देशभर में मानसून का कहर: सूरत में 85 साल का बारिश का रिकॉर्ड टूटा, जबलपुर में पांच मंजिला इमारत ढही, दिल्ली-जयपुर हाईवे धंसा; कई राज्यों में बाढ़ और भूस्खलन से जनजीवन प्रभावित
देश के कई राज्यों में मानसून ने विकराल रूप धारण कर लिया है। गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश और केरल समेत कई राज्यों में लगातार हो रही भारी बारिश ने सामान्य जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। कहीं बाढ़ जैसे हालात हैं तो कहीं भूस्खलन, इमारत ढहने और सड़क धंसने की घटनाएं सामने आ रही हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने कई राज्यों में अगले कुछ दिनों तक भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में गुजरात का सूरत शहर शामिल है, जहां महज 36 घंटों में 18 इंच बारिश दर्ज की गई। यह जुलाई महीने में वर्ष 1941 के बाद सबसे अधिक बारिश बताई जा रही है। दूसरी ओर मध्य प्रदेश के जबलपुर में पांच मंजिला इमारत ढह गई, जबकि दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-48) का एक हिस्सा धंसने से कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया। कई राज्यों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं और राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी हैं।
सूरत में टूटा 85 साल पुराना बारिश का रिकॉर्ड
गुजरात के सूरत में लगातार हुई मूसलाधार बारिश ने पिछले कई दशकों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। शहर में 36 घंटे के भीतर करीब 18 इंच बारिश दर्ज की गई, जिसे जुलाई महीने का लगभग 85 वर्षों का सबसे बड़ा रिकॉर्ड माना जा रहा है।
लगातार बारिश के कारण शहर के अधिकांश इलाके जलमग्न हो गए। कई रिहायशी कॉलोनियों, बाजारों और व्यावसायिक परिसरों में कमर तक पानी भर गया। एक बड़े शॉपिंग मॉल की निचली मंजिल पूरी तरह पानी में डूब गई, जबकि कई स्थानों पर कारें तेज बहाव में बहती दिखाई दीं।
बारिश से जुड़े हादसों में करंट लगने, पेड़ गिरने और बिजली गिरने जैसी घटनाओं में 9 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित इलाकों से 3,400 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। सूरत और आसपास के नवसारी जिले में स्कूल, कॉलेज और आंगनवाड़ी केंद्र अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। प्रशासन ने नागरिकों से केवल अत्यंत आवश्यक होने पर ही घरों से बाहर निकलने की अपील की है।
मध्य प्रदेश में भी बारिश का कहर, जबलपुर में पांच मंजिला इमारत गिरी
मध्य प्रदेश में भी लगातार बारिश ने कई जिलों में गंभीर स्थिति पैदा कर दी है। जबलपुर में मंगलवार शाम एक पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। घटना के बाद प्रशासन और राहत दल मौके पर पहुंचे तथा आसपास के क्षेत्र को खाली कराया गया। इमारत गिरने के कारणों की जांच की जा रही है।
इसके अलावा पन्ना, छतरपुर, खंडवा और अन्य जिलों में नदियां उफान पर हैं। कई गांवों का संपर्क टूट गया है और कई सड़कों पर पानी भर जाने से यातायात प्रभावित हुआ है। मौसम विभाग ने इंदौर, उज्जैन सहित प्रदेश के 28 जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।
दिल्ली-जयपुर हाईवे धंसा, गुरुग्राम में लगा 10 किलोमीटर लंबा जाम
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में भी बारिश ने यातायात व्यवस्था को प्रभावित किया है। दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-48) का एक हिस्सा धंस जाने से वाहनों की लंबी कतार लग गई। गुरुग्राम में कई स्थानों पर दो-दो फीट तक पानी भर गया, जिससे लगभग 10 किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया।
एक स्कूल बस भी जलभराव वाले नाले में फंस गई, जिसे बाद में सुरक्षित बाहर निकाला गया। गुरुग्राम पुलिस ने निजी कंपनियों से अगले कुछ दिनों तक कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा देने की अपील की है ताकि सड़कों पर दबाव कम किया जा सके।
महाराष्ट्र में बारिश से रेल और सड़क यातायात प्रभावित
