सीतापुर में 13 बीघा अवैध प्लॉटिंग पर चला बुलडोजर: बिना लेआउट स्वीकृति के हो रहा था विकास कार्य, 10 करोड़ रुपये की जमीन पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में अवैध प्लॉटिंग और अनधिकृत कॉलोनियों के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मिरदही टोला स्थित लगभग 13 बीघा भूमि पर विकसित की जा रही कथित अवैध प्लॉटिंग को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया। प्रशासन के अनुसार, संबंधित भूमि पर बिना लेआउट (मानचित्र) स्वीकृत कराए प्लॉट काटने और विकास कार्य किए जा रहे थे। कार्रवाई के दौरान प्लॉटिंग के लिए बनाई गई सड़कें, ईंटों की सीमांकन संरचनाएं और अन्य निर्माण कार्यों को तोड़ दिया गया।
प्रशासन का कहना है कि संबंधित भूमि की अनुमानित बाजार कीमत करीब 10 करोड़ रुपये है। इस कार्रवाई के बाद जिले में अवैध प्लॉटिंग करने वाले अन्य कारोबारियों में भी हड़कंप मच गया है।
शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, मिरदही टोला स्थित भूमि पर बिना नियमानुसार स्वीकृति लिए प्लॉटिंग किए जाने की शिकायत मिली थी। मामला विनियमित क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण तहसील प्रशासन और विनियमित क्षेत्र (रेगुलेटेड एरिया) की टीम ने मौके का निरीक्षण किया।
जांच के दौरान यह पाया गया कि संबंधित भूमि पर लेआउट और मानचित्र की वैधानिक स्वीकृति प्राप्त किए बिना प्लॉट काटे जा रहे थे तथा कॉलोनी विकसित करने के लिए प्रारंभिक निर्माण कार्य भी किए जा चुके थे। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई का निर्णय लिया गया।
नगर मजिस्ट्रेट के निर्देश पर चला बुलडोजर
जांच में अनियमितता की पुष्टि होने के बाद नगर मजिस्ट्रेट मीनाक्षी पांडेय के निर्देश पर प्रशासन, विनियमित क्षेत्र की टीम और राजस्व विभाग के अधिकारियों ने संयुक्त अभियान चलाया।
कार्रवाई के दौरान बुलडोजर की मदद से प्लॉटों के सीमांकन के लिए लगाई गई ईंटें, आंतरिक आरसीसी सड़कें, मिट्टी भराव और अन्य विकास कार्यों को ध्वस्त कर दिया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नियमानुसार स्वीकृति के बिना किसी भी प्रकार की कॉलोनी विकसित नहीं की जा सकती।
भारी पुलिस बल की मौजूदगी में हुई कार्रवाई
कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न न हो, इसके लिए मौके पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस ने पहले पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में लिया और उसके बाद प्रशासनिक टीम ने बुलडोजर की कार्रवाई शुरू कराई।
पूरे अभियान के दौरान अधिकारियों ने स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखी ताकि किसी प्रकार का विरोध या अव्यवस्था उत्पन्न न हो।
करोड़ों रुपये की जमीन पर चल रही थी प्लॉटिंग
प्रशासन के अनुसार, जिस भूमि पर कार्रवाई की गई उसकी अनुमानित बाजार कीमत लगभग 10 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। यह क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहे इलाकों में शामिल है, जहां पिछले कुछ समय से बड़े पैमाने पर प्लॉटिंग की गतिविधियां बढ़ी हैं।
अधिकारियों का कहना है कि भूमि का व्यावसायिक उपयोग करने से पहले नियमानुसार लेआउट स्वीकृत कराना, सड़क, जल निकासी, सीवर, पार्क और अन्य मूलभूत सुविधाओं की योजना तैयार करना अनिवार्य होता है। इन नियमों का पालन किए बिना प्लॉटिंग करना अवैध माना जाता है।
अन्य अवैध कॉलोनियों पर भी प्रशासन की नजर
प्रशासनिक कार्रवाई के बाद शहर और उसके आसपास प्लॉटिंग का कारोबार करने वाले अन्य लोगों में भी चिंता का माहौल है। जानकारी के अनुसार, कांशीराम कॉलोनी से लेकर खैराबाद क्षेत्र तक कई स्थानों पर प्लॉटिंग की जा रही है, जिनमें से अनेक परियोजनाओं के लेआउट और मानचित्र स्वीकृत नहीं बताए जा रहे हैं।
अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि ऐसे मामलों की भी जांच की जाएगी और जहां भी नियमों का उल्लंघन मिलेगा, वहां इसी प्रकार की कार्रवाई की जा सकती है।
अवर अभियंता ने क्या कहा?
विनियमित क्षेत्र के अवर अभियंता एम.के. मिश्र के अनुसार, संबंधित भूमि का मालिकाना अधिकार किसी अन्य व्यक्ति के नाम दर्ज है, जबकि प्लॉट काटकर बेचने का कार्य पप्पू जायसवाल और विकास चतुर्वेदी द्वारा किए जाने की शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत के आधार पर जांच कराई गई, जिसमें बिना स्वीकृत मानचित्र के प्लॉटिंग की पुष्टि होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की गई।
उन्होंने बताया कि प्रशासन अवैध प्लॉटिंग और अनधिकृत कॉलोनियों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रखेगा।
अवैध प्लॉटिंग पर प्रशासन का सख्त संदेश
प्रशासन का कहना है कि बिना वैधानिक स्वीकृति के कॉलोनियां विकसित करने से भविष्य में खरीदारों को सड़क, सीवर, बिजली, जल निकासी और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़ी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए ऐसे मामलों में समय रहते कार्रवाई करना आवश्यक है।
अधिकारियों ने नागरिकों से भी अपील की है कि किसी भी प्लॉट या कॉलोनी में निवेश करने से पहले संबंधित लेआउट, मानचित्र और वैधानिक अनुमतियों की जांच अवश्य करें।
मुख्य बिंदु
सीतापुर के मिरदही टोला में 13 बीघा भूमि पर हो रही कथित अवैध प्लॉटिंग पर प्रशासन की कार्रवाई।
बिना लेआउट और मानचित्र स्वीकृति के विकसित की जा रही थी कॉलोनी।
बुलडोजर चलाकर प्लॉटों की सीमांकन दीवारें, आरसीसी सड़कें और अन्य निर्माण कार्य ध्वस्त।
संबंधित भूमि की अनुमानित कीमत करीब 10 करोड़ रुपये बताई गई।
नगर मजिस्ट्रेट के निर्देश पर विनियमित क्षेत्र, राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई।
अभियान के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा।
अवर अभियंता एम.के. मिश्र के अनुसार शिकायत के बाद जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि हुई।
प्रशासन ने अन्य अवैध प्लॉटिंग परियोजनाओं की भी जांच के संकेत दिए।
नागरिकों से वैधानिक स्वीकृति की जांच के बाद ही प्लॉट खरीदने की अपील।
news desk MPcg