अमेरिकी सीनेट में ईरान पर सैन्य कार्रवाई सीमित करने वाला प्रस्ताव गिरा, 49-50 वोट से हार; राष्ट्रपति की युद्ध शक्तियों पर बहस तेज

अमेरिकी सीनेट में ईरान पर सैन्य कार्रवाई सीमित करने वाला प्रस्ताव गिरा, 49-50 वोट से हार; राष्ट्रपति की युद्ध शक्तियों पर बहस तेज

अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी सीनेट में राष्ट्रपति की युद्ध संबंधी शक्तियों को सीमित करने की कोशिश फिलहाल सफल नहीं हो सकी। गुरुवार को अमेरिकी सीनेट में पेश किया गया वह प्रस्ताव, जिसके तहत ईरान के खिलाफ किसी भी नए सैन्य अभियान से पहले कांग्रेस (संसद) की मंजूरी अनिवार्य बनाने की मांग की गई थी, 49-50 वोटों से खारिज हो गया। इस मतदान में पेन्सिलवेनिया से रिपब्लिकन सीनेटर डेव मैककॉर्मिक ने हिस्सा नहीं लिया।

इस नतीजे के साथ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लिए ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर तत्काल कोई नई संवैधानिक बाध्यता लागू नहीं हुई। हालांकि, विपक्षी सांसदों और कुछ संवैधानिक विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध जैसे गंभीर फैसलों पर कांग्रेस की भूमिका सुनिश्चित की जानी चाहिए।

क्या था प्रस्ताव?

सीनेट में पेश किए गए इस प्रस्ताव का उद्देश्य 1973 के War Powers Resolution के तहत राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों को सीमित करना था। प्रस्ताव में कहा गया था कि यदि अमेरिका ईरान के खिलाफ कोई नया सैन्य अभियान शुरू करना चाहता है, तो उसके लिए पहले कांग्रेस की स्पष्ट मंजूरी आवश्यक होगी, सिवाय उन परिस्थितियों के जहां अमेरिका पर सीधा हमला हुआ हो या तत्काल आत्मरक्षा की आवश्यकता हो।

यह प्रस्ताव राष्ट्रपति के हालिया सैन्य अभियानों के बाद लाया गया था। विपक्षी सांसदों का तर्क है कि संविधान के अनुसार युद्ध घोषित करने का अधिकार कांग्रेस के पास है और किसी भी बड़े सैन्य अभियान पर संसद की सहमति जरूरी होनी चाहिए।

49-50 के अंतर से प्रस्ताव क्यों गिरा?

मतदान के दौरान अधिकांश रिपब्लिकन सांसदों ने प्रस्ताव का विरोध किया, जबकि डेमोक्रेटिक सांसदों ने इसका समर्थन किया। अंतिम परिणाम में प्रस्ताव को 49 वोट समर्थन और 50 वोट विरोध मिले, जिससे यह पारित नहीं हो सका।

रिपब्लिकन सीनेटर डेव मैककॉर्मिक मतदान में अनुपस्थित रहे। यदि प्रस्ताव पारित हो जाता, तो इसे आगे की संसदीय प्रक्रिया के लिए बढ़ाया जाता और राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों पर व्यापक बहस होती। अब समर्थकों को इसे दोबारा लाने के लिए नई संसदीय प्रक्रिया अपनानी होगी।

ट्रम्प प्रशासन का क्या रुख है?

ट्रम्प प्रशासन का कहना है कि राष्ट्रपति के पास अमेरिकी सैनिकों, नागरिकों और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए आवश्यक सैन्य कार्रवाई करने का संवैधानिक अधिकार है। प्रशासन का तर्क है कि कई बार हालात इतने तेजी से बदलते हैं कि कांग्रेस की पूर्व मंजूरी का इंतजार करना व्यावहारिक नहीं होता।

वहीं, विपक्ष का कहना है कि लंबे समय तक चलने वाले या बड़े सैन्य अभियानों पर कांग्रेस की निगरानी लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

पिछले 24 घंटों में पश्चिम एशिया से जुड़े प्रमुख घटनाक्रम

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बीच क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण घटनाएं सामने आई हैं। इनमें कुछ दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।

1. अमेरिका के बड़े हवाई हमले

अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान ईरान के कई इलाकों में हमले किए जाने की खबरें सामने आई हैं। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार दक्षिणी ईरान के रणनीतिक क्षेत्रों में विस्फोटों की सूचना मिली है। हालांकि, नुकसान का आधिकारिक और स्वतंत्र आकलन अभी जारी है।

2. ईरान का जवाबी दावा

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। ईरानी मीडिया के अनुसार कुवैत स्थित अहमद अल-जाबेर एयरबेस पर ड्रोन हमले किए गए। हालांकि, अमेरिकी या कुवैती अधिकारियों ने इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है।

3. होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ी चिंता

ईरानी अधिकारियों ने एक बार फिर संकेत दिया है कि होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री यातायात प्रभावित हो सकता है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय शिपिंग एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

4. कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव

बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड और WTI क्रूड दोनों में गिरावट दर्ज की गई, हालांकि पूरे जुलाई महीने में वैश्विक तेल कीमतों में उल्लेखनीय तेजी बनी रही। विश्लेषकों का कहना है कि यदि संघर्ष और बढ़ता है तो ऊर्जा बाजार पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।

5. गैस संकट की आशंका

ईरान सरकार ने आशंका जताई है कि आगामी सर्दियों में देश को प्रतिदिन लगभग 100 मिलियन क्यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस की कमी का सामना करना पड़ सकता है। अधिकारियों के अनुसार हालिया हमलों में ऊर्जा अवसंरचना को नुकसान पहुंचने से स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। ईरान दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस भंडार वाले देशों में शामिल है, लेकिन सर्दियों में घरेलू मांग बढ़ने के कारण उसे पहले भी गैस संकट झेलना पड़ा है।

लेबनान में भी बढ़ा तनाव

इस बीच इजराइल और लेबनान सीमा पर भी तनाव जारी है। लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में रातभर विस्फोट और गोलाबारी हुई। स्थानीय प्रशासन ने कुछ आवासीय इलाकों में नुकसान की जानकारी दी है। इजराइली सेना ने सीमा क्षेत्र में सुरक्षा अभियानों की पुष्टि की है, हालांकि विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।

वैश्विक चिंता बढ़ी

संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय देशों और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सैन्य टकराव और बढ़ता है, तो इसका असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वित्तीय बाजारों पर भी पड़ सकता है।