जौनपुर में एक साल से बंद टेलीमेडिसिन और टेली रेडियोलॉजी सेवा, ग्रामीण मरीजों पर बढ़ा इलाज का बोझ; करोड़ों के संसाधन पड़े बेकार

जौनपुर में एक साल से बंद टेलीमेडिसिन और टेली रेडियोलॉजी सेवा, ग्रामीण मरीजों पर बढ़ा इलाज का बोझ; करोड़ों के संसाधन पड़े बेकार

अपोलो अस्पताल से अनुबंध खत्म होने के बाद ठप हुई सुविधा, विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह और डिजिटल जांच से वंचित हो रहे ग्रामीण मरीज

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई टेलीमेडिसिन और टेली रेडियोलॉजी योजना पिछले करीब एक साल से बंद पड़ी है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत संचालित यह योजना निजी सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों के विशेषज्ञ डॉक्टरों को ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों से जोड़ने के लिए शुरू की गई थी।

योजना बंद होने के बाद सबसे ज्यादा परेशानी दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीब और जरूरतमंद मरीजों को उठानी पड़ रही है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की ऑनलाइन सलाह और डिजिटल जांच की सुविधा नहीं मिलने से मरीजों को अब निजी अस्पतालों और जांच केंद्रों का सहारा लेना पड़ रहा है, जहां इलाज का खर्च कई गुना बढ़ जाता है।

अपोलो अस्पताल से अनुबंध खत्म होने के बाद बंद हुई सेवा

जौनपुर में टेलीमेडिसिन और टेली रेडियोलॉजी सेवा को वर्ष 2018 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करना और मरीजों को उनके नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पर ही बेहतर इलाज उपलब्ध कराना था।

इस योजना के तहत जिले के कई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को डिजिटल सिस्टम से जोड़ा गया था। यहां मौजूद स्वास्थ्य कर्मी मरीजों की जांच रिपोर्ट, एक्स-रे और अन्य चिकित्सकीय जानकारी ऑनलाइन माध्यम से विशेषज्ञ डॉक्टरों तक पहुंचाते थे।

विशेषज्ञ डॉक्टर मरीजों की रिपोर्ट देखकर उपचार संबंधी सलाह और दवाओं की जानकारी उपलब्ध कराते थे।

लेकिन अपोलो अस्पताल चेन्नई के साथ हुआ सरकारी अनुबंध समाप्त होने के बाद यह पूरी व्यवस्था प्रभावित हो गई। नया अनुबंध नहीं होने के कारण पिछले एक साल से जिले में यह सुविधा बंद पड़ी है।

14 सीएचसी और 7 अस्पतालों में प्रभावित हुई सुविधा

टेलीमेडिसिन सेवा के माध्यम से जिले के कई ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह मिल रही थी।

वहीं टेली रेडियोलॉजी सुविधा के जरिए मरीजों के एक्स-रे और अन्य जांचों की रिपोर्ट विशेषज्ञ रेडियोलॉजिस्ट तक भेजी जाती थी।

वर्तमान में जिन केंद्रों पर यह सेवाएं प्रभावित हैं, उनमें शामिल हैं:

टेलीमेडिसिन सेवा वाले केंद्र:
नौपेड़वां
सुजानगंज
मुफ्तीगंज
डोभी
रेहटी
खुटहन
मछलीशहर
रामनगर
रामपुर
महराजगंज
बरसठी
केराकत
सीएचसी बदलापुर
टेली रेडियोलॉजी सेवा वाले अस्पताल:
मड़ियाहूं
बरसठी
मछलीशहर
बदलापुर
डोभी
शाहगंज
महराजगंज
गंभीर बीमारियों के मरीजों को मिलती थी विशेषज्ञ सलाह

टेलीमेडिसिन योजना के तहत मरीजों को कई गंभीर बीमारियों के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह मिलती थी।

अपोलो अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टर ऑनलाइन माध्यम से:

जनरल मेडिसिन
स्त्री रोग
हड्डी रोग (ऑर्थोपेडिक)
बाल रोग
गैस्ट्रोएंटरोलॉजी
हृदय रोग
किडनी रोग
न्यूरोलॉजी