महाराष्ट्र में लगातार बारिश के कारण मुंबई और पालघर सहित कई जिलों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। वसई-विरार और दक्षिण गुजरात क्षेत्र में जलभराव के चलते 39 ट्रेनें रद्द करनी पड़ीं, जबकि कई अन्य ट्रेनों का समय बदला गया।
मुंबई की लोकल ट्रेनें भी लगभग 25 से 30 मिनट की देरी से संचालित हो रही हैं। तुलसी और विहार झील ओवरफ्लो हो चुकी हैं। पालघर जिले में भारी बारिश से अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रशासन ने 389 परिवारों के 1,261 लोगों को राहत शिविरों में स्थानांतरित किया है।
अरुणाचल प्रदेश में बाढ़ और भूस्खलन से हजारों लोग प्रभावित
अरुणाचल प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के कारण बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति बनी हुई है। राज्य के 26 जिलों के लगभग 94 हजार लोग इस आपदा से प्रभावित बताए जा रहे हैं।
अब तक चार लोगों की मौत, 21 लोगों के घायल होने तथा दो महिलाओं के लापता होने की सूचना है। लोअर सियांग जिले के 14 गांव पिछले करीब 10 दिनों से देश के बाकी हिस्सों से कटे हुए हैं क्योंकि सड़क संपर्क पूरी तरह बाधित हो चुका है।
केरल के वायनाड में जारी है रेस्क्यू ऑपरेशन
केरल के वायनाड जिले में टनल निर्माण स्थल पर हुए भूस्खलन के बाद राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। हादसे में अब तक तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
एनडीआरएफ, पुलिस, अग्निशमन विभाग और अन्य एजेंसियां मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं।
राजस्थान, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में भी भारी बारिश का असर
राजस्थान के कई जिलों में भारी बारिश के कारण जलभराव की स्थिति बनी हुई है। धौलपुर, अजमेर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा और बूंदी सहित कई जिलों में 1 से 3 इंच तक बारिश दर्ज की गई। चित्तौड़गढ़ में बिजली गिरने से एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि जालोर में नदी पार करते समय एक जीप पलट गई।
उत्तराखंड में गंगोत्री हाईवे पर भूस्खलन के कारण यातायात बाधित है। पूरे राज्य में 32 सड़कें बंद हैं और मौसम विभाग ने सभी जिलों के लिए बारिश का अलर्ट जारी किया है।
उत्तर प्रदेश में भी 68 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी है। मथुरा में एक डिलीवरी बॉय तेज बहाव में नाले में बहने लगा, जिसे स्थानीय लोगों ने समय रहते बचा लिया।
रेल और हवाई सेवाओं पर भी असर
लगातार खराब मौसम का असर रेल और हवाई यातायात पर भी दिखाई दे रहा है। पश्चिम रेलवे ने गुजरात में ट्रैक पर जलभराव के कारण कई मेमू ट्रेनों को रद्द कर दिया है। वहीं दिल्ली और मुंबई में खराब मौसम के चलते कई उड़ानें विलंबित हुई हैं। एयरलाइंस ने यात्रियों से एयरपोर्ट पहुंचने से पहले फ्लाइट की स्थिति जांचने की सलाह दी है।
मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने आने वाले दिनों में भी देश के कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश की संभावना जताई है। पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, असम, मेघालय, झारखंड, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश सहित कई राज्यों के लिए रेड, ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किए गए हैं।
मौसम विभाग ने लोगों से नदी, नालों, जलभराव वाले क्षेत्रों और भूस्खलन संभावित इलाकों से दूर रहने, प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने तथा अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।
जलवायु परिवर्तन से बदल रहा मानसून का स्वरूप
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब कम समय में अत्यधिक वर्षा (Extreme Rainfall Events) की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे अचानक बाढ़, शहरी जलभराव और भूस्खलन जैसी आपदाओं का खतरा पहले की तुलना में अधिक हो गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले वर्षों में ऐसी घटनाओं की आवृत्ति बढ़ सकती है, इसलिए शहरी जल निकासी व्यवस्था, आपदा प्रबंधन और पूर्व चेतावनी प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है।
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