उमर अब्दुल्ला कैबिनेट विस्तार की तैयारी तेज: मानसून सत्र से पहले मंत्रिमंडल में फेरबदल के संकेत, तीन नए चेहरों की एंट्री संभव
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सरकार में जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार और संभावित फेरबदल होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री द्वारा हाल ही में सार्वजनिक रूप से यह संकेत दिए जाने के बाद कि मंत्रिमंडल का विस्तार संसद के मानसून सत्र से पहले या उसके दौरान किया जा सकता है, राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के कई विधायक मंत्री पद के लिए सक्रिय लॉबिंग कर रहे हैं, जबकि क्षेत्रीय, सामाजिक और राजनीतिक संतुलन को लेकर भी व्यापक मंथन जारी है। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक किसी नाम या तारीख की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
मुख्यमंत्री ने दिए विस्तार के संकेत
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अक्टूबर 2024 में सरकार बनने के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया संसद के मानसून सत्र शुरू होने से पहले अथवा सत्र के दौरान किसी भी समय पूरी की जा सकती है। राजनीतिक सूत्रों का मानना है कि जुलाई 2026 के अंतिम सप्ताह तक इस संबंध में निर्णय लिया जा सकता है।
वर्तमान मंत्रिमंडल में तीन पद अब भी रिक्त
जम्मू-कश्मीर में वर्तमान मंत्रिपरिषद की निर्धारित संख्या के अनुसार अभी भी तीन कैबिनेट पद खाली हैं। फिलहाल मुख्यमंत्री सहित कुल छह मंत्री कार्यरत हैं। यदि मौजूदा मंत्रियों में कोई बदलाव नहीं किया जाता, तो केवल इन तीन रिक्त पदों पर नए मंत्रियों की नियुक्ति होगी। वहीं राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि मुख्यमंत्री केवल विस्तार तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि कुछ विभागों में फेरबदल और कुछ मंत्रियों की जिम्मेदारियों में बदलाव भी संभव है।
मंत्री पद के लिए लॉबिंग तेज
मुख्यमंत्री के संकेत के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के कई वरिष्ठ और युवा विधायक मंत्री बनने की दौड़ में सक्रिय हो गए हैं। पार्टी के भीतर ऐसे विधायक भी दावेदारी कर रहे हैं जो कई बार विधानसभा का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और पूर्व में मंत्री भी रह चुके हैं। दूसरी ओर पहली या दूसरी बार विधायक बने कुछ युवा नेता भी क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, संगठन में सक्रिय भूमिका और राजनीतिक संतुलन के आधार पर अपनी दावेदारी मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार सरकार को समर्थन दे रहे कुछ निर्दलीय विधायक भी मंत्रिमंडल में स्थान मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री के सामने अनुभव, संगठन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और राजनीतिक संदेश—सभी पहलुओं को संतुलित रखने की चुनौती होगी।
शिया समुदाय को प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना
मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सबसे अधिक चर्चा शिया समुदाय के प्रतिनिधित्व को लेकर हो रही है। वर्तमान मंत्रिमंडल में कोई भी शिया मंत्री नहीं है, जबकि जम्मू-कश्मीर की पूर्ववर्ती सरकारों में इस समुदाय को प्रतिनिधित्व मिलता रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शिया समुदाय को मंत्रिमंडल में शामिल करना केवल सामाजिक संतुलन का मुद्दा नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण राजनीतिक रणनीति भी हो सकती है। इससे सरकार शिया बहुल क्षेत्रों में अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने का प्रयास कर सकती है।
सूत्रों के अनुसार श्रीनगर के जदीबल विधानसभा क्षेत्र से विधायक तनवीर सादिक संभावित दावेदारों में शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि उनके नाम को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कांग्रेस के रुख से बनी राजनीतिक स्थिति
नेशनल कॉन्फ्रेंस की सहयोगी कांग्रेस ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि जब तक जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल नहीं किया जाता, तब तक वह सरकार में शामिल नहीं होगी। विधानसभा में कांग्रेस के छह विधायक हैं, लेकिन उसके इस रुख के कारण मंत्रिमंडल विस्तार की पूरी जिम्मेदारी लगभग नेशनल कॉन्फ्रेंस और उसके समर्थक विधायकों पर ही केंद्रित होती दिखाई दे रही है।
यदि कांग्रेस अपने फैसले पर कायम रहती है, तो रिक्त मंत्री पदों पर केवल एनसी या समर्थक विधायकों को ही अवसर मिलने की संभावना है।
राजनीतिक संतुलन साधना होगी सबसे बड़ी चुनौती
विश्लेषकों का मानना है कि मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को कई स्तरों पर संतुलन बनाना होगा। जम्मू और कश्मीर क्षेत्र के बीच प्रतिनिधित्व, विभिन्न सामाजिक और धार्मिक समुदायों की भागीदारी, वरिष्ठ एवं युवा नेताओं के बीच संतुलन, सहयोगी दलों की अपेक्षाएं तथा भविष्य की राजनीतिक रणनीति—इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को प्राथमिकता देती है तो मंत्रिमंडल विस्तार केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रहेगा, बल्कि आगामी राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित करेगा।
मानसून सत्र से पहले बढ़ सकती है राजनीतिक गतिविधियां
संसद के मानसून सत्र से पहले यदि मंत्रिमंडल विस्तार होता है तो सरकार संगठन और प्रशासन दोनों स्तरों पर नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने का संदेश देने की कोशिश करेगी। दूसरी ओर यदि फेरबदल भी किया जाता है तो इससे सरकार के प्रदर्शन, विभागीय जवाबदेही और राजनीतिक प्राथमिकताओं को लेकर भी स्पष्ट संकेत मिल सकते हैं।
फिलहाल मुख्यमंत्री कार्यालय या सरकार की ओर से विस्तार की तिथि, संभावित मंत्रियों के नाम या फेरबदल के स्वरूप को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए वर्तमान में सामने आ रही सभी संभावित नामों और राजनीतिक चर्चाओं को सूत्रों एवं राजनीतिक अटकलों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
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