Harvard University ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ ठोका मुकदमा, 2.2 अरब डॉलर की फंडिंग रोकने पर लिया कड़ा रुख

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ 2.2 अरब डॉलर की फंडिंग रोकने के फैसले को असंवैधानिक बताते हुए मुकदमा दायर किया। यूनिवर्सिटी ने यहूदी-विरोधी आरोपों और सरकारी दबाव को खारिज करते हुए शैक्षणिक स्वतंत्रता की रक्षा का संकल्प लिया। यह विवाद अमेरिका में शिक्षा और सरकार के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाता है।

Harvard University ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ ठोका मुकदमा, 2.2 अरब डॉलर की फंडिंग रोकने पर लिया कड़ा रुख

वाशिंगटन, 22 अप्रैल 2025: दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में शुमार हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के खिलाफ संघीय अदालत में मुकदमा दायर किया है। यह कदम ट्रंप प्रशासन द्वारा यूनिवर्सिटी की 2.2 अरब डॉलर की संघीय फंडिंग पर रोक लगाने के फैसले के जवाब में उठाया गया है। हार्वर्ड ने इस कार्रवाई को असंवैधानिक और अपनी स्वायत्तता पर हमला करार देते हुए कहा है कि वह सरकारी दबाव के आगे नहीं झुकेगा।

विवाद की जड़: यहूदी-विरोधी आरोप और प्रदर्शन

ट्रंप प्रशासन ने हार्वर्ड पर यहूदी छात्रों और प्रोफेसरों के खिलाफ भेदभाव का आरोप लगाया है। प्रशासन का दावा है कि 2023 में गाजा में इजरायल के सैन्य अभियानों के खिलाफ हार्वर्ड कैंपस में हुए प्रदर्शनों में यहूदी-विरोधी भावनाएं भड़कीं, जिन्हें यूनिवर्सिटी प्रशासन ने नियंत्रित नहीं किया। इन प्रदर्शनों में कुछ स्थानों पर यहूदी-विरोधी नारे और बयान सामने आए, जिसके बाद यहूदी छात्रों ने उत्पीड़न की शिकायतें दर्ज कीं। ट्रंप प्रशासन ने इसे संघीय कानूनों का उल्लंघन मानते हुए हार्वर्ड की फंडिंग रोक दी।

इसके अलावा, प्रशासन ने हार्वर्ड से कई नीतिगत बदलावों की मांग की, जिनमें मेरिट-आधारित प्रवेश और भर्ती प्रक्रिया लागू करना, कैंपस में मास्क पहनकर प्रदर्शन पर रोक लगाना, और डाइवर्सिटी, इक्विटी, और इंक्लूजन (DEI) कार्यक्रमों को समाप्त करना शामिल है। ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि DEI कार्यक्रम गैर-यहूदी और गैर-अल्पसंख्यक समूहों के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा देते हैं।

हार्वर्ड का जवाब: संवैधानिक अधिकारों का हनन

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने इन मांगों को सिरे से खारिज कर दिया और ट्रंप प्रशासन की कार्रवाई को शैक्षणिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों पर हमला बताया। यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष एलन गार्बर ने कहा, “कोई भी सरकार, चाहे वह किसी भी पार्टी की हो, यह तय नहीं कर सकती कि निजी विश्वविद्यालय क्या पढ़ाएंगे, किसे प्रवेश देंगे, या किसे नियुक्त करेंगे। यह हमारी स्वायत्तता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है।”

मैसाचुसेट्स की संघीय अदालत में दायर मुकदमे में हार्वर्ड ने दावा किया कि फंडिंग रोकना न केवल अवैध है, बल्कि यह नागरिक अधिकार अधिनियम (टाइटल VI) के तहत आवश्यक प्रक्रियाओं को दरकिनार करता है। यूनिवर्सिटी ने यह भी आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन यहूदी-विरोधी भावनाओं का हवाला देकर शैक्षणिक संस्थानों पर राजनीतिक नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।

फंडिंग का महत्व

हार्वर्ड को हर साल संघीय सरकार से लगभग 2.2 अरब डॉलर का अनुदान और 60 मिलियन डॉलर के अनुबंध मिलते हैं, जो अनुसंधान, छात्रवृत्ति, और विज्ञान परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं। यूनिवर्सिटी का कहना है कि इस फंडिंग पर रोक से शैक्षणिक गतिविधियां और अनुसंधान कार्य बुरी तरह प्रभावित होंगे। इसके बावजूद, हार्वर्ड ने स्पष्ट किया कि वह अपनी नीतियों और मूल्यों से समझौता नहीं करेगा।

ट्रंप का रुख: अन्य विश्वविद्यालय भी निशाने पर

ट्रंप प्रशासन ने हार्वर्ड के अलावा कोलंबिया यूनिवर्सिटी, पेनसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी, और ब्राउन यूनिवर्सिटी जैसे अन्य प्रमुख संस्थानों की फंडिंग पर भी रोक लगाई या धमकी दी है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रूथ सोशल पर लिखा, “हार्वर्ड अब शिक्षा के लिए उपयुक्त स्थान नहीं है। यह वामपंथी और कट्टरपंथी विचारों का गढ़ बन गया है।” उन्होंने यह भी धमकी दी कि अगर हार्वर्ड अपनी नीतियों में बदलाव नहीं करता, तो उसका कर-मुक्त दर्जा छीना जा सकता है।

विशेषज्ञों की राय

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद उच्च शिक्षा और सरकार के बीच बढ़ते तनाव का प्रतीक है। कुछ का कहना है कि ट्रंप प्रशासन की नीतियां शैक्षणिक स्वतंत्रता को कमजोर कर सकती हैं, जबकि अन्य का मानना है कि विश्वविद्यालयों को सार्वजनिक धन का उपयोग करने में अधिक जवाबदेही बरतनी चाहिए। प्रोफेसर डैन कैसिनो ने एक लेख में लिखा, “हार्वर्ड जैसे बड़े संस्थान शायद इस वित्तीय झटके से उबर जाएं, लेकिन छोटे विश्वविद्यालयों के लिए यह संकट गंभीर हो सकता है।”