रामलला चढ़ावा मामले की जांच तेज: आज SIT के सामने साक्ष्य पेश करेंगे संतोष दुबे, ट्रस्ट की भूमि खरीद पर भी उठाए सवाल
अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने धर्म सेना के अध्यक्ष संतोष दुबे को साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए बुलाया है। इससे पहले एसआईटी ने उनसे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रारंभिक जानकारी और दस्तावेजों के संबंध में बातचीत की थी। अब सोमवार को उनसे प्रत्यक्ष रूप से उपलब्ध साक्ष्यों और उनके आरोपों के समर्थन में जानकारी ली जाएगी।
यह मामला रामलला के चढ़ावे की गणना और प्रबंधन से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर सामने आया था। जांच के दौरान कई प्रशासनिक प्रक्रियाओं की समीक्षा की जा रही है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और किसी भी पक्ष पर अंतिम निष्कर्ष या दोष तय नहीं किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा प्रतिदिन बड़ी मात्रा में नकद और अन्य प्रकार का चढ़ावा अर्पित किया जाता है। कुछ समय पहले चढ़ावे के प्रबंधन और गणना प्रक्रिया को लेकर कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आए, जिसके बाद मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया।
जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि चढ़ावे की प्राप्ति, गणना, रिकॉर्डिंग और जमा करने की प्रक्रिया में कहीं कोई वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता तो नहीं हुई।
संतोष दुबे ने लगाए कई आरोप
धर्म सेना के अध्यक्ष संतोष दुबे लंबे समय से इस पूरे मामले में सवाल उठाते रहे हैं। उनका आरोप केवल कथित चढ़ावा अनियमितताओं तक सीमित नहीं है। उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा की गई कुछ भूमि खरीद प्रक्रियाओं पर भी सवाल उठाए हैं।
दुबे का दावा है कि ट्रस्ट द्वारा भूमि खरीद में वित्तीय अनियमितताएं और कथित हेराफेरी हुई है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित मामलों में जांच एवं कानूनी प्रक्रिया जारी है।
आज SIT के सामने रखेंगे साक्ष्य
एसआईटी ने संतोष दुबे को सोमवार को साक्ष्यों सहित उपस्थित होने के लिए बुलाया है। जांच टीम उनके पास उपलब्ध दस्तावेजों, रिकॉर्ड, दावों और अन्य प्रमाणों का परीक्षण करेगी। यदि प्रस्तुत सामग्री जांच के लिए प्रासंगिक पाई जाती है, तो उसे विवेचना का हिस्सा बनाया जा सकता है।
जांच एजेंसियां सभी पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच कर रही हैं।
SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद बढ़ी चर्चा
मामले में एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आने के बाद ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी चर्चाएं तेज हुई हैं। रिपोर्ट के बाद ट्रस्ट के भीतर कार्यों के विभाजन और जिम्मेदारियों के निर्धारण को लेकर विभिन्न स्तरों पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
चर्चा का विषय यह भी रहा कि ट्रस्ट में कई सदस्य होने के बावजूद मंदिर की व्यवस्थाओं में कुछ चुनिंदा पदाधिकारियों की सक्रिय भूमिका अधिक दिखाई देती रही। हालांकि ट्रस्ट की ओर से समय-समय पर कार्य विभाजन की व्यवस्था होने की बात कही जाती रही है।
यह उल्लेखनीय है कि एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट अंतिम जांच रिपोर्ट नहीं है और जांच अभी जारी है।
चढ़ावा गणना व्यवस्था में किए गए बदलाव
मामले के सामने आने के बाद मंदिर प्रशासन ने चढ़ावे की गणना प्रक्रिया में कुछ प्रशासनिक बदलाव भी लागू किए हैं।
नई व्यवस्था के तहत—
अब कर्मचारियों को साप्ताहिक अवकाश दिया जाएगा।
रविवार को चढ़ावे की गणना नहीं की जाएगी।
नई गणना नियमावली लागू की गई है।
कर्मचारियों के कार्य समय और प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित किया गया है।
सूत्रों के अनुसार, श्रीराम मंदिर में प्रतिदिन लगभग 18 से 20 लाख रुपये तक का नकद चढ़ावा प्राप्त हो रहा है। इतनी बड़ी राशि के प्रबंधन को देखते हुए पारदर्शी और व्यवस्थित प्रणाली लागू करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
RSS ने भी जताई चिंता
चढ़ावा प्रबंधन से जुड़े विवाद के सामने आने के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने भी इस घटना पर चिंता व्यक्त की थी। संघ ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए तथा मंदिर प्रबंधन में पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
जांच अभी जारी, अंतिम निष्कर्ष शेष
फिलहाल एसआईटी विभिन्न पक्षों के बयान, दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण कर रही है। संतोष दुबे द्वारा लगाए गए आरोपों तथा उनके द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले साक्ष्यों की भी जांच की जाएगी।
अब तक किसी भी व्यक्ति या संस्था की कानूनी जिम्मेदारी अथवा दोष अदालत द्वारा निर्धारित नहीं किया गया है। मामले में अंतिम निष्कर्ष एसआईटी की विस्तृत जांच रिपोर्ट और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
news desk MPcg