राज्यसभा में पेपर लीक रोकने वाला संशोधन बिल पेश: सजा बढ़ाने से लेकर 2 महीने में जांच और 3 महीने में ट्रायल का प्रावधान; लोकसभा से हो चुका है पास

राज्यसभा में पेपर लीक रोकने वाला संशोधन बिल पेश: सजा बढ़ाने से लेकर 2 महीने में जांच और 3 महीने में ट्रायल का प्रावधान; लोकसभा से हो चुका है पास

संसद के मानसून सत्र के 9वें दिन गुरुवार को पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों पर शिकंजा कसने वाला ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनफेयर मीन्स की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026’ राज्यसभा में पेश किया गया। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बिल सदन में रखा। इससे एक दिन पहले, 29 जुलाई को लोकसभा ने करीब सात घंटे की चर्चा के बाद विधेयक को ध्वनि मत से पारित किया था।

यह विधेयक 2024 के Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act में संशोधन करता है। मौजूदा कानून का उद्देश्य UPSC, SSC, रेलवे भर्ती बोर्ड, IBPS, NTA और केंद्र सरकार के मंत्रालयों जैसी निर्दिष्ट सार्वजनिक परीक्षा एजेंसियों की परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और अन्य अनुचित साधनों पर रोक लगाना है। 2024 का कानून 21 जून 2024 से लागू है।

बिल में क्या बदलेगा?

संशोधन विधेयक में परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति के लिए मौजूदा 3 से 5 साल की सजा बढ़ाकर 5 से 10 साल करने का प्रस्ताव है। जुर्माने की अधिकतम सीमा भी 10 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपए की जा रही है।

यानी परीक्षा में धोखाधड़ी या अनुचित साधनों के मामले में दोषी पाए जाने पर अब ज्यादा कड़ी सजा का प्रावधान होगा।

सर्विस प्रोवाइडर पर 5 करोड़ तक जुर्माना

परीक्षा कराने वाली एजेंसी या सर्विस प्रोवाइडर की भूमिका सामने आने पर भी सख्त कार्रवाई का प्रस्ताव है। मौजूदा कानून में ऐसे सर्विस प्रोवाइडर पर अधिकतम 1 करोड़ रुपए का जुर्माना है, जिसे बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए किया जा रहा है।

इसके अलावा, परीक्षा संचालन में अनुचित साधनों में शामिल पाए गए सर्विस प्रोवाइडर को सार्वजनिक परीक्षा से जुड़ी जिम्मेदारी देने पर रोक की अवधि 4 साल से बढ़ाकर 8 साल करने का प्रस्ताव है।

कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों पर भी बढ़ेगी सजा

यदि किसी सर्विस प्रोवाइडर के निदेशक या वरिष्ठ प्रबंधन स्तर के अधिकारी परीक्षा में अनुचित साधनों के लिए जिम्मेदार पाए जाते हैं या उनकी मिलीभगत साबित होती है, तो न्यूनतम सजा को 3 साल से बढ़ाकर 5 साल करने का प्रस्ताव है। ऐसे मामले में जुर्माना भी 1 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए किया जाएगा।

संगठित पेपर लीक गिरोह पर सबसे कड़ा प्रावधान

पेपर लीक को संगठित अपराध के रूप में अंजाम देने वाले गिरोहों और संस्थानों के लिए भी सजा बढ़ाई जा रही है।

मौजूदा कानून में संगठित अपराध के लिए न्यूनतम 5 साल की जेल और कम से कम 1 करोड़ रुपए का जुर्माना है। संशोधन में न्यूनतम सजा 7 साल और न्यूनतम जुर्माना 10 करोड़ रुपए करने का प्रस्ताव है।

इसका उद्देश्य पेपर लीक को सिर्फ व्यक्तिगत नकल या धोखाधड़ी का मामला न मानकर संगठित नेटवर्क के रूप में चलने वाले अपराधों पर ज्यादा प्रभावी कार्रवाई करना है।

सिर्फ सजा नहीं, जांच और ट्रायल भी समयबद्ध होंगे

इस बिल की बड़ी खासियत सिर्फ सजा बढ़ाना नहीं है। इसमें पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों के मामलों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया को समयबद्ध करने का भी प्रावधान है।

प्रस्ताव के अनुसार, किसी मामले की जांच 2 महीने के भीतर पूरी करने का प्रावधान होगा। केंद्र सरकार जरूरत पड़ने पर किसी मामले की जांच के लिए Special Task Force भी गठित कर सकेगी।

हर राज्य और UT में स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक कोर्ट ऑफ सेशन को Special Fast Track Court के रूप में नामित करने का प्रस्ताव है। ये अदालतें इस कानून के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई करेंगी।

प्रस्ताव के अनुसार, ट्रायल रोजाना आधार पर चलाया जाएगा और चार्जशीट दाखिल होने की तारीख से 3 महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। लंबित मामलों को भी इन स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट में ट्रांसफर करने का प्रावधान है।

इन अदालतों के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने का भी प्रावधान प्रस्तावित है।

हाईकोर्ट में अपील की भी समयसीमा

स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले, सजा या आदेश के खिलाफ अपील हाईकोर्ट की दो जजों वाली बेंच में की जा सकेगी।

बिल में अपील का निपटारा भी, जहां तक संभव हो, तीन महीने के भीतर करने का प्रावधान प्रस्तावित है। अपील सामान्यतः आदेश के 30 दिनों के भीतर दाखिल करनी होगी; हालांकि पर्याप्त कारण होने पर देरी को लेकर अदालत के पास सीमित अधिकार प्रस्तावित हैं।

2024 के कानून में क्या था?

पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 बनाया था। यह कानून 12 फरवरी 2024 को अधिनियमित हुआ और 21 जून 2024 से लागू हुआ।

इसमें अनुचित साधनों के मामलों में 3 से 5 साल तक की जेल और 10 लाख रुपए तक जुर्माने का प्रावधान था। सर्विस प्रोवाइडर पर 1 करोड़ रुपए तक जुर्माना और परीक्षा संचालन से 4 साल तक प्रतिबंध का प्रावधान था। संगठित अपराध के लिए न्यूनतम 5 साल की सजा और कम से कम 1 करोड़ रुपए के जुर्माने का प्रावधान था।

अब 2026 का संशोधन इन्हीं प्रावधानों को और सख्त करने की कोशिश है।

किन परीक्षाओं पर लागू होता है कानून?

2024 का कानून केंद्र की निर्दिष्ट सार्वजनिक परीक्षा एजेंसियों की परीक्षाओं पर लागू होता है। इनमें प्रमुख रूप से:

UPSC
Staff Selection Commission यानी SSC
Railway Recruitment Boards
Institute of Banking Personnel Selection यानी IBPS
National Testing Agency यानी NTA
केंद्र सरकार के मंत्रालय और उनके अधीन कार्यालय
केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य प्राधिकरण

शामिल हैं।

NEET विवाद के बीच आया संशोधन

इस संशोधन की टाइमिंग भी महत्वपूर्ण है। 2026 में NEET-UG परीक्षा को लेकर विवाद के बाद परीक्षा रद्द कर दोबारा कराई गई। PRS के अनुसार मई 2026 में NEET-UG को रद्द किया गया और अगले महीने दोबारा परीक्षा कराई गई। विधेयक के उद्देश्य और कारण में भी हाल के वर्षों में प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा में गड़बड़ी की घटनाओं से सार्वजनिक परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता प्रभावित होने का उल्लेख किया गया है।

सरकार का तर्क है कि सख्त सजा, समयबद्ध जांच और फास्ट ट्रैक ट्रायल से पेपर लीक करने वाले व्यक्तियों, संगठित गिरोहों और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े संस्थानों पर प्रभावी कार्रवाई हो सकेगी।

विपक्ष ने उठाए सवाल

वहीं, विपक्ष ने विधेयक को लेकर सरकार से परीक्षा व्यवस्था की जवाबदेही और पेपर लीक की घटनाओं को रोकने के लिए सिर्फ सजा बढ़ाने से आगे जाकर सिस्टम में सुधार की मांग की है। लोकसभा में चर्चा के दौरान विपक्षी सांसदों ने परीक्षा संचालन, पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने से जुड़े सवाल उठाए। कुछ विपक्षी सांसदों ने इसे छात्रों की समस्याओं के व्यापक समाधान के बजाय दंड बढ़ाने पर केंद्रित बताया।

संसद के बाहर भी विपक्ष का प्रदर्शन

पेपर लीक बिल के साथ गुरुवार को संसद परिसर में विपक्ष का विरोध भी जारी रहा। कांग्रेस और अन्य विपक्षी सांसदों ने मकर द्वार पर प्रदर्शन किया। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा समेत विपक्षी सांसदों ने हालिया छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाबदेही की मांग की।

राज्यसभा में भी कार्यवाही शुरू होने के दौरान NEET पेपर लीक और पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर विपक्ष ने हंगामा किया। इसके बाद विपक्षी सांसदों के वॉकआउट की खबर सामने आई।

PM मोदी ने की हाईलेवल बैठक

इसी बीच संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय में एक हाईलेवल बैठक भी हुई। बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल, हरदीप सिंह पुरी, सर्बानंद सोनोवाल और NSA अजीत डोभाल शामिल हुए। प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव पी.के. मिश्रा भी बैठक में मौजूद रहे।

बैठक के एजेंडे की आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। इसलिए इसे पेपर लीक बिल से सीधे जोड़ना उचित नहीं होगा।

आगे क्या होगा?

अब राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा और उसके बाद मतदान की प्रक्रिया होगी। चूंकि लोकसभा इसे 29 जुलाई को पारित कर चुकी है, इसलिए राज्यसभा की मंजूरी के बाद इसे राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद अधिसूचना और लागू होने की प्रक्रिया पूरी होगी।

इस संशोधन का सबसे बड़ा असर तीन स्तरों पर दिखाई देने की उम्मीद है—दोषियों के लिए ज्यादा कड़ी सजा, परीक्षा से जुड़े संस्थानों की ज्यादा जवाबदेही और जांच-ट्रायल को समयबद्ध करने की कोशिश।

हालांकि, कानून के प्रभावी होने के बाद असली चुनौती इसका जमीन पर प्रभावी क्रियान्वयन होगी। पेपर लीक रोकने के लिए सिर्फ सजा बढ़ाना पर्याप्त होगा या परीक्षा प्रणाली, प्रश्नपत्र सुरक्षा, डिजिटल प्रक्रियाओं और एजेंसियों की जवाबदेही में भी बदलाव जरूरी होगा—यह आने वाले समय में इसकी सफलता का अहम पैमाना रहेगा।