्होंने कहा कि—

गांव-गांव सड़क पहुंचाने,
पेयजल योजनाओं का विस्तार,
सिंचाई सुविधाओं को मजबूत करने,
सरकारी विद्यालयों के विकास,
उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थापना,
इंजीनियरिंग कॉलेज,
मेडिकल कॉलेज,
पशु चिकित्सालय,
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं

के विस्तार में स्वर्गीय वीरभद्र सिंह का योगदान ऐतिहासिक रहा है।

उनके अनुसार आज हिमाचल प्रदेश के जिस आधुनिक बुनियादी ढांचे को लोग देखते हैं, उसमें वीरभद्र सिंह की दूरदर्शी नीतियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में योगदान को किया याद

विक्रमादित्य सिंह ने विशेष रूप से स्वास्थ्य क्षेत्र में उनके योगदान का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि—

इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC), शिमला के विस्तार,
डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज, टांडा की स्थापना,
जिला अस्पतालों के सुदृढ़ीकरण,
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार

जैसे कई बड़े निर्णयों ने लाखों लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराईं।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा को मजबूत करना हमेशा वीरभद्र सिंह की प्राथमिकता रही।

शिक्षा और तकनीकी संस्थानों पर दिया विशेष जोर

विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि उनके पिता का मानना था कि किसी भी राज्य का भविष्य शिक्षा पर निर्भर करता है।

इसी सोच के तहत—

नए विद्यालय खोले गए,
कॉलेजों का विस्तार हुआ,
तकनीकी संस्थानों की स्थापना हुई,
व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा मिला,
युवाओं के लिए नए अवसर तैयार किए गए।

उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार भी इसी सोच को आगे बढ़ा रही है।

"अधूरे सपनों को पूरा करना हमारी जिम्मेदारी"

विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि वर्तमान सरकार का उद्देश्य स्वर्गीय वीरभद्र सिंह के अधूरे विकास कार्यों और सपनों को पूरा करना है।

उन्होंने कहा कि सरकार—

मेडिकल संस्थानों को और मजबूत करेगी।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार जारी रखेगी।
सड़क और पुल निर्माण को गति देगी।
तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देगी।
आत्मनिर्भर हिमाचल के लक्ष्य की दिशा में कार्य करेगी।

उन्होंने कहा कि यही उनके पिता को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

दलगत राजनीति से ऊपर उठकर किया काम

अपने संबोधन में विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि वीरभद्र सिंह ने हमेशा दलगत राजनीति से ऊपर उठकर प्रदेश के हित में निर्णय लिए।

उन्होंने कहा कि उनका मानना था कि विकास का लाभ हर क्षेत्र और हर वर्ग तक समान रूप से पहुंचना चाहिए।

इसी सोच के कारण वे लंबे समय तक जनता के बीच लोकप्रिय रहे और प्रदेश की राजनीति में उनका विशेष स्थान बना रहा।

कौन थे वीरभद्र सिंह?

राजा वीरभद्र सिंह हिमाचल प्रदेश की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं।

उनका राजनीतिक जीवन कई दशकों तक सक्रिय रहा।

उन्होंने—

छह बार हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया।
कई बार लोकसभा का प्रतिनिधित्व किया।
केंद्र सरकार में भी मंत्री रहे।
कांग्रेस संगठन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

उनके कार्यकाल में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, ग्रामीण विकास और पर्यटन के क्षेत्र में अनेक योजनाएं शुरू की गईं, जिनका लाभ आज भी प्रदेश को मिल रहा है।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी दी श्रद्धांजलि

प्रदेश के विभिन्न जिलों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए।

कई स्थानों पर—

रक्तदान शिविर,
पौधारोपण,
सर्वधर्म प्रार्थना सभाएं,
श्रद्धांजलि सभाएं

आयोजित कर स्वर्गीय वीरभद्र सिंह को याद किया गया।

विकास की विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प

श्रद्धांजलि कार्यक्रम के अंत में नेताओं और कार्यकर्ताओं ने यह संकल्प दोहराया कि स्वर्गीय वीरभद्र सिंह द्वारा शुरू किए गए विकास कार्यों और जनकल्याण की सोच को आगे बढ़ाया जाएगा।

वक्ताओं ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के विकास, सामाजिक समरसता और जनसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।