यूपी में रिटायर्ड ARTO के घर विजिलेंस का अब तक का बड़ा एक्शन: 26 घंटे चली छापेमारी में 13 किलो सोना, 9 किलो चांदी, ₹1.62 करोड़ नकद और 35 करोड़ की संपत्ति का खुलासा
उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामलों के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच विजिलेंस (उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान) ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों की जांच के तहत आगरा में तैनात रह चुके और वर्तमान में सेवानिवृत्त सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (ARTO) ललित कुमार के लखनऊ स्थित आवास पर की गई छापेमारी में भारी मात्रा में नकदी, सोना-चांदी, हीरे के आभूषण, करोड़ों रुपये की अचल संपत्तियों के दस्तावेज तथा विभिन्न वित्तीय निवेशों के रिकॉर्ड बरामद हुए हैं।
करीब 26 घंटे तक चली इस कार्रवाई में विजिलेंस टीम ने जो सामग्री जब्त की है, उसका प्रारंभिक मूल्यांकन लगभग 35 करोड़ रुपये बताया गया है। अधिकारियों के अनुसार यह आंकड़ा शुरुआती जांच पर आधारित है और संपत्तियों के विस्तृत मूल्यांकन के बाद इसमें बदलाव संभव है। फिलहाल सभी बरामद दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड, निवेश, नकदी और बहुमूल्य धातुओं की वैधानिक जांच जारी है।
कोर्ट के आदेश के बाद हुई कार्रवाई
विजिलेंस अधिकारियों ने बताया कि ललित कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला पहले से दर्ज था। विवेचना के दौरान पर्याप्त प्राथमिक साक्ष्य मिलने के बाद अदालत से तलाशी वारंट प्राप्त किया गया।
इसके बाद 7 जुलाई की दोपहर विजिलेंस की विशेष टीम लखनऊ के अलीगंज स्थित चंद्रलोक कॉलोनी में उनके आवास पहुंची। तलाशी अभियान लगातार अगले दिन तक जारी रहा और लगभग 26 घंटे बाद समाप्त हुआ। कार्रवाई के दौरान घर के हर कमरे, स्टोर, लॉकर, अलमारी, दीवारों के भीतर बने हिस्सों और अन्य संभावित स्थानों की गहन जांच की गई।
पैकेटों और दीवारों में छिपाकर रखी गई थी करोड़ों की नकदी
जांच अधिकारियों के अनुसार तलाशी के दौरान सबसे पहले बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई। टीम को घर के अलग-अलग हिस्सों, पैकेटों और छिपे हुए स्थानों से करीब 1 करोड़ 62 लाख रुपये नकद मिले।
बताया गया कि नकदी को सामान्य स्थानों पर न रखकर इस तरह छिपाया गया था कि पहली नजर में उसका पता लगाना आसान न हो। विजिलेंस ने पूरी नकदी को जब्त कर उसकी गिनती, वीडियोग्राफी और दस्तावेजीकरण कराया।
13 किलो सोना, 9 किलो चांदी और हीरे के आभूषण ने चौंकाया
तलाशी के दौरान विजिलेंस टीम को बड़ी मात्रा में सोने के बिस्किट, सोने के आभूषण, हीरे के गहने और चांदी भी मिली।
सरकार से मान्यता प्राप्त मूल्यांकनकर्ता (Valuer) द्वारा किए गए प्रारंभिक परीक्षण में लगभग 13 किलोग्राम सोना तथा 9 किलोग्राम चांदी बरामद होने की पुष्टि हुई है। इनकी अनुमानित बाजार कीमत करीब 20 करोड़ रुपये बताई गई है।
अधिकारियों के अनुसार प्रत्येक आभूषण, बिस्किट और बहुमूल्य वस्तु का अलग-अलग रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इनकी खरीद के लिए वैध स्रोत और कर संबंधी दस्तावेज उपलब्ध हैं या नहीं।
कई जिलों में फैली करोड़ों की अचल संपत्तियां
छापेमारी के दौरान केवल नकदी और आभूषण ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में संपत्ति से जुड़े दस्तावेज भी बरामद हुए।
प्रारंभिक जांच में लखनऊ के अलीगंज, वृंदावन योजना, इस्माइलगंज, मोहनलालगंज, बालागंज सहित कई इलाकों में मकानों, प्लॉटों और कृषि भूमि के दस्तावेज मिले हैं।
