नेपाल में सांप्रदायिक हिंसा के बाद बढ़ा तनाव, सुनसरी और सिराहा में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू; भारत सीमा पर हाई अलर्ट

नेपाल में सांप्रदायिक हिंसा के बाद बढ़ा तनाव, सुनसरी और सिराहा में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू; भारत सीमा पर हाई अलर्ट

नेपाल के दक्षिणी हिस्से में सांप्रदायिक तनाव अब गंभीर सुरक्षा चुनौती में बदलता दिखाई दे रहा है। सुनसरी जिले के देवांगंज-कप्तानगंज इलाके में धार्मिक आयोजनों के दौरान शुरू हुआ विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। घटना के बाद प्रशासन ने कई इलाकों में कर्फ्यू और निषेधाज्ञा लागू कर दी है। अब तनाव के फैलने की आशंका को देखते हुए पड़ोसी सिराहा जिले में भी गुरुवार, 30 जुलाई को दोपहर 2 बजे से अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू कर दिया गया है। दोनों जिले भारत के बिहार से सटे हुए हैं।

वहीं, भारत की ओर भी सीमा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है। बिहार के अररिया जिले में नेपाल सीमा से लगे इलाकों में SSB और बिहार पुलिस को अलर्ट मोड पर रखा गया है। सीमा क्षेत्र में संयुक्त फ्लैग मार्च और निगरानी बढ़ाई गई है।

हिंसा में अब तक दो लोगों की मौत

सुनसरी के देवांगज ग्रामीण नगरपालिका-3 के कप्तानगंज में हुई हिंसा में शुरुआत में एक युवक की मौत हुई थी। सुरक्षा बलों की फायरिंग में ओम प्रकाश मेहता की मौत की पुष्टि हुई थी। घटना में कई नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई थी।

लेकिन 30 जुलाई को मामले में एक और दुखद मोड़ आया। गोली लगने से गंभीर रूप से घायल 21 वर्षीय जय प्रकाश मेहता ने विराटनगर के न्यूरो कार्डियोलॉजी अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। अस्पताल के मुताबिक उनकी मौत गुरुवार दोपहर 1:24 बजे हुई। इसके साथ ही सुनसरी हिंसा में मरने वालों की संख्या दो हो गई है।

आखिर विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

पूरे विवाद की शुरुआत 26 जुलाई की रात सुनसरी जिले के देवांगज ग्रामीण नगरपालिका के कप्तानगंज इलाके में हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, सावन महीने में होने वाली बोल बम यात्रा के लिए श्रद्धालु कोशी बैराज की ओर से पवित्र जल लेकर जा रहे थे। यात्रा के दौरान तेज आवाज में डीजे और लाउडस्पीकर बजाए जा रहे थे।

इसी दौरान दूसरे समुदाय के कुछ लोगों ने तेज आवाज में संगीत बजाए जाने पर आपत्ति जताई। शुरुआत में मामला बहस तक सीमित था, लेकिन देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की और मारपीट शुरू हो गई। बाद में बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए और स्थिति हिंसक हो गई।

भीड़ के पास लाठी, डंडे और लोहे की छड़ें

स्थिति बिगड़ने के बाद दोनों पक्षों से बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंचे। पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों ने भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की। रिपोर्टों के मुताबिक, हिंसा के दौरान लाठी, पत्थर, बांस और लोहे की छड़ों जैसी चीजों का इस्तेमाल किया गया।

हालात इतने बिगड़ गए कि सुरक्षा बलों को गोली चलानी पड़ी। इसी कार्रवाई के दौरान ओम प्रकाश मेहता को गोली लगी और उनकी मौत हो गई। घटना में कई अन्य लोग घायल हुए। नेपाल सरकार ने बाद में पूरे मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय जांच समिति भी गठित की।

24 लोग हुए थे घायल

सुनसरी हिंसा के शुरुआती चरण में कुल 24 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। इनमें नौ आम नागरिक, नेपाल पुलिस के 10 जवान और सशस्त्र पुलिस बल यानी APF के पांच जवान शामिल बताए गए थे।

हिंसा के बाद नेपाल सरकार ने स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा तंत्र में भी बदलाव किया। सुनसरी के प्रमुख प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को हटाकर नए अधिकारियों की तैनाती की गई। इसके साथ ही नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और APF को संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया।

सुनसरी में कहां-कहां प्रतिबंध?

