यूपी में बीज वितरण व्यवस्था होगी पूरी तरह डिजिटल, 1 अगस्त से 'साथी पोर्टल' के जरिए मिलेगा बीज; पंजीकरण नहीं कराने वाले विक्रेताओं का लाइसेंस होगा निरस्त
उत्तर प्रदेश में किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने, बीज वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने और कालाबाजारी पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से केंद्र और राज्य सरकार एक बड़ी डिजिटल व्यवस्था लागू करने जा रही हैं। 1 अगस्त 2026 से प्रदेश में किसानों को बीज 'साथी पोर्टल' (Saathi Portal) के माध्यम से ही उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही निजी बीज विक्रेताओं के लिए भी नई व्यवस्था अनिवार्य कर दी गई है। अब बिना ऑनलाइन पंजीकरण के कोई भी लाइसेंसधारी बीज विक्रेता किसानों को बीज नहीं बेच सकेगा।
कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि 31 जुलाई 2026 तक सभी निजी बीज विक्रेताओं को साथी पोर्टल पर अपना पंजीकरण और प्रोफाइल अपडेट करना अनिवार्य होगा। निर्धारित समय सीमा तक पंजीकरण नहीं कराने वाले विक्रेताओं के खिलाफ लाइसेंस निरस्तीकरण सहित नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। सरकार का कहना है कि नई डिजिटल व्यवस्था से बीज वितरण की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी, जिससे किसानों को प्रमाणित बीज उपलब्ध कराने के साथ-साथ अनियमितताओं पर भी रोक लगेगी।
बीज बिक्री की पुरानी व्यवस्था होगी समाप्त
अब तक अधिकांश निजी बीज विक्रेता किसानों को सीधे बीज बेचते थे और भुगतान नकद या अन्य माध्यमों से लेकर हस्तलिखित रसीद जारी कर देते थे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह प्रणाली समाप्त हो जाएगी। अब बीज की खरीद-बिक्री, भुगतान, स्टॉक और वितरण की पूरी प्रक्रिया साथी पोर्टल के माध्यम से दर्ज होगी।
किसान पोर्टल के माध्यम से बीज खरीद सकेंगे और भुगतान भी डिजिटल तरीके से किया जाएगा। इससे प्रत्येक खरीद का रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध रहेगा और किसी भी प्रकार की हेराफेरी या गलत बिलिंग की संभावना कम होगी।
898 बीज विक्रेताओं को जारी किए गए लॉगिन आईडी और पासवर्ड
सुलतानपुर जिले में कृषि विभाग ने 898 निजी बीज विक्रेताओं को शासन द्वारा उपलब्ध कराए गए यूजर आईडी और पासवर्ड वितरित कर दिए हैं। सभी विक्रेताओं को पोर्टल पर लॉगिन करके अपनी प्रोफाइल अपडेट करनी होगी।
इसके तहत उन्हें निम्न दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करने होंगे—
आधार कार्ड
बीज विक्रय लाइसेंस
दुकान का विवरण
पासपोर्ट साइज फोटो
अन्य आवश्यक प्रमाणपत्र
विभागीय अधिकारियों के अनुसार निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही विक्रेता किसानों को प्रमाणित एवं अनुदानित बीज बेच सकेंगे।
अभी तक सीमित दुकानदारों ने कराया पंजीकरण
कृषि विभाग के अनुसार शुक्रवार शाम तक जिले के केवल 36 निजी बीज विक्रेताओं ने साथी पोर्टल पर सफलतापूर्वक अपना पंजीकरण कराया था। विभाग का कहना है कि शेष दुकानदारों को भी समय सीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी करनी होगी, अन्यथा उनके लाइसेंस पर कार्रवाई की जाएगी।
कैसे काम करेगी नई डिजिटल व्यवस्था
नई प्रणाली में बीज वितरण की पूरी सप्लाई चेन ऑनलाइन होगी।
बीज निर्माता कंपनियां पोर्टल पर थोक विक्रेताओं को बीज आवंटित करेंगी।
