जबलपुर में मियावाकी तकनीक से 11 लाख पौधों का महाअभियान शुरू: CM मोहन यादव ने किया शुभारंभ, जल संरक्षण पर दिया जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर देशभर में चलाए जा रहे व्यापक पौधारोपण अभियान के तहत मध्य प्रदेश के जबलपुर में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया। डुमना नेचर पार्क में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मियावाकी तकनीक से 100 एकड़ क्षेत्र में 11 लाख पौधे लगाने के महाअभियान का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने इस पहल को बढ़ते पर्यावरणीय संकट के बीच हरित क्षेत्र बढ़ाने और जैव विविधता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास बताया।
डुमना नेचर पार्क में तैयार होगा घना वन क्षेत्र
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मियावाकी पद्धति आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक है, जिसके माध्यम से कम समय में घने जंगल विकसित किए जा सकते हैं। जापान में विकसित इस तकनीक का उपयोग अब भारत में भी तेजी से किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि पारंपरिक तरीके से जहां एक एकड़ भूमि में सीमित संख्या में पौधे लगाए जाते हैं, वहीं मियावाकी तकनीक की मदद से उसी क्षेत्र में हजारों पौधे लगाए जा सकते हैं। इस तकनीक में स्थानीय प्रजातियों के पौधों को एक साथ सघन रूप से लगाया जाता है, जिससे पौधों की वृद्धि तेजी से होती है और कुछ वर्षों में जंगल जैसा वातावरण तैयार होने लगता है।
सीएम ने कहा कि मियावाकी पद्धति से तैयार होने वाले वन क्षेत्र न केवल पर्यावरण को बेहतर बनाते हैं, बल्कि पक्षियों, छोटे जीव-जंतुओं और अन्य वन्य प्रजातियों के लिए प्राकृतिक आवास भी उपलब्ध कराते हैं।
100 एकड़ क्षेत्र में 11 लाख पौधों का लक्ष्य
जबलपुर के डुमना नेचर पार्क में शुरू किए गए इस अभियान के तहत 100 एकड़ भूमि पर 11 लाख पौधे लगाए जाएंगे। इस परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने के साथ-साथ शहर के पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करना है।
प्रशासन के अनुसार, इस अभियान में विभिन्न स्थानीय प्रजातियों के पौधों को शामिल किया जा रहा है, ताकि विकसित होने वाला वन क्षेत्र स्थानीय जलवायु और पारिस्थितिकी के अनुकूल रहे।
जल संरक्षण के लिए ‘कैच द रेन’ अभियान पर जोर
पौधारोपण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण से जुड़े कार्यों का भी शुभारंभ किया। उन्होंने डुमना क्षेत्र में ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत बोरवेल रिचार्ज संरचना का उद्घाटन किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए जल संरक्षण आज सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। उन्होंने रेन वाटर हार्वेस्टिंग, बोरवेल रिचार्ज और वाटर पिट निर्माण जैसे उपायों को बढ़ावा देने की बात कही।
डॉ. यादव ने अल नीनो प्रभाव और भविष्य में संभावित जल संकट का उल्लेख करते हुए कहा कि बारिश के पानी को संरक्षित करना और भू-जल स्तर को बढ़ाना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि यदि अभी से जल संरक्षण के प्रयास तेज किए जाएं तो आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकती है।
पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास का संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों को साथ लेकर चलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पौधारोपण केवल पेड़ लगाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि लगाए गए पौधों की देखभाल और संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और जल संरक्षण के प्रयासों में भागीदारी करने की अपील की।
दतिया उपचुनाव को लेकर CM ने जताया भरोसा
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आगामी दतिया उपचुनाव को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी पूरी तैयारी और एकजुटता के साथ चुनाव मैदान में है।
सीएम ने दावा किया कि पार्टी कार्यकर्ता पूरी ताकत के साथ चुनावी अभियान में जुटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि जनता का समर्थन भाजपा के साथ है और चुनाव परिणाम आने के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम
जबलपुर में शुरू हुआ यह पौधारोपण अभियान प्रदेश में हरित क्षेत्र बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। मियावाकी तकनीक के माध्यम से कम समय में घने वन तैयार करने की योजना पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार शहरी क्षेत्रों में बढ़ते प्रदूषण और तापमान नियंत्रण में मददगार साबित हो सकती है।
डुमना नेचर पार्क में शुरू हुआ यह अभियान आने वाले वर्षों में जबलपुर के पर्यावरणीय स्वरूप को बदलने की क्षमता रखता है। प्रशासन का लक्ष्य है कि पौधों के संरक्षण और नियमित देखरेख के जरिए इस क्षेत्र को एक मजबूत प्राकृतिक वन क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाए।
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