सुनसरी में तनाव को देखते हुए कई इलाकों में कर्फ्यू और निषेधाज्ञा लागू की गई। प्रभावित क्षेत्रों में इनरुवा, दुहबी, भोक्राहा नरसिंह, कोशी, गढ़ी, देवांगज, हरिनगर और बरजू जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

इसके अलावा इटहरी उपमहानगरपालिका के वार्ड 16 और 17 तथा रामधुनी नगरपालिका के कुछ हिस्सों में भी हाईवे के आसपास प्रतिबंध लागू किए गए हैं। प्रशासन का उद्देश्य भीड़, जुलूस और संभावित हिंसक गतिविधियों को रोकना है।

अब सिराहा में भी अनिश्चितकालीन कर्फ्यू

सुनसरी के बाद अब सिराहा में भी स्थिति को लेकर प्रशासन सतर्क हो गया है। सिराहा जिला प्रशासन ने 30 जुलाई को दोपहर 2 बजे से अगले आदेश तक कर्फ्यू लागू किया है।

कर्फ्यू का क्षेत्र गोलबाजार नगरपालिका-3 के कसाहा खोला से लेकर पश्चिम में चोहर्वा चौक तक फैला है। उत्तर में सैनिक चौक और दक्षिण में रामप्रताप रामप्रसाद तमांग जनता मल्टीपल कैंपस के आसपास तक इसका दायरा बताया गया है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कर्फ्यू का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

भारत-नेपाल सीमा पर क्यों बढ़ाई गई चौकसी?

सुनसरी नेपाल के उस हिस्से में है जो भारत के बिहार से सटा हुआ है। हिंसा के बाद सीमा के भारतीय हिस्से में भी सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। अररिया जिले के नेपाल सीमा से लगे इलाकों में SSB और बिहार पुलिस की संयुक्त निगरानी और फ्लैग मार्च की जानकारी सामने आई है।

सीमा क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाने का मकसद किसी भी संभावित तनाव, भीड़ की आवाजाही या असामाजिक तत्वों की गतिविधियों को नियंत्रित करना है। भारत-नेपाल सीमा खुली और अत्यधिक आबादी वाले क्षेत्रों से गुजरती है, इसलिए सुरक्षा एजेंसियां ऐसी परिस्थितियों में निगरानी बढ़ाती हैं।

प्रधानमंत्री बालेन शाह ने बुलाई राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक

बढ़ते तनाव के बीच नेपाल के प्रधानमंत्री Balendra Shah यानी बालेन शाह ने गुरुवार को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक की अध्यक्षता की।

बैठक में देश की समग्र सुरक्षा स्थिति के साथ सुनसरी की हालिया हिंसा की समीक्षा की गई। सरकार के मुताबिक, राजनीतिक दलों, स्थानीय प्रतिनिधियों और सुरक्षा एजेंसियों के संयुक्त प्रयासों से सुनसरी में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने की दिशा में है।

राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने सभी सुरक्षा एजेंसियों और संबंधित पक्षों के बीच बेहतर समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया, ताकि सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता कायम रखी जा सके और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

सरकार ने बनाई जांच समिति

सुनसरी की हिंसा को लेकर नेपाल सरकार ने पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति को घटना की परिस्थितियों, सुरक्षा बलों की कार्रवाई और प्रशासनिक स्तर पर हुई चूकों की जांच कर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।

घटना के बाद सुरक्षा बलों की ओर से की गई फायरिंग को लेकर भी सवाल उठे हैं। नेपाल में इस बात की जांच की मांग की जा रही है कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किस परिस्थिति में किया गया और गोली चलाने की जरूरत क्यों पड़ी।

तनाव सिर्फ एक जिले तक सीमित रहने की चुनौती

फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यह है कि स्थानीय स्तर पर शुरू हुआ विवाद दूसरे इलाकों तक न फैल जाए। सुनसरी के बाद सिराहा में कर्फ्यू लगाया जाना प्रशासन की इसी चिंता को दिखाता है।

नेपाल सरकार ने जहां सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने का फैसला किया है, वहीं स्थानीय प्रशासन संवेदनशील इलाकों में भीड़ जुटने, जुलूस और प्रदर्शन पर रोक लगाकर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है।

भारत के लिए भी बिहार से लगी सीमा के कारण घटनाक्रम महत्वपूर्ण है। हालांकि सीमा पर हाई अलर्ट का उद्देश्य मुख्य रूप से एहतियाती सुरक्षा और निगरानी बढ़ाना है; फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में नेपाल की हिंसा के भारत में फैलने की पुष्टि नहीं हुई है।

फिलहाल स्थिति क्या है?

30 जुलाई तक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। सुनसरी में सुरक्षा बलों की तैनाती जारी है और कई क्षेत्रों में प्रतिबंध लागू हैं। सिराहा में भी अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू हो चुका है। हिंसा में मृतकों की संख्या बढ़कर दो हो गई है, जबकि घायलों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर जांच जारी है।

नेपाल सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती सांप्रदायिक तनाव को और फैलने से रोकना, अफवाहों पर नियंत्रण रखना और दोनों समुदायों के बीच विश्वास बहाल करना है। वहीं भारत की ओर बिहार सीमा पर सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए सतर्क हैं।