थोक विक्रेता पोर्टल के माध्यम से लाइसेंसधारी खुदरा विक्रेताओं को स्टॉक उपलब्ध कराएंगे।
खुदरा विक्रेता उसी पोर्टल के जरिए किसानों को बीज बेचेंगे।
प्रत्येक बिक्री, भुगतान और स्टॉक की जानकारी रियल टाइम में दर्ज होगी।
इससे कृषि विभाग किसी भी समय यह देख सकेगा कि किस विक्रेता ने किस किसान को कौन-सा बीज, कितनी मात्रा में और किस कीमत पर बेचा है।
कालाबाजारी और फर्जी बिक्री पर लगेगी रोक
कृषि विभाग का मानना है कि नई डिजिटल व्यवस्था से बीज की कालाबाजारी, स्टॉक छिपाने, अधिक कीमत वसूलने तथा फर्जी बिलिंग जैसी अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा।
पहले बीज बिक्री का अधिकांश रिकॉर्ड ऑफलाइन होने के कारण निगरानी में कठिनाई आती थी। अब प्रत्येक लेन-देन ऑनलाइन रिकॉर्ड होगा, जिससे अधिकारियों को निगरानी और जांच में सुविधा मिलेगी।
किसान बारकोड स्कैन कर सकेंगे पूरी जानकारी
नई व्यवस्था के तहत किसानों को बीज खरीदते समय उसकी गुणवत्ता की जानकारी भी आसानी से उपलब्ध होगी। प्रत्येक बीज पैकेट या बोरी पर दिए गए बारकोड अथवा QR कोड को मोबाइल फोन से स्कैन करके किसान निम्न जानकारियां प्राप्त कर सकेंगे—
बीज का नाम एवं किस्म
उत्पादन करने वाली कंपनी
उत्पादन एवं पैकिंग की तिथि
वैधता अवधि
अंकुरण क्षमता
पोषक तत्वों की जानकारी
संबंधित फसल की अवधि
उपयोग संबंधी दिशा-निर्देश
इससे किसानों को प्रमाणित और गुणवत्तापूर्ण बीज की पहचान करने में सुविधा होगी।
अनुदानित बीज वितरण भी होगा ऑनलाइन
सरकारी अनुदान पर मिलने वाले बीजों का वितरण भी इसी पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि पात्र किसानों तक अनुदान का लाभ पारदर्शी तरीके से पहुंचे और किसी प्रकार की फर्जीवाड़े की संभावना न रहे।
कृषि विभाग ने जारी की सख्त चेतावनी
जिला कृषि अधिकारी राजपति शुक्ल ने बताया कि केंद्र सरकार की नई व्यवस्था के तहत 1 अगस्त 2026 से साथी पोर्टल के बिना बीज वितरण संभव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सभी निजी बीज विक्रेताओं को 31 जुलाई तक पंजीकरण पूरा करना अनिवार्य है। यदि कोई विक्रेता समय पर पंजीकरण नहीं कराता है तो उसका लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि इस डिजिटल प्रणाली से किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के साथ-साथ बीज वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी, सरकारी निगरानी मजबूत होगी और कालाबाजारी जैसी समस्याओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
नई व्यवस्था से किसानों को क्या होंगे लाभ?
प्रमाणित एवं गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता।
बीज खरीद का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड।
ऑनलाइन भुगतान की सुविधा।
बीज की गुणवत्ता की तुरंत जांच।
अनुदान वितरण में पारदर्शिता।
नकली एवं अवैध बीज बिक्री पर रोक।
सरकारी निगरानी मजबूत होने से किसानों के हितों की बेहतर सुरक्षा।
शिकायतों के निस्तारण में आसानी और जवाबदेही में वृद्धि।
सरकार का मानना है कि साथी पोर्टल के माध्यम से लागू होने वाली यह नई व्यवस्था प्रदेश में कृषि क्षेत्र के डिजिटलीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। इससे बीज वितरण प्रणाली अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और किसान-केंद्रित बनने की उम्मीद है।
news desk MPcg