गोरखपुर में कागज की कश्ती और मौत का दरिया, राप्ती नदी में डूबकर कई बच्चों समेत 8 लोगों की दर्दनाक मौत

गोरखपुर में कागज की कश्ती और मौत का दरिया, राप्ती नदी में डूबकर कई बच्चों समेत 8 लोगों की दर्दनाक मौत

गर्मी से राहत बनी जानलेवा गोरखपुर में तेज गर्मी से राहत पाने के लिए नदियों और घाटों का रुख करना लगातार जानलेवा साबित हो रहा है। राप्ती नदी सहित आसपास के घाटों पर नहाने गए बच्चों और युवाओं की डूबने से मौत के मामले तेजी से बढ़े हैं। पिछले कुछ दिनों में कई परिवारों ने अपने बच्चों को खो दिया, जिससे पूरे इलाके में शोक का माहौल है।

बिना सुरक्षा नदियों में उतरना बना कारण

स्थानीय लोगों के अनुसार, अधिकतर बच्चे और किशोर बिना किसी सुरक्षा इंतजाम या निगरानी के नदी में उतर जाते हैं। तेज बहाव और गहराई का अंदाजा न होने के कारण ये घटनाएं लगातार हो रही हैं।

घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था की कमी

रिपोर्ट के अनुसार, कई खतरनाक घाटों पर न तो पर्याप्त बैरिकेडिंग है और न ही चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। प्रशासन की ओर से सुरक्षा उपायों को लेकर जो दिशा-निर्देश दिए गए हैं, उनका जमीनी स्तर पर पालन कमजोर दिखाई देता है।

राप्ती नदी में बढ़ते हादसे

राप्ती नदी के किनारे हालात सबसे ज्यादा गंभीर बताए जा रहे हैं, जहां नहाने गए कई बच्चों की डूबकर मौत हो चुकी है। इनमें स्कूली बच्चे भी शामिल हैं, जिससे परिवारों में गहरा सदमा है।

परिजनों का दर्द और आक्रोश

घटनाओं के बाद घाटों पर भीड़ और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल देखा गया। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सुरक्षा इंतजाम होते तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।

प्रशासन पर उठते सवाल

लगातार हो रही इन मौतों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि खतरनाक घाटों को चिन्हित कर वहां कड़ी निगरानी, चेतावनी बोर्ड और लाइफगार्ड की व्यवस्था की जाए।

लगातार बढ़ता खतरा

गर्मी के मौसम में ऐसे हादसे हर साल दोहराए जाते हैं, लेकिन इस बार मौतों की संख्या ज्यादा होने से स्थिति और गंभीर हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता और सख्त सुरक्षा उपायों के बिना इन घटनाओं को रोकना मुश्किल है।