जैसे विभागों में चिकित्सकीय परामर्श देते थे।

ग्रामीण मरीजों को इसके लिए बड़े शहरों में जाने की जरूरत नहीं पड़ती थी। उन्हें अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से ही विशेषज्ञ उपचार की दिशा मिल जाती थी।

गरीब मरीजों पर बढ़ा निजी इलाज का आर्थिक दबाव

सेवा बंद होने के बाद ग्रामीण इलाकों के मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों और जांच केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि पहले जहां डिजिटल जांच और डॉक्टरों की सलाह सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर उपलब्ध हो जाती थी, वहीं अब उसी सुविधा के लिए निजी केंद्रों पर पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।

कई मरीजों और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि महंगे इलाज और जांच के कारण परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है और कई लोग कर्ज लेने तक को मजबूर हो रहे हैं।

करोड़ों रुपये के उपकरण और संसाधन बन रहे शोपीस

टेलीमेडिसिन योजना के लिए स्वास्थ्य केंद्रों में लगाए गए डिजिटल उपकरण अब लंबे समय से उपयोग के बिना पड़े हैं।

इनमें:

मॉनिटर
कैमरे
डिजिटल संचार उपकरण
टेलीमेडिसिन सिस्टम

शामिल हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार द्वारा लगाए गए लाखों-करोड़ों रुपये के संसाधनों का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि सरकार जल्द से जल्द इस सेवा को दोबारा शुरू करे, ताकि सरकारी निवेश का लाभ आम लोगों तक पहुंच सके।

ग्रामीणों ने जताई नाराजगी

स्थानीय नागरिकों ने योजना बंद होने पर चिंता जताई है।

मछलीशहर क्षेत्र के लोगों का कहना है कि टेलीमेडिसिन सेवा ग्रामीणों के लिए किसी वरदान से कम नहीं थी। इसके जरिए बिना ज्यादा खर्च किए विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह मिल जाती थी।

कुछ लोगों ने कहा कि अब सामान्य जांचों के लिए भी निजी पैथोलॉजी केंद्रों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जहां कई बार अधिक शुल्क लिया जाता है।

नागरिकों का कहना है कि यदि अनुबंध समाप्त हो गया था तो स्वास्थ्य विभाग को समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी।

स्वास्थ्य विभाग ने जल्द समाधान का दिया भरोसा

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सेवा तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से प्रभावित हुई है।

सीएचसी मछलीशहर के अधीक्षक डॉ. अजय सिंह ने बताया कि टेलीमेडिसिन और टेली रेडियोलॉजी सेवा फिलहाल बंद है और समस्या के समाधान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शासन स्तर से जल्द सेवा शुरू होने की उम्मीद है।

वहीं मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. गंगाराम गौतम ने बताया कि यह सुविधा पूरे प्रदेश में अस्थायी रूप से प्रभावित हुई है। इसके लिए शासन स्तर पर पत्राचार किया गया है और जल्द समाधान की कोशिश की जा रही है।

विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं को गांवों तक पहुंचाने की थी योजना

टेलीमेडिसिन योजना का मुख्य उद्देश्य यही था कि ग्रामीण मरीजों को बड़े शहरों के अस्पतालों जैसी विशेषज्ञ सुविधाएं अपने क्षेत्र में ही मिल सकें।

भारत में डॉक्टरों की कमी और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की अनुपलब्धता को देखते हुए टेलीमेडिसिन को स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा कदम माना गया था।

जौनपुर में इस योजना के बंद होने से एक बार फिर ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था में विशेषज्ञ सेवाओं की कमी सामने आ गई है।

अब नजर शासन के अगले कदम पर

एक साल से बंद पड़ी इस सेवा को दोबारा शुरू करने की मांग लगातार उठ रही है।

ग्रामीण मरीजों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और स्वास्थ्य कर्मियों को उम्मीद है कि सरकार जल्द नई व्यवस्था तैयार कर टेलीमेडिसिन और टेली रेडियोलॉजी सेवाओं को फिर से शुरू करेगी।

फिलहाल हजारों मरीजों को इस सुविधा के दोबारा शुरू होने का इंतजार है।