MP में ₹1200 करोड़ के कथित चावल घोटाले का आरोप: एथेनॉल के नाम पर सरकारी अनाज के इस्तेमाल पर खड़गे का हमला, जानिए क्या है पूरा विवाद

MP में ₹1200 करोड़ के कथित चावल घोटाले का आरोप: एथेनॉल के नाम पर सरकारी अनाज के इस्तेमाल पर खड़गे का हमला, जानिए क्या है पूरा विवाद

मध्यप्रदेश में सरकारी चावल के एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल को लेकर सियासी विवाद गहराता जा रहा है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य में करीब ₹1200 करोड़ के चावल घोटाले का मामला सामने आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि गरीबों, कुपोषित बच्चों, गर्भवती महिलाओं और किशोरियों के पोषण के लिए निर्धारित चावल को कथित तौर पर एथेनॉल उत्पादन के नाम पर मुनाफे के खेल में इस्तेमाल किया गया।

हालांकि, कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और जांच के बीच केंद्र में है।

एथेनॉल के नाम पर सरकारी चावल के इस्तेमाल को लेकर विवाद

यह पूरा मामला सरकार द्वारा एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उपलब्ध कराए गए सरकारी चावल से जुड़ा है।

देश में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की नीति के तहत एथेनॉल उत्पादन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके लिए केंद्र सरकार समय-समय पर अतिरिक्त खाद्यान्न के इस्तेमाल की अनुमति देती है।

मध्यप्रदेश में भी एथेनॉल उत्पादन करने वाली इकाइयों को सरकारी चावल उपलब्ध कराया गया था। आरोप है कि बड़ी मात्रा में आवंटित चावल का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुसार नहीं हुआ।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, करीब 5 लाख मीट्रिक टन यानी 50 लाख क्विंटल सरकारी चावल एथेनॉल उत्पादन के लिए आवंटित किया गया था। इस चावल की अनुमानित कीमत करीब ₹1160 करोड़ से ₹1200 करोड़ के बीच बताई जा रही है।

दैनिक भास्कर की पड़ताल के बाद सामने आया मामला

यह विवाद एक मीडिया पड़ताल के बाद सामने आया। रिपोर्ट में दावा किया गया कि एथेनॉल बनाने के लिए भेजे गए सरकारी चावल का बड़ा हिस्सा वास्तव में एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल नहीं हुआ।

रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ चावल दोबारा सरकारी खरीद और भंडारण व्यवस्था तक पहुंच गया।

जांच का मुख्य सवाल यही है कि:

एथेनॉल प्लांट्स को भेजा गया चावल कहां इस्तेमाल हुआ?
क्या निर्धारित मात्रा में एथेनॉल उत्पादन हुआ?
क्या सरकारी रिकॉर्ड और वास्तविक उपयोग में अंतर है?
क्या किसी स्तर पर चावल की डायवर्जन या हेराफेरी हुई?

इन सवालों की जांच संबंधित एजेंसियों द्वारा की जा रही है।

खड़गे ने भाजपा सरकार पर साधा निशाना

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए मध्यप्रदेश सरकार पर हमला बोला।

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में भ्रष्टाचार लगातार बढ़ रहा है और एक मामला खत्म होने से पहले दूसरा सामने आ जाता है।

खड़गे ने कहा कि जिस चावल का इस्तेमाल समाज के कमजोर वर्गों के पोषण के लिए होना चाहिए था, उसे कथित रूप से निजी लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि राइस मिलरों, एथेनॉल उद्योग और सरकारी तंत्र की मिलीभगत से जनता के अधिकारों से जुड़ा अनाज प्रभावित हुआ।

फोर्टिफाइड चावल को लेकर बढ़ा विवाद

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल फोर्टिफाइड चावल को लेकर उठाया जा रहा है।

फोर्टिफाइड चावल में आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन जैसे पोषक तत्व मिलाए जाते हैं। इसका उद्देश्य देश में कुपोषण और एनीमिया जैसी समस्याओं को कम करना है।

सरकार कई योजनाओं के तहत फोर्टिफाइड चावल का वितरण करती है। इनमें:

आंगनबाड़ी केंद्र,
मध्यान्ह भोजन योजना,
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS),
पोषण योजनाएं

शामिल हैं।

कांग्रेस का आरोप है कि ऐसे चावल को एथेनॉल उत्पादन के नाम पर दूसरी जगह इस्तेमाल करना गंभीर मामला है।

हालांकि, सरकारी व्यवस्था के तहत एथेनॉल उत्पादन के लिए उपलब्ध कराए गए चावल और पोषण योजनाओं के लिए निर्धारित चावल की प्रक्रिया अलग-अलग होती है। इसलिए पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

₹4000 प्रति क्विंटल वाले चावल को ₹2320 में देने का दावा

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सरकार द्वारा करीब ₹4000 प्रति क्विंटल मूल्य वाले चावल को एथेनॉल प्लांट्स को लगभग ₹2320 प्रति क्विंटल की दर से उपलब्ध कराया गया।

इस व्यवस्था का उद्देश्य एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देना था।

लेकिन विवाद इस बात को लेकर है कि जिस रियायती दर पर चावल दिया गया, उसका उपयोग वास्तव में एथेनॉल उत्पादन में हुआ या नहीं।

यदि आवंटित चावल का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अलावा कहीं और हुआ है तो यह जांच का विषय बनता है।

जांच के लिए एसआईटी गठित

चावल डायवर्जन से जुड़े मामले में जांच के लिए एसआईटी गठित किए जाने की जानकारी सामने आई है।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि:

चावल की सप्लाई चेन में कहां गड़बड़ी हुई?
कौन-कौन लोग या संस्थाएं इसमें शामिल हो सकती हैं?
सरकारी रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में कितना अंतर है?

जांच पूरी होने के बाद ही यह तय होगा कि मामले में किसी तरह की वित्तीय अनियमितता या आपराधिक लापरवाही हुई है या नहीं।

कांग्रेस ने उठाया जवाबदेही का मुद्दा

कांग्रेस ने इस मामले को लेकर भाजपा सरकार से जवाब मांगा है।

खड़गे ने आरोप लगाया कि मध्यप्रदेश में पहले व्यापमं, पेपर लीक और अन्य मामलों को लेकर सवाल उठते रहे हैं और अब सरकारी अनाज से जुड़ा मामला सामने आया है।

उन्होंने कहा कि जनता के लिए बनाई गई योजनाओं और संसाधनों में पारदर्शिता जरूरी है।

भाजपा सरकार के सामने चुनौती

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब देशभर में खाद्य सुरक्षा और सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता को लेकर लगातार चर्चा होती रही है।

सरकार के सामने अब यह स्पष्ट करने की चुनौती है कि एथेनॉल नीति के तहत दिए गए चावल का उपयोग नियमों के अनुसार हुआ या नहीं।

वहीं विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से उठा रहा है और सरकार से जवाब मांग रहा है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल यह मामला जांच के दायरे में है। जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि:

क्या वास्तव में कोई घोटाला हुआ?
क्या चावल की सप्लाई में नियमों का उल्लंघन हुआ?
किन लोगों की भूमिका रही?

तब तक यह मामला मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है।