इसके अलावा—
नोएडा में दो फ्लैटों की बुकिंग,
बाराबंकी में कृषि भूमि,
रायबरेली में जमीन,
अन्य स्थानों पर निवेश संबंधी दस्तावेज
भी बरामद हुए हैं।
इन अचल संपत्तियों का प्रारंभिक मूल्य लगभग 13 करोड़ रुपये आंका गया है। हालांकि वास्तविक बाजार मूल्य इससे अधिक भी हो सकता है, जिसकी जांच की जा रही है।
बैंक निवेश, FD और म्यूचुअल फंड की भी होगी जांच
विजिलेंस टीम को तलाशी के दौरान कई बैंक खातों, पोस्ट ऑफिस योजनाओं, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय निवेशों से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इन निवेशों की राशि एक करोड़ रुपये से अधिक है। अब जांच एजेंसियां इन निवेशों के स्रोत, लेन-देन और संबंधित खातों की विस्तृत पड़ताल करेंगी।
लग्जरी जीवनशैली के भी मिले प्रमाण
अधिकारियों के अनुसार घर में महंगे फर्नीचर, लक्जरी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, महंगी साज-सज्जा और उच्च मूल्य के घरेलू सामान भी मिले हैं।
इसके अलावा तलाशी के दौरान टोयोटा इनोवा, हुंडई i20, एक लाइसेंसी रिवॉल्वर तथा अन्य बहुमूल्य वस्तुओं का भी रिकॉर्ड तैयार किया गया है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि इन संपत्तियों की खरीद के लिए धन कहां से आया और क्या इनका विवरण सरकारी अभिलेखों में दर्ज है।
कब और कैसे शुरू हुई जांच?
विजिलेंस विभाग के अनुसार ललित कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत कई वर्ष पहले प्राप्त हुई थी।
जब वे परिवहन विभाग में अधिकारी के रूप में कार्यरत थे, उस दौरान उनकी संपत्ति में असामान्य वृद्धि की शिकायतें सामने आई थीं। शिकायतों के आधार पर सक्षम प्राधिकारी से अनुमति मिलने के बाद सतर्कता विभाग ने उनकी आय, खर्च और संपत्तियों की विस्तृत जांच शुरू की।
जांच में बैंक खातों, आयकर रिकॉर्ड, सेवा अभिलेख, निवेश और संपत्तियों का तुलनात्मक विश्लेषण किया गया।
आय से 73.6 प्रतिशत अधिक खर्च का दावा
विजिलेंस जांच के अनुसार ललित कुमार की वैध आय लगभग 93.26 लाख रुपये थी।
जबकि चल एवं अचल संपत्तियों की खरीद, रखरखाव, निवेश और अन्य खर्चों पर कुल करीब 1.61 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
इस प्रकार उनकी घोषित आय की तुलना में लगभग 68.66 लाख रुपये, यानी 73.6 प्रतिशत अधिक व्यय पाया गया।
जांच एजेंसी का कहना है कि इस अतिरिक्त संपत्ति और खर्च के संबंध में कोई संतोषजनक एवं वैध स्पष्टीकरण उपलब्ध नहीं कराया जा सका। इसी आधार पर उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया।
डिजिटल और वित्तीय रिकॉर्ड की भी होगी फोरेंसिक जांच
विजिलेंस अधिकारियों ने बताया कि बरामद दस्तावेजों के अलावा डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग लेन-देन, निवेश पोर्टफोलियो, संपत्ति खरीद-बिक्री के दस्तावेज और अन्य वित्तीय साक्ष्यों की भी गहन जांच की जाएगी।
यदि जांच के दौरान बेनामी संपत्ति, हवाला लेन-देन, फर्जी निवेश या अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी है। आय से अधिक संपत्ति के मामलों में इस तरह की विस्तृत जांच सरकारी तंत्र में पारदर्शिता बढ़ाने और अवैध संपत्ति अर्जित करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संदेश देती है।
फिलहाल विजिलेंस विभाग सभी बरामद नकदी, आभूषण, निवेश और अचल संपत्तियों का सत्यापन कर रहा है। जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की जाएगी और आवश्यकतानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
news desk MPcg